कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 2 के नोट्स हिंदी में,
भारतीय संविधान में अधिकार Notes
यहाँ हम कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के 1st अध्याय “भारतीय संविधान में अधिकार” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में भारतीय संविधान में अधिकार से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 2 के नोट्स हिंदी में, भारतीय संविधान में अधिकार Notes

Class 11 Political Science Chapter 2 Notes in Hindi
अधिकार
किसी व्यक्ति के पास किसी विशिष्ट कार्य को करने अथवा किसी विशेष पद को ग्रहण करने की क्षमता या योग्यता अथवा शक्ति है तो उसे उस व्यक्ति का विशिष्ट अधिकार कहते है।
साधारण शब्दों में :-
- अधिकार यानी Rights – वे चीजें या सुविधाएँ जो हमें जन्म से या संविधान/कानून द्वारा मिली होती हैं,
- जिनका इस्तेमाल करके हम सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सकते हैं।
- मतलबः अधिकार वो चीजें हैं जो हमें मिलनी चाहिए और जिनका हम उपयोग कर सकते हैं, जैसे बोलने की आज़ादी, पढ़ाई का हक, सुरक्षा का हक आदि।
अधिकारों का महत्व :
पहला उदाहरण :
- 1982 के एशियाई खेलों से पहले सरकार ने बड़े निर्माण (जैसे फ्लाईओवर और स्टेडियम) के लिए ठेकेदारों को काम दिया। कई मज़दूरों ने दिन-रात मेहनत की, लेकिन कई बार उनके मजदूरी के अधिकार, सुरक्षित काम के अधिकार, और मानव अधिकारों का उल्लंघन हुआ।
- मजदूरों से काम तो लिया, लेकिन उनके काम करने की अच्छी स्थिति या मजदूरी का ठीक से ध्यान नहीं रखा गया।
- यह अधिकारों का हनन (violation) है, क्योंकि हर मजदूर को सुरक्षित काम और सही वेतन का हक है।
दूसरा उदाहरण :
- मचल लालुंग की कहानी मचल लालुंग असम का रहने वाला था। 1951 में 23 साल की उम्र में किसी छोटे अपराध में उसे जेल भेजा गया, लेकिन गलती से उसे 50 साल से भी ज़्यादा जेल में रखा गया, जबकि शायद उसे बहुत पहले छोड़ देना चाहिए था।
- यह उसके व्यक्तिगत स्वतंत्रता (personal liberty) और न्याय पाने के अधिकार (right to justice) का उल्लंघन था।
- किसी भी इंसान को बिना कारण जेल में इतने साल रखना उसके मौलिक अधिकारों (fundamental rights) का सीधा हनन है।
अधिकारों का महत्त्व
1. स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान:-
अधिकार हमें अपनी बात कहने, अपनी पसंद के अनुसार जीने और अपने फैसले लेने की आज़ादी देते हैं। बिना अधिकारों के, हम दूसरों के नियंत्रण में रह जाएंगे।
2. न्याय और समानता:
अधिकार सभी नागरिकों को बराबरी का दर्जा दिलाते हैं। चाहे अमीर हो या गरीब, सभी को एक जैसे अधिकार प्राप्त हैं, जैसे शिक्षा का अधिकार, मत देने का अधिकार, जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार।
3. सुरक्षा और संरक्षण :
अधिकार हमें शोषण, अन्याय और भेदभाव से बचाते हैं। उदाहरण के लिए, बाल अधिकार, महिला अधिकार, श्रमिक अधिकार ये सब कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
4. व्यक्तित्व का विकास:
जब हमें अपने विचार व्यक्त करने, अपनी क्षमताओं को दिखाने और अपने सपनों को पूरा करने का अधिकार मिलता है, तभी हम अपने जीवन में पूरी तरह विकसित हो पाते हैं।
अधिकारों का घोषणा पत्र
- अधिकारों के घोषणा पत्र से अभिप्राय कैसे पत्र से है जिसे 1928 में मोतीलाल नेहरु की समिति ने ब्रिटिश शासको से मांग उठाई थी, इस प्रकार यह सुनिश्चित था की आजादी के पश्चात संविधान निर्माण के दौरान संविधान में अधिकारों का समावेश किया जाएगा सूचिबद्ध किया जाएगा।
- इसमे लोगो के मौलिक अधिकारों को रखा गया तथा वे सभी अधिकारों को रखा गया जो व्यक्ति के जीवन को पूर्ण रूप से चलाने के लिए आवश्यक हो ।
- अधिकारों का घोषणा पत्र एक ऐसा दस्तावेज़ होता है, जिसमें लिखा होता है कि हर इंसान के क्या-क्या बुनियादी अधिकार होते हैं।
- ये अधिकार हर किसी को बराबरी, आज़ादी, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीने का हक़ देते हैं।
