कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 6 के नोट्स हिंदी में,
नागरिकता Notes

यहाँ हम कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के 6th अध्याय “नागरिकता” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में नागरिकता से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।

ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।

कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 6 के नोट्स हिंदी में, नागरिकता Notes

कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 6 के नोट्स हिंदी में, नागरिकता Notes

Class 11 Political Science Chapter 6 Notes in Hindi

नागरिकता का अर्थ

  1. नागरिकता का मतलब है किसी देश का पूरा और बराबर सदस्य होना।
  2. इसमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता।
  3. हर देश अपने नागरिकों को कुछ अधिकार देता है और एक पहचान भी देता है।
  4. इसी वजह से हम अपने देश के नाम पर खुद को भारतीय, जापानी या जर्मन कहते हैं।

Note :-

  • भारतीय संविधान में नागरिकता से जुड़े नियम भाग 2 (अनुच्छेद 5 से 11) में दिए गए हैं।
  • नागरिकों को देश की संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों का उत्तराधिकारी (हकदार) और संरक्षक (रक्षक)माना जाता है।

सम्पूर्ण और समान सदस्यता

  1. सम्पूर्ण और समान सदस्यता का अर्थ है कि किसी देश के सभी नागरिकों को बराबर अधिकार और समान अवसर प्राप्त हों।
  2. किसी के साथ धर्म, जाति, भाषा, लिंग या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता।
  3. हर नागरिक को देश के मामलों में पूरी भागीदारी का अधिकार होता है।
  4. साथ ही प्रत्येक नागरिक को देश में कहीं भी रहने, पढ़ने और काम करने का समान अधिकार मिलता है।
  5. इसके अलावा अमीर-गरीब सभी नागरिकों को कुछ मूलभूत अधिकार और सुविधाएँ अवश्य मिलनी चाहिए।

हमें नागरिकता कैसे मिल सकती है

  1. किसी देश में लंबे समय तक रहने (निवास) के आधार पर।
  2. विवाह के आधार पर।
  3. उस देश में संपत्ति खरीदने के आधार पर।
  4. सरकारी सेवा करने पर।
  5. विद्वान या विशेष योग्य व्यक्ति होने पर।
  6. गोद लिए जाने पर।

नागरिकता त्याग देना या समाप्त कैसे होता है

  1. किसी देश से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के आधार पर।
  2. आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने या देशद्रोह करने पर।
  3. विदेश में नौकरी प्राप्त कर वहाँ की नागरिकता स्वीकार करने पर।
  4. किसी अन्य देश के नागरिक से विवाह कर वहाँ की नागरिकता लेने पर।
  5. स्वेच्छा से त्याग-पत्र देकर नागरिकता छोड़ने पर।

प्रवासी

  1. जो लोग काम की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर या एक देश से
  2. दूसरे देश जाते हैं, उन्हें प्रवासी कहा जाता है।
  3. आमतौर पर निर्धन प्रवासियों का अपने नए क्षेत्र में वैसा स्वागत
  4. नहीं होता, जैसा कि कुशल और संपन्न प्रवासियों का होता है।

प्रवासी लोग कौन-कौन से काम करते हैं:-

  • अधिकतर प्रवासी लोग शहरों में जो भी काम उपलब्ध होता है, उसे कर लेते हैं, जैसे-
  • घरेलू नौकर का काम करना, सफाई कर्मचारी के रूप में काम करना।
  • कर्मचारी बनकर या समाचार पत्र बाँटने का काम करना।
  • रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचना, फेरी लगाकर सामान बेचना।
  • रोज़मर्रा की जरूरत की छोटी-छोटी वस्तुएँ साप्ताहिक बाज़ारों में बेचना।

प्रवासियों के बिना शहरी लोगो का जीवन पर प्रभाव

  • घरों में घरेलू कामकाज करना मुश्किल हो जाएगा।
  • शहरों में सफाई व्यवस्था बिगड़ जाएगी।
  • निर्माण कार्य और छोटे-मोटे काम रुक या धीमे हो जाएँगे।
  • रोजमर्रा की सस्ती सेवाएँ और सामान आसानी से उपलब्ध नहीं होंगे।
  • शहरों का दैनिक जीवन अव्यवस्थित और महँगा हो जाएगा।
  • शहरी लोगों को खुद कई छोटे काम करने पड़ेगे, जिससे समय और मेहनत अधिक लगेगी।

