खेल व पोषण Notes
Class 12 physical education Chapter 5 Notes in Hindi

यहाँ हम कक्षा 11 शारीरिक शिक्षा के 5th अध्याय “खेल व पोषण” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में खेल व पोषण से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।

ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।

खेल व पोषण Notes, Class 12 physical education Chapter 5 Notes in Hindi

खेल व पोषण Notes, Class 12 physical education Chapter 5 Notes in Hindi

कक्षा 12 शारीरिक शिक्षा अध्याय 5 के नोट्स हिंदी में

संतुलित आहार

  • वह आहार जिससे व्यक्ति को शरीर के लिए सभी आवश्यक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं। संतुलित आहार कहलाता है।
  • संतुलित आहार एक ऐसा आहार है जिसमें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व होते हैं जिनकी हमें एक दिन में आवश्यकता होती है। संतुलित आहार में में वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, पानी, फाइबर, विटामिन और खनिज शामिल होते है।

संतुलित आहार के कार्य

  • हमें काम करने की पर्याप्त ऊर्जा संतुलित आहार से मिलती है।
  • यह व्यक्ति की वृद्धि और विकास में सहायता करता है।
  • संतुलित आहार सभी संस्थानों को सही प्रकार से कार्य करने में सहायता प्रदान करता है।
  • यह सभी टूटे फूटे उत्तकों की मरम्मत में सहायता करता है।
  • संतुलित आहार शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है।
  • यह शरीर का संपूर्ण स्वास्थ्य का स्तर बढ़ाता है।
  • यह शरीर की चयापचय क्षमता में वृद्धि करता है।
  • यह शरीर में किसी भी प्रकार की कमी से होने वाली बिमारियों को कम करता है तथा शरीर का सही भार बनाए रखता है तथा व्यक्ति की कार्य क्षमता में बढ़ोत्तरी करता है।

पोषक तत्व

  • पोषक तत्व भोजन का एक घटक होता है जिसे जीव जीवित रहने और वृद्धि करने के लिये उपयोग करता है।
  • ये दो प्रकार के होते हैं।

1. मेक्रो (वृहत्) पोषक तत्वः-

वे पोषक तत्व जो हमारे भोजन में अधिक मात्रा में होते है या हमारे शरीर को जिन पोषक पदार्थों की अधिक मात्रा में आवश्यक्ता होती है। वृहत् या मेको पोषक तत्व कहलाते है जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा व जल।

2. माइक्रो (सूक्ष्म) पोषक तत्वः-

वह पोषक तत्व जिनकी हमारे शरीर को अत्यन्त अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है। सूक्ष्म पोषक तत्व कहलाते हैं जैसे विटामिन्स व खनिज ।

मेक्रो पोषक तत्व

कार्बोहाइड्रेट:-

  • कार्बोहाइड्रेट हमारे आहार का सबसे मुख्य अंग है। यह हमारे शरीर में ईधन की तरह कार्य करता है। यह ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत है।
  • स्रोतः- सभी प्रकार के अनाज, दालें, आलू, गाजर, केला गन्ना, शहद व मीठे फल।

कार्बोहाइड्रेट के प्रकारः-

भिन्न -भिन रासायनिक सयोंजन के कारण कार्बोहाइड्रेटस मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं।

1. शर्करा या साधारण कार्बोहाइड्रेटः-
  • यह अनाज (गेहूँ, चावल आदि) व रसीले फलों जैसे गन्ना, चुकन्दर, आम, अनानास आदि में पाया जाने वाला स्वभाविक मिठास है। इनमें शर्करा मोनोसेक्राइडस, डाइसेक्राइडस व ट्राई सेक्राइडस के रूप में पायी जाती है।
  • जैसे ग्लूकोज, फ्रेक्टोज, सुक्रोज व माल्टोज यह पानी में घुलनशील व स्वाद में मीठे होते हैं।
2. जटिल कार्बोहाइड्रेट (पोली सेक्राइडस):-

