पर्यावरण और धारणीय विकास Notes
Class 11 Economics Chapter 7 Notes in Hindi
यहाँ हम कक्षा 11 अर्थशास्त्र के 7th अध्याय “पर्यावरण और धारणीय विकास” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में पर्यावरण और धारणीय विकास से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
पर्यावरण और धारणीय विकास Notes, Class 11 Economics Chapter 7 Notes in Hindi

कक्षा 11 अर्थशास्त्र अध्याय 7 के नोट्स हिंदी में
धारणीय विकास
ऐसा विकास पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए हो और आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदुषणरहित हो जो भावी पीढ़ी के लिए स्वच्छ एवं अधिक संसाधन उपलब्ध कर सके तो इसे धारणीय विकास कहते हैं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन द्वारा धारणीय विकास की परिभाषा :
“ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं पूर्ति भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति में बिना समझौता किए पूरा करे।”
ब्रूटलैंड कमीशन द्वारा धारणीय विकास की परिभाषा :
“हमारा नैतिक दायित्व है कि वर्त्तमान पीढ़ी को आगामी पीढ़ी द्वारा एक बेहतर पर्यावरण उतराधिकार के रूप में सौपा जाना चाहिए। कम से कम हमें आगामी पीढ़ी के जीवन के लिए अच्छी गुणवता वाली परिसंपतियों का भंडार छोड़ना चाहिए, जो कि हमें अपने पिछली पीढ़ी से विरासत के रूप में प्राप्त हुआ है।”
धारणीय विकास एवं आर्थिक विकास में अन्तर
धारणीय विकास :
- धारणीय विकास में प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में दीर्घकालीन वृद्धि होती है।
- इससे वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के आर्थिक कल्याण में वृद्धि होती है।
- यह पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदुषण से बचाव पर विशेष बल देती है।
- इसमें प्राकृतिक पूँजी का उचित प्रयोग होता है जिससे भावी पीढ़ियों के हितों की रक्षा की जा
आर्थिक विकास :
- इसमें प्रति व्यक्ति आय में दीर्घकालिक वृद्धि होती है।
- इसमें वर्त्तमान पीढ़ियों के आर्थिक कल्याण में वृद्धि होती है।
- यह पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदुषण को महत्व नहीं देती है।
- इसमें प्राकृतिक पूँजी का शोषण होता है।
धारणीय विकास के लिए अनिवार्य शर्ते
- मानव जनसँख्या को पर्यावरण की धारण क्षमता के स्तर तक सिमित करना।
- प्रौद्योगिकी प्रगति आगत-कुशल होना चाहिए न कि आगत का उपभोग करने वाली।
- नवीकरणीय संसाधनों की प्राप्ति धारणीय आधार पर की जानी चाहिए।
- गैर-नवीकरणीय संसाधनों के रिक्तिकरण की दर नवीकरणीय प्रतिस्थापकों की संवृद्धि की दर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- प्रदूषण से उत्पन्न अक्षमताओं का सुधार किया जाना चाहिए।
धारणीय विकास की प्राप्ति के उपाय
- अधिक से अधिक उर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों का उपयोग।
- बायोमास ईंधन के उपयोग के बजाय गैसों का प्रयोग।
- वन विनाश पर रोक ।
- अधिक से अधिक जलीय विद्युत संयंत्रों की स्थापना।
- पारंपरिक व्यवहारों का उपयोग ताकि पर्यावरण की अनुकूलता बनी रहे।
- कृषि के लिए जैविक कम्पोस्ट का उपयोग और जैविक कृषि को बढ़ावा ।
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