विश्व जनसंख्या Notes
Class 12 Geography Chapter 2 Notes in Hindi
यहाँ हम कक्षा 12 भूगोल के 2ndअध्याय “विश्व जनसंख्या” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में विश्व जनसंख्या से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
विश्व जनसंख्या Notes, Class 12 Geography Chapter 2 Notes in Hindi

Class 12 Geography Chapter 2 Notes in Hindi
जनसंख्या
- किसी भी गाँव, शहर, राज्य या देश आदि में रहने वाले लोगों की संख्या को ही जनसंख्या कहते हैं।
- जनसंख्या किसी भी देश की वास्तविक धन या संसाधने होती है।
- शिक्षण, प्रशिक्षण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराकर जनसंख्या को मानव संसाधन के रूप में बदला जा सकता है।
जॉर्ज बी. क्रेसी के अनुसार :
“एशिया में बहुत अधिक स्थानों पर कम लोग और कम स्थानों पर बहुत अधिक लोग रहते हैं”
विश्व में जनसंख्या वितरण
- विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 80% भाग 20 डिग्री उत्तरी अक्षांश से 60डिग्री उत्तरी अक्षांश के मध्य निवास करती है।
- दक्षिणी गोलार्ध में विश्व की केवल 10% जनसंख्या ही निवास करती है।
- दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका तथा ऑस्ट्रेलिया में विश्व की लगभग 21% जनसंख्या निवास करती है जबकि इन तीनों महाद्वीपों में विश्व की कुल भूमि क्षेत्रफल का 40% से भी अधिक भाग है।
- विश्व की लगभग 65% जनसंख्या सागर से 500 किलोमीटर अंदर तक के भूभागों भूभागों में में मिलती है।
- विश्व की 80% जनसंख्या समुद्र तल से 500 मीटर तक ऊंचाई वाले भू भागों पर मिलती है।
- एशिया महाद्वीप में विश्व का लगभग 33% क्षेत्रफल है जबकि इसमें विश्व की लगभग 60% जनसंख्या निवास करती है।
- विश्व की सर्वाधिक जनसंख्या एशिया महाद्वीप में तथा सबसे कम जनसंख्या ऑस्ट्रेलिया में निवास करती है।
विश्व के 10 सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशः
- भारत
- चीन
- संयुक्त राज्य अमेरिका
- इंडोनेशिया
- पाकिस्तान
- नाइजीरिया
- ब्राजील
- बांग्लादेश
- रूस
- मेक्सिको
- वर्तमान में भारत विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है।
महाद्वीपीय स्तर पर जनसंख्याः
- एशिया
- अफ्रीका
- यूरोप
- उत्तरी अमेरिका
- दक्षिण अमेरिका
- ऑस्ट्रेलिया
- अंटार्कटिका
जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक
भौगोलिक कारक :
1. जल की उपलब्धता :-
जल जीवन का आधार है अतः लोग उन क्षेत्रों में बसने को प्राथमिकता देते हैं जहां जल आसानी से उपलब्ध होता है। यही कारण है की नदी घाटियां विश्व के सबसे सघन बसे हुए क्षेत्र हैं।
2.भू आकृति:-
पर्वतीय भागों की तुलना में मैदानी या समतल भागों पर घर का निर्माण, कृषि, सड़क निर्माण एवं उद्योग स्थापित करना आदि काफी सरल होता है इसलिए समतल भागों पर सघन जनसंख्या पाई जाती है।
2.भू आकृति:-
पर्वतीय भागों की तुलना में मैदानी या समतल भागों पर घर का निर्माण, कृषि, सड़क निर्माण एवं उद्योग स्थापित करना आदि काफी सरल होता है इसलिए समतल भागों पर सघन जनसंख्या पाई जाती है।
3.जलवायुः-
जलवायु जनसंख्या के वितरण एवं घनत्व को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक है। अत्यधिक गर्म या ठंडे जलवायु वाले क्षेत्र में मानव बसाव के लिए असुविधाजनक होती है जबकि सुविधाजनक जलवायु वाले क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या निवास करती है।
4.मृदाएं:-
