कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 4 के नोट्स हिंदी में
भारत के विदेश संबंध notes
यहाँ हम कक्षा 12 राजनीतिक विज्ञान के 4th अध्याय “भारत के विदेश संबंध” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में भारत के विदेश संबंध से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
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class 12 Political Science book 2 chapter 4 notes in hindi
विदेश नीति
प्रत्येक देश दुसरे देश के साथ सम्बन्धों की स्थापना में एक विशेष प्रकार की नीति का प्रयोग करता है जिसे विदेश नीति कहा जाता है।
पंडित नेहरू की विदेश नीति की विशेषताएँ / सिद्धांत :-
1. गुट निरपेक्षता :-
भारत की विदेश नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता गुट निरपेक्षता है। गुट निरपेक्षता का अर्थ है किसी गुट में शामिल न होना और स्वतंत्र नीति का अनुसरण करना । भारत सरकार ने सदा ही गुट निरपेक्षता की नीति का अनुसरण किया है।
2. विश्व-शांति और सुरक्षा की नीति :-
भारत की विदेश नीति का आधारभूत सिद्धांत विश्व शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। भारत अंतराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के पक्ष में है। भारत ने सदैव विश्व शांति की स्थापना की और सुरक्षा की नीति अपनाई है।
3. साम्राज्यवादियों तथा उपनिवेशों का विरोध :-
भारत स्वयं ब्रिटिश साम्राज्य का शिकार रहा है जिसके कारण भारत ने सदैव साम्राज्य तथा उपनिवेशवाद का विरोध किया है। भारत साम्राज्यवाद को विश्व शान्ति का शत्रु मानता है क्योंकि साम्राज्यवाद युद्ध को जन्म देता है।
4. अन्य देशों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध :-
भारतीय विदेश नीति की एक प्रमुख विशेषता यह है की भारत विश्व के सभी देशों से मित्रतापूर्ण सम्बन्ध बनाने का प्रयास करता है।
5. पंचशील:-
भारत की विदेश नीति का एक और महत्वपूर्ण भाग है- पंचशील, जो भारत की अंतर्राष्ट्रीय राजनीति को एक महत्वपूर्ण दें है। यह सिद्धांत 1954 में बड़ा लोकप्रिय हुआ जब भारत और चीन के बीच तिब्बत के प्रश्न पर संधि हुई। राज्य के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए पांच सिद्धांतों की रचना की गई, जिन्हें पंचशील के नाम से पुकारा जाता है।
6. क्षेत्रीय सहयोग:-
भारत का सदा ही क्षेत्रीय सहयोग में विश्वास रहा है। भारत ने क्षेत्रीय सहयोग की भावना को विकसित करने के लिए 1985 में क्षेत्रीय सहयोग के लिए ‘दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संघ (SAARC) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे संक्षेप में ‘सार्क’ कहा जाता है।
गुटनिरपेक्षता आन्दोलन
- गुटनिरपेक्षता का अर्थ है किसी देश द्वारा या अन्य देशों द्वारा बनाये गये गुटों में शामिल न होकर उनसे दुरी बनाये रखना तथा उन गुटों द्वारा किये गए कार्यो की प्रशंसा या निंदा में बिना सोचे समझे टिप्पणी न करना ।
- पहला गुटनिरपेक्ष आंदोलन का आयोजन 1961 में बेलग्रेड में हुआ था
- गुटनिरपेक्षता के बारे में पंडित नेहरू ने कहा था जहाँ तक संभव होगा हम उन शक्ति गुटों से अलग रहना चाहते है।