प्रतिवाद

  1. प्रतिवाद का मतलब है किसी बात या कथन को स्वीकार न करना, यानी विरोध करना।
  2. प्रतिवाद करने का अधिकार हमारे संविधान द्वारा सभी नागरिकों को दिया गया है।
  3. इस अधिकार के तहत हम स्वतंत्र रूप से अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन ध्यान रखना जरूरी है
  4. कि इससे किसी अन्य व्यक्ति, समुदाय या राज्य की जीवन, स्वतंत्रता या संपत्ति को नुकसान न पहुंचे।

प्रतिवाद के तरीके :-

  1. नागरिक समूह बनाकर।
  2. शांतिपूर्ण प्रदर्शन करके।
  3. मीडिया का सही उपयोग करके।
  4. राजनीतिक दलों से अपील करके।
  5. अदालत में जाकर कानूनी रास्ता अपनाकर।

नागरिक और विदेशी में अंतर

नागरिक

  1. किसी देश के स्थाई सदस्य होते हैं।
  2. देश के सभी राजनीतिक अधिकार प्राप्त होते हैं, जैसे मतदान, चुनाव लड़ना, सरकारी नौकरी।
  3. राज्य के सभी कानूनी कर्तव्यों का पालन करना अनिवार्य है।
  4. राज्य में कहीं भी घूमने और रहने पर कोई प्रतिबंध नहीं।

विदेशी

  1. स्थाई सदस्य नहीं होते।
  2. सभी अधिकार प्राप्त नहीं होते, केवल सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं।
  3. केवल अपने मूल देश के प्रति वफादार होते हैं, अन्य देश के कर्तव्यों के पालन के लिए बाध्य नहीं।
  4. किसी जगह पर निवास करने की निर्धारित समयावधि होती है।

सार्वभौमिक नागरिकता

  1. एक ऐसा विचार या सिद्धांत जिसमें सभी लोग पूरी दुनिया में किसी एक देश या समुदाय से
  2. संबंधित न होकर, एक वैश्विक नागरिक माने जाएँ।
  3. इसमें हर व्यक्ति को समान अधिकार और जिम्मेदारियाँ मिलती हैं, चाहे वह किसी भी देश या क्षेत्र में जन्मा हो।

विश्व नागरिकता का अर्थ है

  1. यह वह विचार है जिसमें व्यक्ति अपने आप को किसी एक देश का नागरिक नहीं बल्कि पूरी दुनिया का नागरिक मानता है।
  2. इसमें सभी लोगों को समान अधिकार और जिम्मेदारियाँ दी जाती हैं, और कोई भी व्यक्ति किसी भी
  3. देश, धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव का शिकार नहीं होता।

विदेशी

  • विश्व नागरिकता के लाभ
  • सभी लोगों के साथ बराबरी और न्याय।
  • शांति और सहयोग बढ़ता है।
  • विभिन्न संस्कृतियों और विचारों को समझने का मौका।
  • वैश्विक जिम्मेदारी निभाना आसान।
  • अंतरराष्ट्रीय अवसर बढ़ते हैं।

शरणार्थी

  1. शरणार्थी वह व्यक्ति होता है जो अपने देश में युद्ध, अत्याचार, भूकंप, प्राकृतिक आपदा या अन्य संकट के कारण सुरक्षित रहने के लिए किसी दूसरे देश में जाता है।
  2. सरल शब्दों में, शरणार्थी सुरक्षा और जीवन बचाने के लिए अपने देश छोड़कर किसी अन्य देश में रहने वाला व्यक्ति होता है।

शरणार्थियों की समस्याएँ :

  • कई बार कोई देश उन्हें स्वीकार नहीं करता।
  • वे शिविरों में या अवैध प्रवासी बनकर रहने को मजबूर हो जाते हैं।
  • वे अपने बच्चों को ठीक से पढ़ा-लिखा नहीं पाते।
  • वे संपत्ति नहीं खरीद सकते और स्थायी जीवन नहीं बसा पाते।