उपजाऊ मृदाएं कृषि तथा इनसे संबंधित क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है इसलिए उपजाऊ दोमट मिट्टी वाले प्रदेश में अधिक लोग निवास करते हैं क्योंकि इस मिट्टी में गहन कृषि की जाती है।
आर्थिक कारकः
1.खनिज:-
- खनिजों से परिपूर्ण क्षेत्र में अलग-अलग उद्योग स्थापित होते हैं जिसके कारण ग्रामीण लोग रोजगार प्राप्त करने के लिए खनन उद्योगों के आसपास बस जाते हैं और इससे जनसंख्या संघन हो जाती है।
- जैसे:- भारत का छोटा नागपुर का पठार।
2.नगरीकरण:-
नगर लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं, परिवहन एवं संचार के बेहतर साधन उपलब्ध कराते हैं जिसके कारण लोग ग्रामीण क्षेत्र से नगरीय जीवन की ओर आकर्षित होते हैं।
3.औद्योगिकरण:-
- औद्योगिक क्षेत्र व्यापक स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती है कारखानों के श्रमिकों के अलावा परिवहन चालक, दुकानदार, बैंक कर्मी , डॉक्टर, अध्यापक तथा अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाले भी होते हैं।
- जैसे:- जापान का कोबे ओसाका प्रदेश।
जनसंख्या घनत्व
- प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में निवास करने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं।
- या
- लोगों की संख्या और भूमि के आकार के बीच के अनुपात को ही जनसंख्या घनत्व कहा जाता है।
- जनसंख्या घनत्व = प्रदेश की कुल जनसंख्या/प्रदेश का कुल क्षेत्रफल
- सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व बांग्लादेश का है तथा सबसे कम जनसंख्या घनत्व मंगोलिया का है।
उच्च जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र-
- दक्षिण पूर्व एशिया
- उत्तर पश्चिमी यूरोप
- उत्तर पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका
निम्न जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र
- सहारा रेगिस्तान
- दक्षिण अमेरिका में अमेजन बेसिन
- पश्चिमी साइबेरिया वाला क्षेत्र
- एंडीज पर्वत
जन शून्य क्षेत्र
- अंटार्कटिका महाद्वीप
- ग्रीनलैंड
- साइबेरिया के उत्तरी टुंड्रा प्रदेश
- सहारा एवं कालाहारी मरुस्थल
- एशिया का अरब मरुस्थल व थार मरुस्थल
- दक्षिण अमेरिका का अटाकामा मरुस्थल
- ऑस्ट्रेलिया का पश्चिमी मरुस्थली भाग
- उष्णकटिबंधीय क्षेत्र या विषुवत रेखीय प्रदेश
एशिया सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला महाद्वीप है।
महाद्वीप स्तर पर जनसंख्या घनत्वः
- एशिया
- अफ्रीका
- यूरोप
- उत्तरी अमेरिका
- दक्षिण अमेरिका
- ऑस्ट्रेलिया
- अंटार्कटिका
जनसंख्या वृद्धि
समय के दो अंतरालों के बीच एक क्षेत्र विशेष)में होने वाली जनसंख्या में परिवर्तन को जनसंख्या की वृद्धि कहा जाता है।
- जैसे:-
- 2001-103 करोड़
- 2011-121 करोड़
- जनसंख्या वृद्धि =18 करोड़
- यह परिवर्तन धनात्मक भी हो सकता है और ऋणात्मक भी
जनसंख्या में वृद्धि निम्नलिखित कारणों से होती है:
- चिकित्सा सेवा में सुधार
- परिवार नियोजन के प्रति लोगों में कम रुचि
- बाल विवाह
- कम मृत्यु दर
- साक्षरता में कमी
जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियां:
- आज से 10 हजार साल पहले विश्व की कुल जनसंख्या मात्र 50 लाख थी।
- ईसा मसीह की पहली शताब्दी में जनसंख्या 30 करोड़ से कम थी।
- ईसा मसीह के जन्म से वर्ष 1650 ई तक की अवधि में विश्व की जनसंख्या 25 करोड़ से बढ़कर 50 करोड़ हो गई।
- वर्ष 1750 में विश्व की कुल जनसंख्या 55 करोड़ थी जो वर्ष 1850 में बढ़कर 100 करोड़ हो गई।
- 21वीं शताब्दी की शुरुआत में यानी 1999 ई के आसपास विश्व की जनसंख्या 600 crore (6 अरब) हो गई।