- जिनके कारण पहले भी महायुद्ध हुए है और भविष्य में भी हो सकते है।
- वर्तमान समय में इस आन्दोलन में तृतीय विश्व के 120 सदस्य देश हैं।
- सितम्बर 2016 में गुट निरपेक्ष आन्दोलन का 17वां सम्मेलन वेनेजुएला में सम्पन्न हुआ।
- 18वां सम्मेलन जून 2019 में अजरबैजान में प्रस्तावित है।
गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के संस्थापक देश :-
- जोसेफ ब्राज टीटो – युगोस्लाविया
- जवाहर लाल नेहरू – भारत
- गमाल अब्दुल नासिर – मिश्र
- डा. सुकर्णी – इंडोनेशिया
- वामे एन्क्रूमा – धाना
गुट निरपेक्षता के उद्देश्य :-
- दूसरे गुटों से दूरी बनाये रखना ।
- गुटनिरपेक्षता के सदस्य देश आपस में एक दूसरे को आर्थिक सहयोग देंगे
- एक देश पर आक्रमण सभी देशों पर आक्रमण समझा जाएगा तथा सभी देश उसका मिलकर मुकाबला करेंगे ।
- गुटनिरपेक्षता के सदस्य देशों के परस्पर आपसी विवाद को बातचीत द्वारा हल किया जाएगा।
- गुट निरपेक्षता सभी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने पर बल देता है।
- गुट निरपेक्षता साम्राज्य वाद का विरोध करती है।
- किसी भी गुट द्वारा किये गये कार्यों की प्रशंसा या निंदा में बिना सोचे समझे टिप्पणी न करना ।
भारत द्वारा परमाणु नीति अपनाने के मुख्य कारण :-
- भारत में प्रारंभिक वर्षों में परमाणु नीति एवं परमाणु हथियारों के प्रति दृष्टिकोण आदर्शवादी एवं उदारवादी ही रहा है।
- भारत ने शीतयुद्ध के दौरान गुट-निरपेक्ष आन्दोलन के विकास पर अधिक बल दिया तथा निःशस्त्रीकरण का समर्थन करता रहा।
- परन्तु 1962 में चीन से युद्ध में हार, 1964 में चीन द्वारा परमाणु विस्फोट तथा 1965 एवं 1971 में पाकिस्तान के साथ दो युद्धों ने भारत की परमाणु नीति एवं परमाणु हथियारों के निर्माण पर बहुत अधिक प्रभाव डाला ।
- 1970 के दशक में भारत ने पहली बार अनुभव किया कि भारत को भी परमाणु सम्पन्न राष्ट्र बनना है।
- भारत ने सर्वप्रथम 1974 में एक तथा 1998 में पांच परमाणु करके विश्व को
- दिखला दिया कि भारत भी एक परमाणु संपन्न राष्ट्र है।
भारत द्वारा परमाणु नीति एवं परमाणु हथियार बनाने एवं रखने के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते है
- आत्म रक्षा के लिए
- प्रथम प्रयोग की मनाही
- आत्मनिर्भर राष्ट्र बनना
- शक्तिशाली राष्ट्र बनना
- प्रतिष्ठा प्राप्त करना
- भारत द्वारा लड़े गए युद्ध
- दो पड़ोसी देशों के पास परमाणु हथियार होना
- न्यूनतम अवरोध की स्थिति प्राप्त करना।
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध :-
1. कश्मीर मुद्दा 1947 :-
- कश्मीर मामले को लेकर पाकिस्तान के साथ बंटवारे के तुरंत बाद ही संघर्ष छिड़ गया था सन 1947 में ही कश्मीर में भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच युद्ध छिड़ गया।
- इस युद्ध में भारत को जीत प्राप्त हुई।
2. 1965 के भारत - पाकिस्तान का युद्ध (कारण ) :-
A.जूनागढ़ एवं हैदराबाद का भारत में मिलाया जाना :-
जूनागढ़ एवम हैदराबाद की रियासतें भारत में मिला लिए जाने से पाकिस्तान को गहरा धक्का लगा तथा वह भारत को सदैव नीचा दिखाने की कार्यवाहियां करने लगा।
B. ऋण अदा करने का प्रश्न :-
