राष्ट्र निर्माण की चुनौतियां
Class 12 Political Science Chapter 1
Question answer in Hindi
यहाँ हम कक्षा 12 राजनीतिक विज्ञान के पहले अध्याय “राष्ट्र निर्माण की चुनौतियां” के Question answer उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में राष्ट्र निर्माण की चुनौतियां का दौर से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
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Short Type Question
प्रश्न 1- 'भाग्यवधू से चिर-प्रतीक्षित भेंट' संविधान सभा का विशेष सत्र किसने संबोधित किया ?
उत्तर – पंडित जवाहर लाल नेहरू
प्रश्न 2 - औपनिवेशिक भारत में मुस्लिमों के हितों की रक्षा के लिए कौन सी राजनीतिक संस्था बनाई गई ?
उत्तर – मुस्लिम लीग
प्रश्न 3 - सबसे पहले किस रियासत ने स्वतंत्र बने रहने की घोषणा की ?
उत्तर – त्रावनकोर
प्रश्न 4 - किस समूह के रजवाड़ो ने भारत के साथ अपने विलय का विरोध किया?
उत्तर – जूनागढ़ , त्रावनकोर, हैदराबाद
प्रश्न 5 - निजाम की सेना को जाना जाता था?
उत्तर – रजाकार
प्रश्न 6 - राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के सुझावों के अनुसार कितने राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों का गठन किया गया?
उत्तर – 14 राज्य एवं 6 केंद्र शासित प्रदेश
प्रश्न 7 - भारत में 'राज्य पुनर्गठन आयोग' की स्थापना कब हुई।
उत्तर – सन् 1953
प्रश्न - 8 प्रथम भारतीय गर्वनर जनरल कौन थे?
प्रश्न – सी. राजगोपालाचारी
प्रश्न - 9 हैदराबाद के शासक को कहा जाता था?
प्रश्न – सी. राजगोपालाचारी
प्रश्न 10 - रियासतों को भारत में मिलाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा-
उत्तर – सरदार पटेल
प्रश्न 11 - स्वतंत्रता के पश्चात भारत के सामने प्रमुख चुनौती क्या थी ?
उत्तर – भारत को एकता के सूत्र में बांधे रखना ,लोकतंत्र को कायम रखना ,आर्थिक विकास करना और और गरीबी को समाप्त करना
प्रश्न 12 - भारत पाकिस्तान विभाजन के समय भारत में कुल रजवाड़ों की संख्या कितनी थी?
उत्तर – 565
प्रश्न 13 - विभाजन से सबसे अधिक प्रभावित दो राज्यों का नाम लिखिए ।
उत्तर – पंजाब और प. बंगाल
प्रश्न 14 - साम्प्रदायिक हिंसा के विरोध में महात्मा गांधी ने प्रथम बार उपवास कब व कहाँ रखा ?
उत्तर- जनवरी 1948 को कोलकता में
प्रश्न 15 - 1951 में भारतीय आबादी का कुल कितना प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या थी?
उत्तर- 12 प्रतिशत
प्रश्न 16 - रजवाड़ों के शासक भारतीय संघ में शामिल होने के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करते थे उसे क्या कहा जाता था ?
उत्तर – इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसन
प्रश्न 17 - ऐसी चार रियासतों के नाम लिखो जिनका एकीकरण भारतीय संघ में कठिनाईयों से हुआ
उत्तर – 1. जुनागढ़ 2. हैदराबाद 3. मणिपुर 4. जम्मू कश्मीर
प्रश्न 18- हैदराबाद के निजाम के खिलाफ किस स्थान के किसानों ने आंदोलन किया?
उत्तर – तेलगांना के किसानों ने
प्रश्न 19 - मणिपुर के किस शासक ने सहमती पत्र हस्ताक्षर किए
उत्तर – महाराजा बौधचंद्र सिंह ने
प्रश्न 20 - भारत का वह कौनसा प्रांत है जहां सर्वप्रथम सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का सिद्धांत अपनाया गया।
उत्तर – मणिपुर
प्रश्न 21 - कांग्रेस ने किस में भाषा के आधार पर राज्यों के पुर्नगठन की बात की ?
उत्तरः-1920 के नागपुर अधिवेशन में।
प्रश्न 22 - भाषा के आधार पर किस प्रांत में सर्वप्रथम विरोध प्रदर्शन हुए।
उत्तर – मद्रास प्रांत में
प्रश्न 27 - कौनसे प्रसिद्ध मुस्लिम नेता "द्वि-राष्ट्र" सिद्धान्त के खिलाफ थे?