बाहरी समस्या :-

ऐसी समस्या जो देश के बहार होती है जैसे दुसरे देश से युद्ध होना ।

भीतरी समस्या :-

ऐसी समस्या जो देश के भीतर की समस्या होती है जैसे देश में गृह युद्ध छिड़ जाना, आन्दोलन होना ।

Note:-

कछ ऐसी समस्या होती है जो देश के अन्दर और बहार दोनों ही होती है जैसे महामारी।

नागरिको के अधिकार

टी. एच. मार्शल के अनुसार नागरिको को तीन प्रकार के अधिकार प्राप्त है

1. नागरिक अधिकार:-

जीवन, स्वतंत्रता का अधिकार

2. राजनीतिक अधिकार:-

वोट देना, चुनाव लड़ना, शासन में भागीदारी

3. सामाजिक अधिकार:-

नैतिकता, राष्ट्रिय एकता, राष्ट्रीय सेवा

अधिकारों पर प्रतिबंध के आधार

सामाजिक हित:-

समाज की शांति, व्यवस्था और नैतिकता बनाए रखने के लिए अधिकारों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

अन्य व्यक्तियों के हित के लिए :-

एक व्यक्ति के अधिकार दूसरे व्यक्ति के अधिकारों को नुकसान न पहुँचाएँ, इसलिए प्रतिबंध आवश्यक होता है।

राज्य की सुरक्षा, विकास तथा स्वतंत्रता के लिए :-

राष्ट्र की सुरक्षा, एकता और विकास को बनाए रखने के लिए अधिकारों पर कुछ सीमाएँ लगाई जाती हैं।

नागरिक अधिकारों में शामिल अधिकार

  1. नागरिक अधिकार वे अधिकार हैं जिन्हें समाज और राज्य द्वारा सबसे पहले मान्यता दी गई।
  2. इन अधिकारों का उद्देश्य व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करना है।
  3. नागरिक अधिकारों में निम्नलिखित अधिकार शामिल हैं-
  4. जीवन का अधिकार।
  5. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार ।
  6. संपत्ति रखने का अधिकार।
  7. कानून के समक्ष समानता का अधिकार।
  8. देश की सीमाओं के भीतर कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता ।
  9. उपरोक्त सूची के अतिरिक्त भी नागरिकों को अन्य नागरिक अधिकार प्राप्त होते हैं, जो उनके व्यक्तिगत जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं।

नागरिकों के दायित्व

नागरिकों के दायित्व उनके कर्तव्यों से जुड़े होते हैं। प्रत्येक नागरिक से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करे।

नागरिकों के प्रमुख दायित्व निम्नलिखित हैं-

  1. देश की रक्षा करना और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्र की सेवा करना।
  2. कर, उपकर और आयकर आदि का समय पर भुगतान करना।
  3. विवादों का समाधान समझौते, बातचीत और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से करना, न कि बल प्रयोग से।
  4. कानून का पालन करना और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की सहायता करना।
  5. चुनावों में भाग लेना तथा सरकार की गतिविधियों पर निगरानी रखना।

प्रवासी या बाहरी लोग स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान

1.श्रम प्रदान करते हैं:

प्रवासी लोग निर्माण, सफाई, घरेलू काम, कारखानों और सेवाओं में काम करके स्थानीय कार्यों को पूरा करते हैं।

2.उत्पादन बढ़ाते हैं:

इनके काम से वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन बढ़ता है, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

3.सेवाएँ सस्ती और सुलभ बनाते हैं:

प्रवासी श्रमिकों के कारण रोज़मर्रा की सेवाएँ आम लोगों को कम लागत में मिलती हैं।

4.स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देते हैं:

वे किराया, भोजन, परिवहन और छोटी दुकानों पर खर्च करते हैं, जिससे स्थानीय बाज़ार चलता है।

5.कौशल और अनुभव लाते हैं:

कुछ प्रवासी अपने साथ कौशल और अनुभव लाते हैं, जिससे काम की गुणवत्ता सुधरती है।

नागरिक और राष्ट्र

1.कोई भी नागरिक अपनी राष्ट्रीय पहचान को विभिन्न प्रतीकों के माध्यम से प्रकट कर सकता है, जैसे-