स्वतंत्रता भारत ने पुरानी सरकार के कर्जे का भर संभाला। इसके अनुसार इसे 5 वर्ष में पाकिस्तान से 300 करोड़ रुपये लेने थे, लेकिन पाकिस्तान ने कर्जे को चुकाने का नाम तक नहीं लिया।
C. विस्थापित सम्पत्ति तथा अल्पसंख्यकों की रक्षा का प्रश्न –
1947 से 1957 तक लगभग 90 लाख मुसलमान भारत से पाकिस्तान गए तथा इतने ही गैर- मुस्लिम पाकिस्तान से भारत आए । पाकिस्तान ने इन विस्थापितों की सम्पत्ती तथा अल्पसंख्यकों की रक्षा से सबंधित सभी सुझावों को नकार दिया।
D. कश्मीर समस्या :-
1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध का सबसे बड़ा कारण कश्मीर समस्या थी अक्टूबर 1947 में कश्मीर के राजा हरी सिंह ने कश्मीर रियासत को भारत में मिलाने की घोषणा कर दी थी, परन्तु पाकिस्तान ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया।
3. 1971 का युद्ध
- 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में जनता ने याहिया खां की तानाशाही के विरुद्ध स्वतन्त्रता का आन्दोलन आरंभ किया । याहिया खां ने आन्दोलन को कुचलने के लिए सैनिक शक्ति का प्रयोग किया।
- भारत ने बांग्लादेश मुक्त संघर्ष में उसका साथ दिया। लगभग एक करोड़ शरणार्थियों को भारत में आना पड़ा। इससे भारत की आर्थिक व्यवस्था पर बड़ा बोझ पड़ा।
- भारत ने विश्व के देशों से अपील की कि जब तक बांग्लादेश की समस्या का संकट हल नहीं हो जाता तब तक पाकिस्तान को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता न दी जाए।
- सोवियत संघ और अनेक अन्य देशों ने भारत के साथ सहानुभूति प्रकट की। परन्तु चीन और अमेरिका जैसी महान शक्तियां बांग्लादेश के प्रश्न को पाकिस्तान का घरेलू मामला बताकर उसे आर्थिक तथा सैनिक सहायता देते रहे।
- पाकिस्तान ने 3 दिसम्बर, 1971 को भारत पर आक्रमण कर दिया । इस युद्ध का भारत ने डट कर मुकाबला किया और विजयी हुआ, और पाकिस्तान के लगभग 90 हजार सैनिकों ने भारतीय सैनिकों के आगे हथियार डाल दिए।
4. कारगिल युद्ध 1999
- कारगिल युद्ध, जिसे ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है
- भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 के बीच कश्मीर के कारगिल जिले में हुए सशस्त्र संघर्ष का नाम है।
- पाकिस्तान की सेना और कश्मीरी उग्रवादियों ने भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा पार करके भारत की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की।
- 60 दिन लंबे चले इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान की सेना को पूरी तरह से ढेर कर दिया।
शांति :-
1999 में स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच लाहौर समझौता किया गया । भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस पर हस्ताक्षर किए।
ताशकंद समझौता
- ताशकंद समझौता 1966 में उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ ।
- इस समझौते के मुख्य प्रावधान इस प्रकार है-
- दोनों पक्षों का यह प्रयास रहेगा कि संयुक्त राष्ट्र के घोषण पत्र के अनुसार दोनों में मधुर संबंध बनें।
- दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि दोनों की सेनाएं 5 फरवरी, 1966 से पहले उस स्थान पर पहुंच जायें, जहाँ वे 5 अगस्त 1965 से पहले थीं।
