रोजगार संवृद्धि अनौपचारिकरण एवं अन्य मुद्दे Notes
Class 11 Economics Chapter 6 Notes in Hindi

यहाँ हम कक्षा 11 अर्थशास्त्र के 6th अध्याय “रोजगार संवृद्धि अनौपचारिकरण एवं अन्य मुद्दे” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में रोजगार संवृद्धि अनौपचारिकरण एवं अन्य मुद्दे से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।

ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।

रोजगार संवृद्धि अनौपचारिकरण एवं अन्य मुद्दे Notes, Class 11 Economics Chapter 6 Notes in Hindi

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कक्षा 11 अर्थशास्त्र अध्याय 6 के नोट्स हिंदी में

श्रमिक

वे सभी व्यक्ति जो किसी भी आर्थिक क्रियाओं में संलग्न होते हैं, श्रमिक कहलाते हैं।

आर्थिक क्रिया

सकल राष्ट्रिय उत्पाद (GNP) में योगदान देने वाले सभी क्रियाकलापों को हम आर्थिक क्रियाएँ कहते हैं।

सकल घरेलु उत्पाद (GDP)

किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य इसका ‘सकल घरेलू उत्पाद’ कहलाता है।

आर्थिक क्रिया एवं उत्पादन क्रिया में अंतर

  • आर्थिक क्रिया एवं उत्पादन क्रिया में अंतर है ये दोनों एक नहीं है। उत्पादन क्रिया आर्थिक क्रिया का एक भाग है। है अर्थात उत्पादन क्रिया आर्थिक में शामिल है।
  • किसी भी उत्पादन क्रिया में हम या तो स्व-नियोजित होते है या भाड़े के मजदूर लगाकर उत्पादन क्रिया को करते है।

मजदूरों के प्रकार

स्व-नियोजित मजदूरः

वे सभी मजदूर जो अपने उद्यम के स्वामी और संचालक हैं, उन्हें स्वनियोजित मजदूर कहा जाता है।

भाड़े के मजदूरः

  • वे लोग जो भाड़े पर दूसरों का काम करते है तथा अपनी सेवाओं के पुरुस्कार के रूप में मजदूरी/वेतन प्राप्त करते हैं, भाड़े के मजदूर कहलाते है।
  • भाड़े के मजदूर दो प्रकार के होते हैं।

1. नियमित मजदूर :

जब किसी श्रमिक को कोई व्यक्ति या उद्यमी नियमित रूप से काम पर रख उसे मजदूरी (वेतन) देता है, तो वह श्रमिक नियमित मजदूर अथवा नियमित वेतन भोगी कर्मचारी कहलाता है।

2. अनियमित मजदूर :

  • ऐसे श्रमिक जिन्हें कोई व्यक्ति या उद्यमी नियमित रूप से काम पर नहीं रखता है, सिर्फ उसे दैनिक मजदूरी पर ही रखता है, अनियमित मजदूर कहलता है।
  • ऐसे मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ जैसे- भविष्य निधि (Provident Fund), पेंशन (Pension) आदि नहीं मिलता हैं। इनका नाम उद्यम के स्वामियों के स्थायी वेतन सूचियों में नहीं होता हैं।

नियमित मजदुर और अनियमित मजदूर में अंतर

नियमित मजदुर

  • ये वेतन पर काम करते हैं और इन्हें नियमित रूप से काम पर रखा जाता है।
  • इनका नाम स्थायी वेतन सूची में दर्ज होता है।
  • इनका प्रतिदिन काम करने का समय निश्चित होता है।
  • इन्हें सामाजिक सुरक्षा के सभी सुविधाएँ प्राप्त होती है।जैसे- स्वाथ्य, पेंशन, भविष्य निधि आदि।
  • ये मजदूर कुशल होते है।

अनियमित मजदुर

  • ये दैनिक मजदूरी पर काम करते है, और इन्हें नियमित कार्य पर नहीं रखा जाता है।
  • इनका नाम स्थायी वेतन सूची में दर्ज नहीं होता है।
  • इनका काम करने का समय निश्चित नहीं होता है।
  • ऐसे मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ जैसे- भविष्य निधि (Provident Fund), पेंशन (Pension) आदि नहीं मिलता हैं।

श्रम आपूर्ति (Labour Supply)

श्रम आपूर्ति से अभिप्राय श्रम की उस मात्रा से है जिसे मजदूर एक विशेष मजदूरी दर पर स्वेच्छापूर्वक अर्पित करते है।

श्रम बल (Labour Force)

श्रम बल से अभिप्राय है श्रमिकों कि उस संख्या से जो वास्तव में काम कर रहे हैं या काम करने के इच्छुक हैं।

कार्यबल (Workforce)

कार्यबल से अभिप्राय काम करने वाले इन व्यक्तियों से है जो वास्तव में कार्य कर रहे हैं न कि काम करने के इच्छुक है।

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