साधरण कार्बोहाइड्रेटस से विपरीत ये स्वाद में मीठे नहीं होते है। इनमें शर्करा पॉली सेक्राइडस के रूप में पायी जाती है। यह पानी में घुलती नहीं है। इनमें स्टार्च, ग्लाइकोजन व सेल्यूलोज प्रमुख है। जो कि आलू, शकरकन्दी, चुकन्दर, गाजर, मक्का, गेहूँ, चावल आदि में मुख्य रूप से पाये जाते हैं। हमें आहार में कार्बोहाइड्रेटस की अधिक मात्रा इसी पॉलीसेक्राइडस से प्राप्त होती है।

वसाः-

  • वसा हमारे आहार में उपस्थित सभी पोषक पदार्थों में सबसे ज्यादा ऊर्जा प्रदान करने वाला पोषक तत्व है। एक ग्राम वसा से 9.1 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। आवश्यकता से अधिक कार्बोहाइड्रेट भी शरीर में वसा के रूप में सचिंत होता रहता है।
  • स्रोत:- दूध व दुग्ध उत्पाद, घी, वनस्पति तेल, सूखे मूवे आदि।

वसा के कार्य:-

  • इससे शरीर को चर्बी प्राप्त होती है।
  • लंबे समय तक चलने वाली शारीरिक क्रियाओं में यह ऊर्जा के स्रोत के रूप में काम आती है।
  • इससे विटामिन A,D, E व K के अवशोषण में भी सहायता मिलती है।
  • वसा मांसपेशीय उत्तक के निर्माण व शरीर के कोमल अंगों जैसे हृदय गुर्दे आदि को सुरक्षा प्रदान करती है।
  • शरीर को सुडौल बनाती है। तथा सक्रामक रोगों से बचाने में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।

प्रोटीनः -

प्रोटीन हमारे शरीर निर्माण में सहायक होती है। इसलिए यह बढ़ती उम्र के बच्चों व खिलाड़ीयों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। यह कोशिकाओं व उत्तकों की मरम्मत कार्य में प्रयुक्त होती है। इसलिए वयस्कों के लिए भी समान रूप से उपयोगी है।

स्रोतः-

दूध व दुग्ध उत्पाद, सोयाबीन, सभी प्रकार की दाले, चना अनाज, मूंगफली, तिल, बादाम, सभी रेशेदार फल व सब्जियां जैसे पपीता, आम, आम, कटहल, फ्रासबीन, ग्वार, लोबिये की फली आदि।

जल:-

जल भोजन का एक आवश्यक तत्व है। हमारे शरीर का लगभग 70% भाग जल ही होता है तथा रक्त में भी 90% जल होता है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए। जल के द्वारा ही शरीर की विभिन्न कोशिकाओं तक जरूरी पोषक तत्व पहुँचाए जाते हैं। जल भोजन को पचाने में सहायता करता है हमारे शरीर के तापमान को नियमित रखता है। जल शरीर से विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालने में सहायता करता है।

मोइक्रो पोषक तत्व

भोजन में दो तरह के सूक्ष्म पोषक तत्त्व हैं: विटामिन और मिनरल (खनिज पदार्थ) यह कम मात्रा में भोजन में आवश्यक होते हैं, पर जो शरीर के लिए बहुत जरूरी हैं।

विटामिनः-

यह दो प्रकार के होते है।

  1. जल में घुलनशील विटामिन्स (B व C)
  2. वसा में घुलनशील विटामिन्स (A, D, E, व K)

जल में घुलनशील विटामिन्स (B व C)

1. विटामिन B:-

  • इसके अंर्तगत समूह B के विटामिन्स आते हैं। जिन्हे सामूहिक रूप से विटामिन B कोम्प्लेक्स कहते है। ये हमारी पाचन क्रिया व सामान्य स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त आवश्यक है। इसकी कमी से बेरी बेरी नामक रोग हो जाता है।
  • स्रोत:- दूध, दही, पनीर, मक्खन, अण्डा, मछली, टमाटर हरी पत्तेवार सब्जियाँ, सूखे मेवे आदि।

2. विटामिन C:-

  • यह गर्मी ऑक्सीजन के सम्पर्क में आते ही निष्क्रिय हो जाता है। खेलो के दृष्टिकोण से यह विटामिन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। सहनशीलता (Endurance) बढ़ाने में यह विटामिन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दाँत, अस्थि, रक्त वाहिनीयों को मजबूत करता है।
  • स्रोत:- खट्टे फल, आवलाँ, टमाटर, नींबू, अंकुरित अनाज, हरी सब्जियां व हरी मिर्च आदि।