- दोनों देश एक-दूसरे के आंतरिक विषयों में हस्तेक्षेप नहीं करेंगे।
- दोनों देश एक-दूसरे के विरुद्ध प्रचार नहीं करेंगे।
शिमला समझौता
- जून 1972 में एक सम्मलेन हुआ जिसमें श्रीमती इंद्र गाँधी और पाकिस्तान के तत्कालीन शासक प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टों ने भाग लिया।
- सम्मेलन में दोनों देशों ने एक समझौता किया जिसे शिमला समझौता कहा जाता है।
इस समझौते की प्रमुख शर्ते इस प्रकार है :
- दोनों राष्ट्र अपने पारस्परिक झगड़ों को द्विपक्षीय बातचीत और मानी शांतिपूर्ण ढंगों से हल करने के लिए दृढ – संकल्प है।
- दोनों राष्ट्र एक – दुसरे की राष्ट्रिय एकता, क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता और सार्वभौम समानता का सम्मान करेंगे।
- दोनों देश द्वारा परस्पर विरोधी प्रचार नहीं किया जायेगा
- दोनों देश परस्पर सामान्य संबंध स्थापित करने के लिए प्रयत्न करेंगे।
एफ्रो-एशियाई एकता
- भारत की आजादी के समय विश्व में अन्य कई देश आजाद हुए जो भारत की तरह गरीब थे तथा रहे थे।
- ऐसे में नेहरु ने अफ्रीका और एशिया की एकता को बढ़ने के प्रयास किये।
- 1947 में नेहरु की अगुआई में भारत ने एशियाई संबंध सम्मलेन का आयोजन किया
- 1949 में भारत ने इंडोनेशिया की आजादी के समर्थन में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन किया ।
- भारत ने औपनिवेशीकरण का विरोध किया।
- भारत ने खासकर दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का विरोध किया।
- इंडोनेशिया के शहर बांडुंग में एफ्रो- एशियाई सम्मेलन 1955 में आयोजन ।
- किया गया। जिसमें गुट निरपेक्ष आन्दोलन की नींव पड़ीं।
चीन और भारत के संबंध :-
पंचशील सिद्धांत:-
- पंचशील के सिद्धांत अप्रैल, 1954 में भारत और चीन के प्रधानमंत्री, पंडित जवाहर लाल नेहरु व् चाऊ-एन-लाई ने बनाए ।
- इस व्यापारिक समझौते की प्रस्तावना में पांच सिद्धांत दिए गए जिनको सामूहिक रूप से पंचशील कहा जाता है। इस पांच सिद्धांतों को भारत तथा चीन ने परस्पर संबंधों को नियमित करने के विषय में स्वीकार किया था।
ये सिद्धांत हैं: -
- परस्पर क्षेत्रीय अखंडता तथा प्रभुसत्ता का सम्मान करना
- परस्पर आक्रमण न करना
- परस्पर आंतरिक कार्यों में हस्तक्षेप न करना
- समानता तथा परस्पर लाभ
- शान्तिमय सह अस्तित्व
1962 में भारत-चीन के मध्य हुए युद्ध :-
- चीन ने 20 अक्टूबर, 1962 को भारत की उत्तरी सीमा पर आक्रमण कर दिया।
- इस अचानक हमले के कारण भारतीय फौजें जब तक संभाली तब तक चीन ने सैनिक चौकियों पर कब्जा कर लिया।
- ब्रिटेन और अमेरिका ने भारत के कहने पर तेजी से सैन्य सामग्री भेजी।
- चीन ने अचानक 21 नवंबर, 1962 को एक पक्षीय युद्ध-विराम की घोषणा कर दी।
- चीन से हारकर भारत की खासकर नेहरु जी की छवि को अंतर्राष्ट्रीय स्टार पर बहुत नुकसान हुआ।
तिब्बत की समस्या :-
- भारत चीन के बीच हुए युद्ध का एक कारण तिब्बत की समस्या थी।
- सन् 1914 में इन दोनों देशों के बीच सीमा निर्धारण करने के लिए शिमला में एक सम्मलेन हुआ जिसे शिमला संधि कहा गया ।
यह निर्णय हुआ :-
- तिब्बत पर चीन का अधिपत्य रहेगा परन्तु बाह्य तिब्बत को अपने कार्य में पूरी आजादी रहेगी।