उत्तर – खान अब्दुल गफ्फार खान (इन्हें सीमान्त गांधी भी कहा जाता है।)
प्रश्न 28 - भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री कौन थे?
उत्तर – सरदार वल्लभ भाई पटेल (इन्हें लौह पुरूष के नाम से जाना जाता है)।
प्रश्न 29 - रजवाड़ों के संदर्भ में "इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन" का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – “इंस्ट्रमेंट ऑफ एक्सेशन”-देशी रियासतों द्वारा भारतीय संघ में विलय हेतु सहमति पत्र था।
Long Type Question answer
प्रश्न 1 राज्य पुनर्गठन आयोग क्या था ? इसकी महत्वपूर्ण सिफारिशें क्या थी ?
उत्तर – 1953 में केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश फजल अली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया। राज्य पुनर्गठन आयोग स्वतंत्र भारत देश में भाषा के आधार पर राज्यों की सीमा समस्या निर्धारण का कार्य करती थी।
आयोग की प्रमुख सिफारिशे
1) त्रिस्तरीय (भाग A,B,C) राज्य प्रणाली को समाप्त किया जाए।
2) केवल 3 केन्द्रशासित क्षेत्रों (अंडमान और निकोबार, दिल्ली, मणिपुर) को छोड़कर बाकी के केन्द्रशासित क्षेत्रों को उनके नजदीकी राज्यों में मिला दिया जाए।
3) राज्यों की सीमा का निर्धारण वहाँ पर बोली जाने वाली भाषा होनी चाहिए।
इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1955 में प्रस्तुत की तथा इसके आधार पर संसद में राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 पारित किया गया और देश को 14 राज्यों एवं 6 संघ शासित क्षेत्रों में बाँटा गया।
प्रश्न 2 - हैदराबाद का भारत में विलय किस प्रकार हुआ ?
उत्तर –
- 1947 में हैदराबाद के निजाम ने अपने आप को स्वतंत्र घोषित कर लिया
- हैदराबाद रियासत एक बहुत बड़ी रियासत थी जो चारों तरफ से भारत के इलाके से घिरी हुई थी।
- हैदराबाद के शासक को निजाम कहा जाता था
- हैदराबाद रियासत के लोगों ने निजाम के शासन खिलाफ एक आंदोलन छेड़ दिया साथ तेलंगाना खिलाफ इलाके के किसानों ने भी निजाम के शासन से दुखी होकर निजाम के खिलाफ आंदोलन किया।
- हैदराबाद शहर आंदोलन का गढ़ बन चुका था इसीलिए निजाम ने अपने अर्धसैनिक बल रजाकार को आंदोलन दबाने के लिए भेजा।
- रजाकारों ने हैदराबाद रियासत में गैर मुसलमानों को निशाना बनाकर लुटपात, हत्या और बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम दिया।
- इन सारी घटनाओं की सूचना प्राप्त होने के बाद 1948 में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारतीय सेना की मदद लेकर निजाम के खिलाफ सैन्य कार्यवाही की इस कार्यवाही को देखकर निजाम ने आत्मसमर्पण कर दिया।
- इस तरह सैन्य कार्यवाही के आधार पर हैदराबाद रियासत का विलय भारत में किया गया।
प्रश्न 3 - मणिपुर के भारत संघ में विलय के लिए उतरदायी घटनाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर – मणिपुर के भारत संघ में विलय के लिए आजादी के चंद रोज पहले मणिपुर के महाराजा बोध चंन्द्र सिंह ने भारत सरकार के साथ भारतीय संघ में अपनी रियासत के विलय के एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसकी एवंज में उन्हें यह आश्वासन दिया गया था कि मणिपुर की आंतरिक स्वायत्ता बरकरार रहेगी। जनमत के दबाव में महाराजा ने 1948 के जून में चुनाव करवाया और इस चुनाव के फलस्वरूप मणिपुर की रियासत में संवैधानिक राजतंत्र कायम हुआ। मणिपुर भारत का पहला भाग है जहाँ सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार के सिद्धान्त को अपनाकर चुनाव हुए। मणिपुर की विधानसभा में भारत में विलय के सवाल पर गहरे मतभेद थे। मणिपुर की कांग्रेस चाहती थी कि इस रियासत को भारत में मिला दिया जाए जबकि दूसरी राजनीतिक पार्टियाँ इसके खिलाफ थी। मणिपूर की निर्वाचित विधानसभा से परामर्श किए बगैर भारत सरकार ने महाराजा पर दबाव डाला कि वे भारतीय संघ में शामिल होने के समझौते पर हस्ताक्षर कर दें। भारत सरकार को इसमें सफलता मिली। मणिपुर में इस कदम को लेकर लोगों में क्रोध और नाराजगी के भाव पैदा हुए। इसका असर आज तक देखा जा सकता है।
प्रश्न 4 - स्वतंत्र भारत के समक्ष कौनसी चुनौतियाँ थी? व्याख्या करें।
उत्तर – स्वतंत्रता के समय भारत के समक्ष मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन चुनौतियां थी-
1. राष्ट्र निर्माण की चुनौती- स्वतंत्रता के तुरंत बाद राष्ट्र निर्माण की चुनौती प्रमुख चुनौती थी। यहां विभिन्न धर्मो,जातियों, वर्गों, भाषा और संस्कृति को मानने वाले लोग रहते थे। इसमें एकता कायम करना एक चुनौती थी। क्योंकि प्रत्येक क्षेत्र और उपक्षेत्र की पहचान को बनाये रखते हुए देश की एकता और अखण्डता को कायम रखना था। दूसरे देशी राज्यों को भारतीय संघ में विलय के लिए राजी करना एक गंभीर संकट था।
2. लोकतंत्र को बनाये रखना- देश के सामने दूसरी प्रमुख समस्या देश में लोकतंत्र को कायम करने की थी। स्वतंत्रता के बाद भारत ने संसदीय प्रतिनिधि प्रणाली को अपनाया। लेकिन भारतीय जनता जहां अशिक्षित वर्ग बड़ा था वहां लोकतांत्रिक व्यवहार जो संविधान पर आधारित हो बनाए रखना एक गंम्भीर चुनौती थी। एक ऐसे समाज का निर्माण करना जिसमें सबसे पिछड़े वर्ग के व्यक्ति तक न्याय मिले यह भी एक चुनौती थी।
3. आर्थिक विकास हेतु रूपरेखा तैयार करना- स्वतंत्रता के समय भारत के सामने आने वाली तीसरी प्रमुख
समस्या थी भारत के आर्थिक विकास के लिए भविष्य की एक रूप रेखा तैयार करना। अतः देश के सामने संविधान में दिये गये नीति निर्देशक तत्वों के अनुसार गरीबी को खत्म करने के लिए योजना बनानी थी।
प्रश्न 5 - भारत विभाजन में आने वाली चुनौतियां की विवेचना कीजिए।
उत्तर – भारत विभाजन में आने वाली प्रमुख चुनौतियां निम्नलिखित थी –
1. मुस्लिम बहुल इलाकों का निर्धारण करना-स्वतंत्रता के समय में दो क्षेत्र एक पूर्व में और दूसरा पश्चिम में थे, जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा थी। लेकिन ऐसा कोई तरीका नहीं था जिससे पूर्वी और पश्चिमी मुस्लिम बहुल संख्या वाले क्षेत्र को जोड़कर एक किया जा सके।
2. प्रत्येक मुस्लिम बहुल क्षेत्र का पाकिस्तान में जाने के लिए राजी न होना-मुस्लिम बहुल हर क्षेत्र पाकिस्तान में मिलना चाहता हो ऐसा भी नहीं था। विशेष रूप से पश्चिम सीमा प्रान्त जिसके नेता खान अब्दुल गफ्फार खां थे जो द्विराष्ट्र सिद्धांत के खिलाफ थे।
3. पंजाब और बंगाल के बंटवारे की समस्या- तीसरी कठिनाई यह थी कि बंगाल और पंजाब में अनेक हिस्सों में गैर मुस्लिम आबादी भी थी। इन प्रान्तों का बंटवारा किस आधार पर किया जाए यह भी एक समस्या थी।
4. अल्पसंख्यकों की समस्या-सीमा के दोनों तरफ अल्पसंख्यक थे। ये लोग पेरशानियों से गुजर रहे थे। जैसे ही देश का विभाजन हुआ वैसे ही दोनों तरफ के अल्पसंख्यकों पर हमले प्रारम्भ हो गये। आबादी अनियोजित रूप से स्थानान्तरित हुईं। बहुत से लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा। इस प्रकार विभाजन में सिर्फ संपदा, देनदारी और संपतियों का ही बंटवारा नहीं हुआ बल्कि दोनों समुदाय हिंसा का शिकार भी हुए।