  • राष्ट्रगान,
  • राष्ट्रध्वज,
  • राष्ट्रभाषा,
  • विशेष राष्ट्रीय उत्सवों का आयोजन।

2. लोकतांत्रिक देश समावेशी होते हैं और सभी नागरिकों को राष्ट्र के हिस्से के रूप में पहचानने की अनुमति देते हैं।

  • उदाहरणः राज्यकृत नागरिकता के लिए आवेदन की शर्तें प्रत्येक देश में अलग होती है।
  • जैसे – इज़राइल और जर्मनी में धर्म और जातीय मूल को प्राथमिकता दी जाती है।

3. भारतीय संविधान ने विभिन्न समाजों और समुदायों को समायोजित करने का प्रयास किया है।

  • अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), महिलाएँ और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के सुदूरवर्ती समुदाय पूर्ण और समान नागरिकता प्राप्त कर सकें।

4. नागरिकता से संबंधित प्रावधान संविधान के भाग 2 (अनुच्छेद 5-11) और संसद द्वारा पारित कानूनों में वाणत हा

नागरिकता के प्रकार

1. जन्मजात नागरिकता (Citizenship by Birth):

किसी व्यक्ति को राज्य में जन्म लेने के आधार पर नागरिकता प्राप्त होती है।

2. राज्यप्रदत्त नागरिकता (Citizenship by State/Naturalisation):

जब किसी व्यक्ति को सरकार द्वारा विशेष परिस्थितियों के कारण नागरिकता दी जाती है।

3. इकहरी नागरिकता (Single Citizenship):

वह नागरिकता जो किसी व्यक्ति को केवल एक देश द्वारा दी जाती है। उदाहरणः भारत।

4. दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship):

  • जब किसी व्यक्ति को दो देशों की नागरिकता प्राप्त हो, जैसे- देश और प्रांत या दो अलग देश।
  • उदाहरण: अमेरिका, फ्रांस।

नागरिक अधिकार और सामाजिक अधिकार

1. नागरिक अधिकार (Civil Rights) :

ये अधिकार व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े होते हैं, जैसे-

  1. जीवन का अधिकार
  2. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  3. आस्था और धर्म की स्वतंत्रता

2. सामाजिक अधिकार (Social Rights):

ये अधिकार समाज और समुदाय से जुड़े होते हैं, जैसे-

  1. न्यूनतम मजदूरी का अधिकार
  2. शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार
  3. किसी भी जगह आज़ादी से घूमने-फिरने का अधिकार।

राज्यकृत नागरिकता

  1. राज्यकृत नागरिकता वह नागरिकता होती है जिसमें व्यक्ति को राज्य (सरकार) द्वारा नागरिकता प्रदान की जाती है।
  2. यह नागरिकता कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से दी जाती है, जैसे-
  • लंबे समय तक निवास करने पर,
  • विवाह के आधार पर,
  • सरकारी सेवा या विशेष योगदान के कारण।

सरल शब्दों में, राज्यकृत नागरिकता का मतलब है कि सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार किसी व्यक्ति को नागरिक बनाया जाना।

राज्यकृत नागरिकता के तरीके

  1. पंजीकरण द्वारा :- निर्धारित प्रक्रिया और आवेदन के माध्यम से।
  2. देशीयकरण द्वारा :- अच्छे चरित्र, राज्यनिष्ठा की शपथ और भाषा ज्ञान के आधार पर।
  3. वंश परंपरा द्वारा :- माता-पिता में से किसी एक के भारतीय नागरिक होने पर।
  4. भू-क्षेत्र के भारत में मिलने पर :- नए क्षेत्र के निवासी भारतीय नागरिक माने जाते हैं।
  5. निवास के आधार पर :- किसी देश में लंबे समय तक रहने पर।
  6. विवाह के आधार पर :- उस देश के नागरिक से विवाह करने पर।
  7. सरकारी सेवा के आधार पर :- राज्य की सेवा करने पर।
  8. विशेष योग्यता या योगदान के आधार :- पर देश के लिए विशेष कार्य करने पर।
  9. गोद लिए जाने पर :- नागरिक द्वारा गोद लिए जाने पर।

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