- चीन तिब्बत के आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नही करेगा।
- चीन कभी भी तिब्बत को अपने राज्य का प्रांत घोषित नहीं करेगा ।
- तिब्बत और भारत सरकार के संबंध काफी अच्छे थे, तिब्बत में भारत सरकार के ग्यारह विश्राम-गृह थे।
- चीन ने 7 अक्टूबर, 1950 को तिब्बत में अपने सैनिक भेज दिए।
- चीनियों ने आक्साईचिन के पठार में सड़क बना ली। लद्दाख में कई सैनिक चौकियां स्थापित कर लीं।
- 31 मार्च, 1957 में दलाईलामा ने चीनियों के दमन से भयभीत होकर भारत में राजनीतक शरण ली। चीन ने इसका विरोध किया।
- सन 1959 को भारत पर आरोप लगाया कि वह तिब्बत में सशस्त्र विद्रोहियों को संरक्षण दे रहा है।
मानचित्र से संबंधित समस्या :-
- भारत एवं चीन के मध्य 1962 में युद्ध का एक कारण दोनों देशों के बीच मानचित्र में रेखांकित भू-भाग था ।
- चीन ने 1954 में प्रकाशित अपने मानचित्र में कुछ ऐसे भाग प्रदर्शित किए थे जो वास्तव में भारतीय भू-भागों में थे।
- जब इस मुद्दे को लेकर चीन के साथ प्रश्न उठायें गए तो उसने कहा कि यह पुराना मानचित्र है, नये मानचित्र में इस गलती को सुधार लिया जायेगा।
सीमा - विवाद :-
- भारत-चीन के बीच विवाद का एक कारण सीमा-विवाद था। भारत सदैव मैकमोहन रेखा को स्वीकार किया, परन्तु चीन ने नहीं।
- सीमा – विवाद धीरे-धीरे इतना बढ़ता गया कि इसने आगे चलकर युद्ध का रुप धारण कर लिया।
भारत और इजराइल का सम्बन्ध :-
- भारत और इजराइल के संबंधो की शुरुआत 1992 से हुई है।
- रूस के बाद भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर देश है।
- कृषि क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग है।
- सिंचाई के आधुनिक तरीके और कृषि की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए इजराइल द्वारा भारत की मदद की गई है।
- जल संरक्षण के लिए इजराइल द्वारा भारत के अलग अलग क्षेत्रों में जल स्वच्छत प्लांटों का निर्माण किया गया है।
- वर्तमान समय में चल रहे कोरोना वायरस के समय में भी भारत ने इजराइल को कई दवाइयां निर्यात की है।
भारत - रूस के संबंध
- भारत तथा रूस के संबंध हमेशा से मधुर रहे है।
- भारत रूस से हथियार खरीदता है, रूस ने सदैव भारत की सहायता की है।
- भारत और रूस दोनों का ही सपना बहुधुर्वी विश्व का है।
- दोनों देश चाहते है कि अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों का समाधान बातचीत द्वारा हो ।
- 2001 के भारत रूस समझौते में दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय समझौते हुए ।
- भारत तेल का आयातक देश है और संकट की घडी में रूस ने भारत को तेल देकर भारत की सहायता की है।
- रूस ने भारत के परमाण्विक योजना में तथा अन्तरिक्ष उद्योग में सहायता की है।
- वैज्ञानिक योजनाओं में भारत रूस की मदद करता है।
- कश्मीर मुद्दे पर रूस भारत का समर्थन करता है।
भारत और भूटान के अच्छे सम्बन्ध :-
- भारत और भूटान के साथ काफी अच्छे सम्बन्ध है।
- पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादियों और गुरिल्लों को भूटान ने अपने इलाके से खदेड़ भगाया, जिससे भारत को बड़ी सहायता मिली है।
- भारत भूटान में पनबिजली की विशाल परियोजनाओं में हाथ बटा रहा है।