प्रश्न 4 - भारत विभाजन के परिणामों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – 1947 में भारत विभाजन के फलस्वरूप एक जगह की आबादी दूसरी जगह जाने के लिए मजबूर हुई। आबादी का यह स्थानान्तरण आकस्मिक, अनियोजित और त्रासदी से भरा था। यह स्थानान्तरण मानव इतिहास के ज्ञात अब तक के सबसे बड़े स्थानान्तरणों में से एक था। भारत विभाजन धर्म के आधार पर हुआ, जिसके निम्नलिखित परिणाम निकले :-
- दो नये देशों का उदय :- अगस्त 1947 में ब्रिटिश इण्डिया को धर्म के आधार पर दो देशों में बांट दिया गया। मुसलमानों के लिए पाकिस्तान और हिन्दुओं व अन्य सम्प्रदायों के लिए हिन्दुस्तान का निर्माण किया गया।
- आबादी का स्थानान्तरण – 1947 में भारत विभाजन के फलस्वरूप एक जगह की आबादी दूसरी जगह जाने के लिए मजबूर हुई। आबादी का यह स्थानान्तरण आकस्मिक, अनियोजित और त्रासदी से भरा था। लाखों की संख्या में आबादी का यह स्थानान्तरण इतिहास के ज्ञात अब तक के सबसे बडे स्थानान्तरणों में से एक था।
- भौतिक परिसंपत्तियों का बंटवारा :- भारत विभाजन के दौरान प्रत्येक चीज का बंटवारा किया गया।
- इस विभाजन में न केवल सम्पदा, लेन-देन और परिसंपतियों का बटवारा हुआ, बल्कि टेबल-कुर्सीयों, टाइप राईटर और पुलिस के वाद्य यंत्रों का भी बटवारा किया गया। इसके साथ ही डाक और रेलवे विभाग के कर्मचारियों का भी बटवारा किया गया।
- बच्चों और महिलाओं पर अत्याचार :- भारत विभाजन के दौरान महिलाओं और बच्चों पर अत्यधिक अत्याचार किये गये। अनेक बच्चे अपने माता-पिता और परिवार से बिछड़ गये। महिलाओं को दूसरें धर्म के लोगों ने जबरन अगवा कर लिया। उनसें जबरन शादी की तथा उनका धर्म भी परिवर्तित करवाया गया। अनेक परिवारों ने कुल की इज्जत के नाम पर बहु बेटीयों को मार डाला।
प्रश्न 5 - रजवाड़ों को भारतीय संघ में शामिल करने के मूल आधार क्या थे ? इस कार्य में किसने भूमिका निभाई?
उत्तर –
- स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले भारत दो भागों में बँटा हुआ था- ब्रिटिश भारत एवं देशी रियासतें।
- इन देशी रियासतों की संख्या लगभग 565 थी।
- रियासतों के शासकों को मनाने-समझाने में सरदार पटेल (गृहमंत्री) ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई और अधिकतर रजवाड़ो को उन्होंने भारतीय संघ में शामिल होने के लिए राजी किया था।
- कैबिनेट मिशन ने यह शर्त रखी थी कि आप भारत और पाकिस्तान दोनों में से किसी भी देश में शामिल हो सकते हो और आप स्वतंत्र भी रह सकते हो।
- अधिकतर रजवाड़ो के लोग भारतीय संघ में शामिल होना चाहते थे।
- भारत सरकार कुछ इलाकों को थोड़ी स्वायत्तता देने के लिए तैयार थी।
- विभाजन की पृष्ठभूमि में विभिन्न इलाकों के सीमांकन के सवाल पर खींचतान जोर पकड़ रही थी और ऐसे में देश की क्षेत्रीय एकता और अखण्डता का प्रश्न सबसे महत्वपूर्ण हो गया था।
- अधिकतर रजवाड़ों के शासकों ने भारतीय संघ में अपने विलय के एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर दिये थे इस सहमति पत्र को ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ कहा जाता है।
- जूनागढ़, हैदराबाद, कश्मीर और मणिपुर की रियासतों का विलय बाकी रियासतों की तुलना में थोड़ा कठिन साबित हुआ।
- लेकिन बाद में इन चारों रियासतों को अलग-अलग तरीके से भारत में शामिल कर लिया गया।
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