मानव विकास Notes
Class 12 Geography Chapter 3 Notes in Hindi
यहाँ हम कक्षा 12 भूगोल के 3rd अध्याय “मानव विकास” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में मानव विकास से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
मानव विकास Notes, Class 12 Geography Chapter 3 Notes in Hindi

Class 12 Geography Chapter 3 Notes in Hindi
वृद्धि और विकास
वृद्धि
- यह मात्रात्मक परिवर्तन को दर्शाता है।
- इसका मापन संभव है।
- यह धनात्मक या ऋणात्मक दोनों हो सकता है।
- यह मूल्य निरपेक्ष का होता है। जैसे:- ढोलकपुर गांव की जनसंख्या 1000->1010
विकास
- यह गुणात्मक परिवर्तन को दर्शाता है।
- इसका मापन नहीं बल्कि अनुभव किया जा सकता है।
- यह हमेशा धनात्मक होता है।
- यह मूल्य सापेक्ष का होता है।
- जैसे:- ढोलकपुर गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सुविधाओं की वजह से लोगो के जीवन मे सुधार
विकासहीन वृद्धि
- ऐसी वृद्धि जिसमें वृद्धि तो होता है किंतु विकास नहीं होता है तो इसे विकासहीन वृद्धि कहते हैं।
- जैसे:- यदि किसी नगर की जनसंख्या 1 लाख से बढ़कर 2 लाख हो जाती है किंतु मूलभूत सुविधा, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि सुविधाओं में कोई वृद्धि नहीं होती है।
विकासयुक्त वृद्धि
- ऐसी वृद्धि जिसमें वृद्धि के साथ-साथ विकास भी होता रहे तो इसे विकासयुक्त वृद्धि कहा जाता है।
- जैसे:- जनसंख्या में वृद्धि के साथ-साथ अन्य सुविधाओं में वृद्धि
मानव विकास
- मानव विकास:- मानव विकास किसी समाज क्षेत्र देश, प्रदेश आदि में होने वाला ऐसा सकारात्मक बदलाव्र हैं जिससे मानव जीवन का सतर ऊंचा हो जाता है।
- मानव विकास से मानव में गुणात्मक परिवर्तन होती है।
- उम्र के साथ ऊंचाई और वजन बढ़ना वृद्धि है जबकि उम्र के साथ समझ काबढ़ना विकास है।
- 1980 के दशक से पहले जिस देश की अर्थव्यवस्था जितनी बड़ी होती थी वह देश उतना ज्यादा विकसित माना जाता था किंतु ऐसी वृद्धि से लोगों के जीवन में सुधार नहीं आया इसलिए नए विचारों का जन्म हुआ और विकास का केंद्र बिंदु मानव को माना गया।
मानव विकास की अवधारणाः
- प्रतिपादक :- पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक (सहयोगी प्रोफेसर अमर्त्य सेन)
- महबूब उल हक के अनुसार मान व विकास का अर्थ विकल्पों में वृद्धि होन से है।
- मानव विकास मानव की आकांक्षाओं एवं उन्हें उपलब्ध जीवन यापन की सुविधाओं के स्तर को विस्तृत करने की प्रक्रिया है।
- जबकि अमर्त्य सेन के अनुसार मानव विकास का मतलब स्वतंत्रता में वृद्धि से है।
मानव विकास के अंतर्गत नि म्नलिखित तीन महत्वपूर्ण पक्ष सम्मिलित होते हैं।
- दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन (जीवन प्रत्याशा)
- साक्षर यानी ज्ञानवान होना (शिक्षा)
- आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता (संसाधनों तक पहुंच)
3.जलवायुः-
जलवायु जनसंख्या के वितरण एवं घनत्व को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक है। अत्यधिक गर्म या ठंडे जलवायु वाले क्षेत्र में मानव बसाव के लिए असुविधाजनक होती है जबकि सुविधाजनक जलवायु वाले क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या निवास करती है।
मानव विकास के स्तंभ
मानव विकास के चार स्तंभ है
1.समता (समान अवसर):-
प्रत्येक व्यक्ति को उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुंच की व्यवस्था करना अवसरों की उपलब्धता में लिंग, आय, जाति आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
2.सशक्तिकरण:-
मानव को अपने विकल्पों का चयन करने की शक्ति प्राप्त होना चाहिए।
3.उत्पादकता:-