- भारत भूटान में विकास के लिए सबसे ज्यादा अनुदान देता है।
- भारत सरकार और भूटानी सरकार के साथ कोई बड़ा संघर्ष नही है
भारत और मालदीव के अच्छे सम्बन्ध
- 1988 में श्री लंका से आये कुछ किराये के तमिल सौनिको ने मालदीव पर आक्रमण किया।
- मालदीव ने जब हमला रोकने के लिए भारत से सहायता मांगी तो भारतीय वायुसेना और नौसेना ने शीघ्र कार्यवाई की।
- भारत ने मालदीव के आर्थिक विकास, पर्यटक और मत्स्य उद्योग में भी सहायता की है।
भारत और बांग्लादेश संबंध
दो सहयोग के मुद्दे
- बांग्लादेश ने दिसंबर 1996 में फरक्का गंगा जल बंटवारे पर समझौता किया।
- भारत और बांग्लादेश आतंकवाद के मुद्दे पर सदैव एक रहे है।
दो असहयोग के मुद्दे
- भारत और बांग्लादेश के बीच असहयोग का मुद्दा चकमा शरणार्थी है।
- बंगलादेश में समय समय पर भारत विरोधी गतिविधियां होती रहती है।
- बांग्लादेश द्वारा भारत विरोधी मुस्लिम जमातों का समर्थन।
- गंगा और ब्रम्हपुत्र नदी जल बंटवारा।
भारत और नेपाल के अच्छे सम्बन्ध :-
- भारत और नेपाल के सम्बन्ध मधुर रहे है।
- भारत और नेपाल के बीच ऐसी संधि हुई है जिससे वो बिना बीजा और पासपोर्ट के एक दुसरे देश में आ जा सकते है।
- भारत नेपाल की हर चीज में सहयोग करता रहता है।
- विज्ञान और व्यापार के क्षेत्र में भारत का सहयोग ।
भारत और नेपाल में अनबन सम्बन्ध :-
- भारत विरोधी गतिविधियों पर नेपाल की सरकार कार्यवाही नही करती है।
- नेपाल की चीन के साथ दोस्ती रखना जिससे भारत नेपाल के सम्बन्ध के बीच दरार है।
- नेपाल में बढ़ रहे माओवादी समर्थको को भारत पाने लिए खतरा मानता है।
- नेपाल को लगता है की भारत उनके अंदरूनी मामलो में दखलंदाजी करता है।
भारत और श्रीलंका के अच्छे सम्बन्ध
- FTA (मुक्त व्यापार समझौता) जैसे समझौते होना भारत और श्रीलंका के बीच।
- भारत और श्रीलंका में अनबन तो हुए है लेकिन मित्रता की संधीया भी हुई है।
- श्रीलंका में आर्थिक मदद करना (सुनामी के समय)।
भारत और श्रीलंका के बुरे सम्बन्ध :-
- सिंघलियों को लगता है की भारत तमिलों को सहयोग करता है।
- 1987 में भारत के द्वारा शांति सेना भेजना, जिससे इन दोनो के बीच मनमोटाव हो गया।
- अंदरूनी मामलो में दखल देना भी कही न कही बुरे सम्बन्ध का कारण है।
भारत और अमेरिका संबंध :-
- भारत की सोवियत संघ से नजदीकी होने के कारण अमेरिका और भारत के संबंध शुरू से ही ख़राब रहे है।
- 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत और अमेरिका के संबंधो के सुधार आया और वर्तमान में भारत और अमेरिका के संबंध काफी अच्छे है।
भारत और अमेरिका के संबंधो की विशेषताएँ :-
- वर्तमान में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय साझेदारी कोविड-19 से मुकाबला, जलवायु संकट व सतत् विकास, शिक्षा और सुरक्षा सहित विभिन्न विषयों पर विचार किया है
- अमेरिका कंपनी बोईंग के 35 प्रतिशत कर्मचारी भारतीय है।
- 3 लाख से ज्यादा भारतीय सिलिकॉन वैली में कार्यरत है।
- अमरीकी कम्पनियों में भारतियों का अत्याधिक योगदान है।
ncert Class 12 Political Science book 2 Chapter 4 Notes in Hindi
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