मौलिक अधिकार :-
- मौलिक अधिकार उन अधिकारों को कहा जाता है जो व्यक्ति के जीवन के लिए मौलिक होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते है जिनमे राज्य द्वारा हस्तक्षेप नही किया जा सकता।
- ये ऐसे अधिकार है जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिए आवश्यक है और जिनके बिना मनुष्य अपना पूर्ण विकास नही कर सकता |
छः मौलिक अधिकार :-
1. समानता का अधिकार (14-18 अनुच्छेद) :-
- अनुच्छेद 14 :- कानून के समक्ष समानता।
- अनुच्छेद 15 :- कानून का समान संरक्षण।
- अनुच्छेद 16 :- धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध |
- अनुच्छेद 17 :- रोजगार में अवसर की समानता ।
- अनुच्छेद 18 :- पदवियों का अंत और छुआछूत की समाप्ति।
2. स्वतंत्रता का अधिकार (19-22 अनुच्छेद) :-
- अनुच्छेद 19 :- भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण ढंग से जगा होने की संघ बनाने की स्वतंत्रता, संगठित होने की स्वतंत्रता |
- अनुच्छेद 20 :- भारत में कहीं भीं जाने आने की स्वतंत्रता, भारत के किसी भी हिस्से में जाकर रहने व बसने की स्वतंत्रता
- अनुच्छेद 21 :- कोई भी व्यापार करने की स्वतंत्रता एवं अपने अनुसार कार्य चुनने की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 22 :- जीवन की रक्षा और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार अभियुक्तो और राजा पाए लोगों को अपनी सुरक्षा हेतु उपाय करने की स्वतंत्रता ।
3. शोषण के विरूद्ध अधिकार (23-24 अनुच्छेद) :-
- अनुच्छेद 23 :- बंधुआ मज़दूरी पर रोक ।
- अनुच्छेद 24 :- जोखिम वाले कामों में बच्चों से मज़दूरी कराने पर रोक ।
4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (25-28 अनुच्छेद) :-
- अनुच्छेद 25 :- आस्था और प्रार्थना की आजादी |
- अनुच्छेद 26 :- धार्मिक मामलों के प्रबन्धन और खास तरह की संस्थाओं में धार्मिक निर्देश देने की स्वतंत्रता ।
- अनुच्छेद 27 :- धर्म प्रचार एवं धार्मिक संप्रदाय की देख-रेख के लिए कर न देने की स्वतंत्रता ।
- अनुच्छेद 28 :- किसी भी सरकारी शिक्षण संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी ।
5. संस्कृति एवं शिक्षा सम्बन्धी अधिकार (29-30 अनुच्छेद) :-
- अनुच्छेद 29 :- भारत के किसी भी राज्य के नागरिकों को अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति बनाए रखना |
- अनुच्छेद 30 :- भाषा तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों शिक्षा
- संस्थाओं की स्थापना तथा उनके प्रशासन को चलाने का अधिकार देता हैं।
6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (32 अनुच्छेद) :-
- अनुच्छेद 32 :- मौलिक अधिकारों को लागू करवाने के लिए न्यायलय में जाने का अधिकार, जिसे रिट भी कहते हैं।
- अनुच्छेद 19 f को संपत्ति के अधिकार को 1978 के द्वारा हटा दिया गया है।
- संविधान के जनक डॉ अम्बेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान का हृदय और आत्मा की संज्ञा दिया है।
रिट क्या होता है ?
- रिट एक कानूनी आदेश (legal order) होता है, जिसे कोर्ट (High Court या Supreme Court) जारी करती है, जब किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।
- मतलब अगर किसी नागरिक के साथ गलत होता है, तो वो सीधे कोर्ट में जाकर अपनी मदद माँग सकता है, और कोर्ट उस पर रिट जारी करके सरकारी संस्था या अधिकारी को आदेश देती है कि वो गलती ठीक करे।
रिट के प्रकार निम्नलिखित है :-
रिट के 5 प्रकार
1.बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus):-
बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) अगर किसी को गैरकानूनी तरीके से पकड़ा या जेल में रखा गया है, तो कोर्ट कहेगी: “उस व्यक्ति को तुरंत पेश करो!”
2.परमादेश (Mandamus)
कोर्ट सरकारी अफसर या संस्था को आदेश देती है: “अपना काम ठीक से करो!”