वसा में घुलनशील विटामिन्स (A, D, E, व K)

1. विटामिन A:-

  • यह विटामिन सामान्य शारीरिक विकास, आंखों व त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए अत्यन्त आवश्यक है। इसकी कमी से रतौंधी (Night Blindness) व त्वचा खुश्क व सुखी हो जाती है।
  • स्रोत:- पीले व नारंगी फल जैसे पपीता, खरबूजा, संतरा, गाजर, हरे पत्ते वाली सब्जिया पालक, बन्द गोभी, मटर, दुग्ध व दुग्ध उत्पाद।

2. विटामिन D:-

  • इस विटामिन को शरीर खुद भी पैदा कर सकता है। यह शरीर में कैल्शियम व फास्फोरस के अवशोषण में सहायक है इसकी कमी से रिकेट्स (सूखा रोग) हो जाता है।
  • स्रोतः- दुग्ध उत्पाद, सूर्य के प्रकाश में तेल मालिश व हरी सब्जियाँ, मछली का तेल आदि।

3. विटामिन E:-

  • यह विटामिन, हृदयाघात, पक्षाघात व कैंसर जैसे रोगों से शरीर करता है। विटामिन A का उपयोग करने में सहायक, शरीर में एंटी ऑक्सीडेंट के रूप कार्य करता है। स्त्री व पुरूषों की प्रजनन शक्ति को सुदृढ़ करता है।
  • स्त्रोत:- अंकुरित अनाज, दाले, हरी सब्जियाँ, तेल व घी

4. विटामिन K:-

  • यह विटामिन क्षार व धूप में निष्क्रिय हो जाता है। पाचन क्रिया के लिए अत्यन्त आवश्यक आँतों के भीतरी बैक्टिरिया का निर्माण, खून के थक्का जमाने में सहायक।
  • स्रोतः- हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अंकुरित अनाज, आलू सोयाबीन, दुग्ध उत्पाद।

मिनिरल्स:-

1. आयरनः-

यह खनिज रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए जरूरी है।

2. कैल्शियमः-

यह हमारी हड्डियों और दांतों के निर्माण में सहायता करता है।

3.फास्फोरसः -

यह हमारे दांतों को मजबूत बनाता है तथा हड्डियों को भी मजबूत करता है।

4. सोडियमः -

यह हमारे तंत्रिका तंत्र को और अधिक मजबूत बनाता है।

5. आयोडीन:-

आयोडीन बहुत जरूरी है इसकी कमी से ग्वाइटर रोग हो सकता है।

6. फ्लोराइड:-

यह हमारे नाखूनों और दांतों के निर्माण और मजबूत बनाने में सहायक है।

अपोषक तत्व

हमारे आहार के वे तत्व जिनमें हमें किसी भी प्रकार का पोषण नहीं मिलता है आहार के अपोषक तत्व कहलाते हैं। किन्तु ये तत्व हमारे पाचन के लिए लाभदायक भी होते हैं।

1. फाइबर:-

फाइबर मल त्याग में सहायक है और कब्ज होने से रोकते हैं। आँतों की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाने में सहायक होते है। ताजे फलों में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है।

2. रंग यौगिक:-

रंगों से भोजन को आकर्षक बनाया जाता है। खाद्य पदार्थों में कुदरती तौर पर रंग होता है जैसे फल व सब्जियाँ लाल, संतरी, पीले, नीले, हरे व सफेद रंग की होती है।

3. स्वाद यौगिकः-

स्वाद यौगिक न तो ऊर्जा और न ही पोषण देते है ये पदार्थ हमारे भोजन का स्वाद बढ़ाते है जैसे दूध में चाय डालकर, सब्जी में नमक डाल उसका स्वाद को बढ़ाया जाता है।

4. पादप यौगिकः -

पादप यौगिक ऐसे होते है जिनमें गैर पोषक तत्व पाये जाते है। बहुत से ऐसे पादप यौगिक है जिनको खाया जाता है इनके लाभदायक व हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं। विभिन्न शोधों से यह सिद्ध हुआ है कि बहुत से पादप यौगिक कैंसर की रोकथाम करते है।