किसी देश के लोग ही उसके वास्तविक धन होते हैं अच्छी शिक्षा व बेहतर स्वास्थ्य सुविधा द्वारा लोगों की कार्य क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए।
4.सतत पोषणीयताः-
प्रत्येक पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह संसाधनों का उपयोग इस प्रकार करें कि आने वाली पीढ़ी को समान अवसर मिल सकें।
मानव विकास के उपागम
- मानव विकास के उपागम का अर्थ है मानव विकास को देखने का ढंग।
- मानव विकास के मुख्यतः चार उपागम है।
1. आय उपागम:-
मानव विकास के अध्ययन का यह सबसे पुराना उपागम है इसमें मानव विकास का निर्धारण मानव की आय के साथ जोड़कर ज्ञात किया जाता है।
2. कल्याण उपागम :-
यह उपागम प्रत्येक मानव की शिक्षा, स्वास्थ्य,सामाजिक सुरक्षा तथा संसाधनों तक पर्याप्त धनराशि के लिए सरकारी व्यय को आवश्यक मानता है। यह उपागम लोगों को केवल निष्क्रिय प्राप्ति करता मानता है।
3.न्यूनतम आवश्यकताओं का उपागम :-
मानव विकास के इस उपागम का प्रतिपादन अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने किया है इसके अंतर्गत मानव आधारभूत आवश्यकताओं को रखा गया है।
- भोजन
- जलापूर्ति
- आवास
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- स्वच्छता
4.क्षमता उपागमः-
इस उपागम का प्रतिपादन भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने किया। उनका मानना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के माध्यम से संसाधनों तक पहुंच को बढ़ाया जाए तथा यही मानव विकास की कुंजी है।
मानव विकास का मापन
मानव विकास सूचकांक (human development index):-
- मानव विकास सूचकांक का प्रतिपादन सर्वप्रथम वर्ष 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक ने किया था। मानव विकास सूचकांक, स्वास्थ्य, साक्षरता तथा संसाधनों तक पहुंच के संदर्भ में मापा जाता है। इनमें से प्रत्येक को 1/3 भारिता दी जाती है। इस आधार पर मानव विकास सूचकांक का मूल्य 0 से 1 के मध्य पर आधारित होता है।
- मानव विकास सूचकांक का मूल्य 1 के जितना अधिक समीप होता है उतना मानव विकास का स्तर अधिक माना जाता है।
- मानव विकास रिपोर्ट प्रति वर्ष UNDP द्वारा जारी किया जाता है।
- भूटान विश्व में अकेला देश है जिसने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GNH) को देश की प्रगति का आधिकारिक माप घोषित किया है।
- मानव विकास रिपोर्ट 2023 के अनुसार (स्विट्ज़रलैंड) सर्वोच्च मानव विकास सूचकांक वाला देश है, नार्वे 2nd स्थान पर है। मानव विकास रिपोर्ट 2023 के अनुसार भारत का रैंक 134 है।
अति उच्च मानव विकास वाले देश:-
स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, डेनमार्क, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड
जन शून्य क्षेत्रउच्च मानव विकास वाले देश:-
बुल्गारिया, मॉरीशस, चीन, मैक्सिको, ईरान, श्रीलंका
मध्य मानव विकास वाले देश:-
वेनेजुएला, बांग्लादेश, भारत, भूटान, इराक
निम्न मानव विकास वाले देश:-
नाइजीरिया, पाकिस्तान, तंजानिया, सूडान
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO):
- इसकी स्थापना वर्ष 1919 में वर्साय की संधि द्वारा की गई थी।
- इसका मुख्यालय जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में है।
- यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजदूरों का अधिकार और उनके हित के लिए कम करता है। यह मजदूरों के काम के घंटे भी सुनिश्चित करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP):
- स्थापना:- 1995
- मुख्यालयः- न्यूयॉर्क
- उद्देश्य:- गरीब देशों की मदद करना एवं गरीबी हटाना। भुखमरी एवं कुपोषण जैसी समस्याओं का समाधान निकालना।
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