- विश्व की जनसंख्या को 6 से 7 अरब होने में केवल 12 वर्ष का समय लगा।
- मानव जनसंख्या को प्रारंभिक एक करोड़ होने में 10 लाख से भी अधिक वर्ष लग गए किंतु इसे 5 अरब से 6 अरब होने में मात्र 12 वर्ष लगे।
- सबसे ज्यादा जनसंख्या वृद्धि एशिया महाद्वीप का है जबकि जनसंख्या वृद्धि दर अफ्रीका महाद्वीप का है
- प्रत्येक वर्ष 8 करोड लोग पहले की जनसंख्या में जुड़ जाते हैं
- जनसंख्या की अधिकतर वृद्धि विकासशील विश्व में हो रही है।
- जनसंख्या वृद्धि और आर्थिक विकास में ऋणात्मक संबंध पाया जाता है।
जनसंख्या परिवर्तन के घटक
1.जन्म दर (Birth Rate):-
- किसी क्षेत्र विशेष में किसी वर्ष के दौरान 1000 जनसंख्या पर जीवित बच्चों की संख्या जन्म दर कहलाती है। इसे अशोधित जन्म दर भी कहते हैं।
- जन्म दर = किसी वर्ष विशेष में जीवित जन्म/किसी क्षेत्र में उस वर्ष की जनसंख्या × 1000
2.मृत्यु दर (Death rate):-
- किसी क्षेत्र विशेष में किसी वर्ष के दौरान 1000 जनसंख्या पर मृतकों की संख्या मृत्यु दर कहलाती है।
- मृत्यु दर = किसी वर्ष विशेष में मृतकों की संख्या/किसी क्षेत्र में उस वर्ष की जनसंख्या × 1000
3.प्रवास:-
प्रवास का मतलब होता है अपने स्थायी निवास स्थान से किसी अन्य जगह पर अस्थायी या स्थायी रूप से जाने का कार्य। यह व्यक्तिगत कारणों, काम, शिक्षा, या बेहतर अवसरों के लिए हो सकता है। प्रवास में व्यक्ति अपने घर, संस्कृति, और समाज से दूर होकर एक नई जगह पर रहने लगता है।
जनसंख्या का प्रवास निम्न दो प्रकार से होता है:-
1.उत्प्रवास :-
लोगों का अपने मूल निवास स्थान को छोड़ना उत्प्रवास कहलाता है, और प्रवास करने वाले व्यक्तियों को उत्प्रवासी कहते हैं।
2.आप्रवासः-
- लोगों का उसे जगह जाने की प्रक्रिया जहां के वह मूल निवासी नहीं है आप्रवास कहलाता है, और प्रवास करने वाले व्यक्तियों को आप्रवासी कहते हैं।
- अस्थाई प्रवास को मौसमी प्रवास भी कहा जाता है।
- उत्प्रवास के कारण जनसंख्या में कमी तथा आप्रवास के कारण जनसंख्या में वृद्धि होती है।
प्रवास को प्रभावित करने वाले कारक :
1. प्रतिकर्ष कारक (Push Factor):-
प्रवास के वे कारक जिसके कारण लोग अपने मूल स्थान को छोड़ने के लिए मजबूर होते हैं, प्रतिकर्ष कारक कहलाते हैं। इसे Push factor भी कहा जाता है।
- बेरोजगारी
- रहन-सहन की निम्न दशाएं
- राजनीतिक उपद्रव
- प्रतिकूल जलवायु
- प्राकृतिक आपदाएं
- महामारियां
- आर्थिक पिछड़ापन आदि
2. अपकर्ष कारक (Pull factor)
प्रवास के वे कारक जिसके कारण लोग नए स्थान में बसने के लिए जाते हैं, अपकर्ष कारक कहलाते हैं। इसे Pull Factor भी कहा जाता है।
- रोजगार के अवसर
- रहन-सहन की अच्छी दशाएं
- शांति, जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा
- अनुकूल जलवायु
- अच्छी शिक्षा और स्कूल / कॉलेज
- बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ आदि
जनसंख्या वृद्धि दरः-
- यह जनसंख्या में परिवर्तन है जो प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है।
- जनसंख्या की धनात्मक वृद्धिः-
- जनसंख्या की धनात्मक वृद्धि तब होती है जब दो समय अंतरालों के बीच जन्म दर, मृत्यु दर से अधिक हो या जब अन्य देश स लोग स्थाई रूप से उसे देश में प्रवास कर जाए।
- जैसे:-1000 → 1010
जनसंख्या की ऋणात्मक वृद्धिः-
- यह तब होती है जब दो समय अंतरालों के बीच जन्म दर, मृत्यु दर से कम हो जाए या जब लोग अन्य देशों में प्रवास कर जाए।
- जैसे:-1000 – 995
जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धिः-