संतुलित आहार को निर्धारित करते समय ध्यान में रखने योग्य कारक

1. उम्र:-

संतुलित आहार के निर्धारण में उम्र का महत्त्वपूर्ण ध्यान रखा जाता है जैसे कि बढ़ते बच्चों के लिये अधिक प्रोटीन जबकि ढ़लती उम्र में प्रोटीन व वसा से बचना चाहिए तथा अधिक खनिज व विटामिन लेना चाहिये।

2. लिंग:-

लिंग विभिन्नता के अनुसार भी आहार निर्धारित होता है जैसे पुरुष को अधिक कैलोरी तथा महिला को कम कैलोरी वाला आहार लेना चाहिये।

3. व्यवसायः-

कठिन शारीरिक क्रियाकलाप करने वाले को अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है तथा कम शारीरिक क्रियाकलाप करने वालों को कम कैलोरी की आवश्यकता होती है।

4. शरीर का भारः-

अधिक भार वाले व्यक्ति को अधिक रेशेहार भोजन पतले व कमजोर व्यक्ति को अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

5. विशेष खेल अनुसार:-

विभिन्न खेलकूद जैसे लंबी दूरी की दौड़ करने वालों को अधिक वसा तथा कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है।

6. गर्भवती व स्तन पान कराने वाली महिलाः

गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, खनिज तत्व, विटामिन की आवश्यकता होती है।

7. स्वास्थ्य समस्या के दौरान चोटिल व रोगी व्यक्ति को अधिक प्रोटीन व खनिज से परिपूर्ण आहार लेना चाहिये।

8. जलवायु परिस्थिति ठंडे स्थानों पर तेलीय व तला भुना आहार जबकि समुद्री इलाकों में अधिक पानी वाला आहार लेना चाहिये।

9. चिकित्सक के परामर्श के आधार पर रोगी व बीमार व्यक्ति को डाक्टर की सलाह पर आहार लेना चाहिये जैसे पीलिया में तले हुए आहार से बचाना चाहिए।

10. खान पान आदतों व सामासिक मान्यताएँ:-

 कुछ परिवारों में त्यौहार के समय अधिक तला भूना भोजन पसंद किया जाता है।

स्वस्थ भार

स्वस्थ भार का तात्पर्य व्यक्ति के उस भार से है, जिस पर वह बिना किसी बीमारी के भय से स्वस्थ्य जीवन व्यतीत कर सके। यह 18.5 से 25 B.M.I के बीच होता है।

डाइटिंग (अल्पाहार) के नुकसान

जब व्यक्ति अपना वजन कम करने करने के लिए भोजन की अत्यन्त अल्प मात्रा ग्रहण करता है फलस्वरूप व्यक्ति को स्वास्थ्य के लिए आवश्यक पोषक पदार्थ नही मिल पाते है। इससे व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो सकता है, अत्यधिक कमजोर हो सकता है, मस्तिष्क, आंखों व दाँतों संबधी बीमारियाँ हो सकती है। शरीर के भार में कमी, खनिज की कमी, थकावट महसूस होना, कैलोरी की कमी।

खाद्य असहिष्णुता या भोजन असहनशीलता

शरीर की वह स्थिति जिसमें हमारा शरीर भोजन के तत्वों को अवशोषित करना बंद कर देता है इस स्थिति को भोजन असहनशीलता के नाम से जाना जाता है। खाद्य असहिष्णुता या भोजन असहनशीलता के लक्षण, पेट दर्द, दस्त लगना, उल्टी आना, गैस के कारण एंठेन, सीने में जलन, सिर दर्द, हृदय के पास जलन आदि।

भोजन से संबधित गलत धारणाए या भोजन मिथक

भोजन से संबंधित कुछ गलत या भ्रामक मिथक इस प्रकार है:-

  • नाश्ता ज्यादा हैवी नहीं खाना चाहिए।
  • आलू वजन बढ़ाता है।
  • मीठा खाने से मधुमेह होता है।
  • खाते समय पानी नहीं पीना चाहिए।
  • मीठा खाना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं
  • मछली खाकर दूध न पीना चाहिये।
  • घी – तेल नहीं खाना चाहिये।
  • अल्पाहार से वजन कम होता है।
  • प्रोटीन पूर्ति हेतु मासांहार आवश्यक है।

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