3.निषेध आदेश (Prohibition)
निषेध आदेश (Prohibition) कोर्ट निचली अदालत को रोकेगी: “तुम अपनी हद से ज़्यादा काम मत करो!”
4.अधिकार पृच्छा (Quo Warranto)
कोर्ट पूछती है: “तुम किस अधिकार से इस सरकारी पद पर बैठे हो?”
5.उत्प्रेषण रिट (Certiorari)
उत्प्रेषण रिट (Certiorari) कोर्ट निचली अदालत से केस खींच लेगी और देखेगी कि कोई गलती हुई या नहीं।
राज्य के नीति निर्देशक तत्व क्या होते हैं?
अर्थ :
ये वो नियम और बातें हैं, जो संविधान ने सरकार को बताई हैं कि देश को कैसे चलाना चाहिए, ताकि जनता का भला हो और समाज में बराबरी रहे।
कहां लिखा है :
भारतीय संविधान के भाग 4 (Article 36-51) में।
किसके लिए :
ये सरकार के लिए दिशा निर्देश हैं- यानी सरकार को इन पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन ये अदालत में जाकर ज़बरदस्ती लागू नहीं करवाए जा सकते (non-justiciable)।
राज्य के नीति निर्देशक तत्व उद्देश्य
- समाज में समानता (equality) लाना।
- गरीबों, कमजोरों का कल्याण (welfare) करना।
- समाज में न्याय (justice) बढ़ाना।
- महिलाओं और बच्चों की रक्षा (protection) करना।
- लोगों को अच्छा जीवन स्तर (good living standard) देना।
- पर्यावरण और संसाधनों की रक्षा (protection) करना।
नीति निर्देशक तत्व उद्देश्य और नीतियाँ :-
उद्देश्य
- लोगों का कल्याण सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय जीवन स्तर ऊँचा उठाना; संसाधनों का समान वितरण अंतराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा ।
- नीतियाँ: समान नागरिक संहिता; मद्यपान निषेध, घरेलू उद्योगों को बढ़ावा; उपयोगी पशुओं को मरने पर रोक; ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन |
- Note : ऐसे अधिकार जिनके लिए न्यायलय में दावा नहीं किया जा सकता :-
- पर्याप्त जीवन यापन; महिलाओं और पुरूषों को समान काम की समान मजदूरी आर्थिक शोषण के विरुद्ध अधिकार; काम का अधिकार ।
नीति-निर्देशक तत्व (DPSP) और मौलिक अधिकारो (Fundamental Rights) का संबंध
समान उद्देश्य :
- दोनों का मकसद है – देश में जनता की भलाई करना, समाज को बेहतर और न्यायसंगत बनाना।
- मौलिक अधिकार व्यक्ति को हक़ देते हैं।
- नीति निर्देशक तत्व सरकार को बताते हैं कि उसे क्या करना चाहिए।
अंतर (Difference):
- मौलिक अधिकार:- अदालत में जाकर लागू करवाए जा सकते हैं (justiciable) I
- नीति-निर्देशक तत्व:- अदालत में नहीं लाया जा सकता, बस सरकार पर नैतिक ज़िम्मेदारी होती है (non-justiciable) I
साथ मिलकर काम :
- मौलिक अधिकार व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
- नीति निर्देशक तत्व → समाज के कमजोर वर्गों का भला करने के लिए नीतियाँ तय करते हैं।
- दोनों मिलकर व्यक्ति और समाज दोनों को मजबूत करते हैं और भारत को कल्याणकारी राज्य (welfare state) बनाते हैं।
नीति-निर्देशक तत्व (DPSP) और मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) में अंतर
मौलिक अधिकार
- भाग-3
- अनुच्छेद -(12-35)
- अमेरिका के संविधान से लिया गया है
- क़ानूनी सहयोग प्राप्त है
- न्यायालय में जाने की अनुमति
- मौलिक अधिकार का सम्बन्ध व्यक्तियों से है
- मौलिक अधिकार व्यक्ति के कल्याण को बढावा देते है
राज्य के नीति निर्देशक तत्व
- भाग-4
- अनुच्छेद (36-51)
- आयरलैंड के संविधान से लिया गया है
- क़ानूनी सहयोग प्राप्त नही है
- न्यायालय में नहीं जा सकते है
- नीति निर्देशक तत्व का सम्बन्ध समाज से है
- नीति निर्देशक सिद्धांत समुदाय के कल्याण को बढावा देते है
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के notes आपको कैसे लगे अपनी राय जरूर दे