- किसी क्षेत्र विशेष में दो समय अंतरालों में जन्म और मृत्यु के अंतर से बढ़ने वाली जनसंख्या को उस क्षेत्र की प्राकृतिक वृद्धि कहते है।
- जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि = जन्म – मृत्यु जनसंख्या की वास्तविक वृद्धि = जन्म – मृत्यु + आप्रवास-उत्प्रवास
प्रवास के प्रकार
- स्थाई प्रवास
- अस्थाई या मौसमी प्रवास
- गांव से गांव प्रवास
- गांव से नगर प्रवास
- नगर से नगर प्रवास
- नगर से गांव प्रवास
लिंग-अनुपात
- प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को ही लिंग अनुपात कहा जाता है।
- लिंग-अनुपात = स्त्रियों की संख्या / पुरुषों की संख्या × 1000
जनसंख्या परिवर्तन के प्रभाव
जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के निम्न दुष्प्रभाव हैं।
1. उपलब्ध संसाधनों का तेजी से हासमी
2. पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का उत्पन्न होना।
3. भुखमरी महामारी तथा गृह युद्ध जैसी स्थिति का उत्पन्न होना
4. जीवन प्रत्याशा में कमी आना
जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत
यह सिद्धांत हमें बताता है कि जैसे ही समाज ग्रामीण, खेतीहर और अशिक्षित अवस्था से उन्नति करके नगरीय, औद्योगिक और साक्षर बनता है तो किसी प्रदेश की जनसंख्या उच्च जन्म दर और उच्च मृत्यु दर से निम्न जन्म व निम्न मृत्यु दर में परिवर्तित हो जाती है यह परिवर्तन तीन अवस्था में होती है जिन्हें सामूहिक रूप से जनांकिकीय चक्र के रूप में जाना जाता है।
जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धिः-
- इस अवस्था में जन्म दर और मृत्यु दर दोनों ही उच्च होती है।
- अज्ञानता और निरक्षरता के कारण उच्च जन्म दर और महामारियों के कारण उच्च मृत्यु दर रहती है। इसके फलस्वरूप जनसंख्या की वृद्धि धीमी गति से होती है।
- 200 वर्ष पूर्व विश्व के अधिकांश देश इसी अवस्था में थी।
- जैसे :- बांग्लादेश
द्वितीय अवस्था:-
- शुरुआत में जन्म दर उच्च तथा समय बढ़ने पर घटने लगती है, किंतु स्वास्थ्य में सुधार के कारण मृत्यु दर में कमी आती है जिससे जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होती है।
- जैसे:- भारत और चीन ।
तृतीय अवस्था:-
- इसमें जन्म दर और मृत्यु दर दोनों ही निम्न होती है जिससे जनसंख्या वृद्धि मंद या स्थिर हो जाती है।
- जैसे :- कनाडा, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका।
जनसंख्या नियंत्रण के उपाय
- परिवार नियोजन
- महिला सशक्तिकरण पर बल।
- विवाह की आयु में वृद्धि एवं बाल विवाह पर रोक।
- संतान उत्पत्ति की सीमा का निर्धारण ।
- शिक्षा का प्रसार एवं यौन शिक्षा पर विशेष बल।
- बड़े परिवारों के लिए कर निरुत्साह।
माल्थस का जनसंख्या सिद्धांतः
- माल्थस के अनुसार संसाधनों की वृद्धि सामान्य गति (1,2,3,4….) से होती है जबकि जनसंख्या में वृद्धि दुगनी गति (1,2,4,8,16,32….) से होती है जिसके परिणाम स्वरुप (जनसंख्या इतनी अधिक हो जाएगी की भरण- पोषण लगभग असंभव हो जाएगा और भुखमरी, कुपोषण आदि जैसी समस्या उत्पन्न होगी। अतः जनसंख्या नियंत्रण आवश्यक है।
- माल्थस एक ब्रिटिश अर्थशास्त्री थे जिसने 1798 में ‘जनसंख्या सिद्धांत'(principle of population) नामक लेख लिखा था।
- माल्थस महोदय का कहना है “प्रकृति की मेज सीमित अतिथियों के लिए लगी है जो अतिथि बिना निमंत्रण आएगा उसे अवश्य ही मरना होगा”।
ncert Class 12 Geography Chapter 2 Notes in Hindi
के notes आपको कैसे लगे अपनी राय जरूर दे