कक्षा 11 इतिहास अध्याय 6 के नोट्स हिंदी में
मूल निवासियों का विस्थापन notes
यहाँ हम कक्षा 11 इतिहास के 6th अध्याय “मूल निवासियों का विस्थापन” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में “मूल निवासियों का विस्थापन” से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
कक्षा 11 इतिहास अध्याय 6 के नोट्स हिंदी में, मूल निवासियों का विस्थापन notes

class 11 History chapter 6 notes in hindi
मूल निवासी कौन होते है
मूल निवासी वे लोग होते हैं जो किसी स्थान के सबसे पहले और प्राचीन निवासी माने जाते हैं, और जिनका अस्तित्व उस भूमि से कई पीढ़ियों से जुड़ा हुआ हो।
विशेषताएँ :-
- उस क्षेत्र की प्राचीन जनजातियाँ या समुदाय।
- जिनकी संस्कृति, भाषा, परंपराएँ वहीं उत्पन्न हुई हों।
- जिनका इतिहास उस क्षेत्र से जुड़ा हुआ हो, बाहर से आकर बसे नहीं हों।
- प्राकृतिक संसाधनों व भूमि से गहरा संबंध।
यूरोपीय लोग अमेरिका में क्यों बसना चाहते थे ?
- नई भूमि और प्राकृतिक संसाधन पाने के लिए।
- सोना-चाँदी और व्यापार से अधिक धन कमाने के लिए।
- यूरोप में छोटे बच्चें को सम्पत्ति का दावेदार नही माना जाता था इसलिए वो पैसे कमाने के लिए अमेरिका चले आते थे ।
- धार्मिक स्वतंत्रता हासिल करने के लिए।
- यूरोपीय देशों की औपनिवेशिक प्रतियोगिता के कारण।
- यूरोप में जनसंख्या बढ़ने और बेरोज़गारी से बचने के लिए।
- नई जगहों की खोज और रोमांच की इच्छा से।
'सेटलर' (Settler)
- अर्थ: आबादकार / बसने वाला – वह व्यक्ति जो किसी नये क्षेत्र में जाकर स्थायी रूप से बस जाता है।
- दक्षिण अफ्रीका में यह शब्द मुख्यतः डच (Boers) मूल के बसने वालों के लिए प्रयोग होता था।
- आयरलैंड, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में यह शब्द ब्रिटिश बसने वालों के लिए प्रयुक्त होता है।
- अमेरिका में ‘सेटलर’ शब्द का उपयोग यूरोपीय आप्रवासियों के लिए किया जाता है, जिन्होंने वहां भागकर नई बस्तियाँ बसाई।
बेमपुम बेल्ट
- ‘बेमपुम बेल्ट’ रंगीन सीपियों (beads) को आपस में सिलकर बनाई जाने वाली बेल्ट है।
- यह केवल सजावट का सामान नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम भी थी।
- किसी समझौते के बाद इसे स्थानीय कबीलों के बीच आदान-प्रदान किया जाता था, जिससे उनका सौहार्द और संबंध मजबूत होते थे।
स्पेनी और पुर्तगालियों का प्रवास
- स्पेनी और पुर्तगाली लोग 18वीं सदी में अमेरिका के अन्य क्षेत्रों में भी बसने लगे। धीरे-धीरे मध्य अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूज़ीलैंड के इलाकों में भी यूरोप से आए ये आप्रवासी पहुँचने लगे।
- उनके आगमन और बसावट की इस प्रक्रिया ने वहाँ के मूल निवासियों (Indigenous people) को अपने पारम्परिक क्षेत्रों से हटने पर मजबूर कर दिया।
- अनेक मूल निवासियों को अपनी भूमि छोड़नी पड़ी,नए इलाकों में विस्थापित होना पड़ा,और कई जगहों पर उन्हें सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
- पहले: स्पेन और पुर्तगाल – (1492)
- बादमें: ब्रिटेन, फ्रांस, हालैण्ड इत्यादि (17वीं सदी)
पश्चिमी यूरोप के लोगों को अमेरिका के मूल निवासी 'असभ्य' क्यों प्रतीत हुए?
- अमेरिका के मूल निवासियों का जीवनशैली और रहन-सहन पश्चिमी यूरोप के लोगों से पूरी तरह भिन्न था।
- वे मुख्यतः प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहते थे, उनकी कोई लिखित शिक्षा या औपचारिक संस्थाएं नहीं थीं, और उनकी सामाजिक प्रथाएं यूरोपीय आदर्शों से अलग थीं। इस कारण से पश्चिमी यूरोप के लोगों ने उन्हें असभ्य और पिछड़ा हुआ समझा।
रेड इंडियन
- रेड इंडियन अमेरिका के मूल निवासी हैं।
- यह 500 स्वतंत्र कबीलों का सामूहिक नाम है, जो अमेरिकी सरकार के संधि के अंतर्गत आरक्षित इलाकों में रहते हैं।
- यूरोपियों के अमेरिका आने से पहले जो लोग इस महाद्वीप में रहते थे, उन्हें रेड इंडियन या नेटिव इंडियन कहा जाता है।
टेरा-न्युलियस से क्या अभिप्राय है?
टेरा-न्युलियस का अर्थ है “कोई भी मालिक नहीं वाली जमीन” सरकार ने ऑस्ट्रेलिया की जमीन को टेरा-न्युलियस कहा, यानी ऐसी जमीन जो किसी की नहीं थी।
एबोरिजिनीज (Aborigines)
ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के शुरूआती मनुष्य या आदिमानव को एबोरिजिनीज कहा जाता था।
ओरल हिस्ट्री (Oral History)
ओरल हिस्ट्री का अर्थ है इतिहास को मौखिक रूप में सुनना और रिकॉर्ड करना। यह वह तरीका है जिसमें लोग अपनी यादों, अनुभवों और कथाओं के माध्यम से इतिहास साझा करते हैं।
कैनबरा (Canberra)
1911 में आस्ट्रेलिया की राजधानी ‘वूलव्हीटगोल्ड'(Woolwheat gold) बनाने का सुझाव दिया गया। अंततः उसका नाम ‘कैनबरा’ रखा गया जो एक स्थानीय शब्द कैमरा (Kamberra) से बना है जिसका अर्थ है’ सभा स्थल ।
उत्तरी अमेरिका के संदर्भ में 'रिजर्वेशन्स' से क्या तात्पर्य है?
रिजर्वेशन्स ऐसे छोटे इलाके होते थे जिनमें अमेरिका के मूल निवासियों (नेटिव इंडियन्स) को सीमित कर दिया गया था। ये जमीनें अक्सर ऐसी थीं जिनके साथ उनका पहले कोई संबंध नहीं था। मूल निवासियों को इन इलाकों में बसाया गया ताकि उन्हें यूरोपीय बसाहट से दूर रखा जा सके।
उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों की जीवन शैली
- गाँवों में समूह बनाकर रहते थे, अक्सर नदी घाटियों के पास।
- मछली, मांस और जंगली पशुओं का सेवन करते थे।
- मक्का और अन्य सब्जियां उगाते थे।
- शिकार के लिए लंबी यात्राएँ करते थे।
- घास के मैदानों में घूमने वाले जंगली मैसों का शिकार करते थे।
- केवल उतने ही जानवर मारते थे जितनी उनकी भोजन की ज़रूरत होती थी।
- कुशल कारीगर थे और सुंदर कपड़े, बर्तन, आभूषण बनाते थे।
- उनकी कला और शिल्प में सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व था।
- प्रकृति और संसाधनों के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीते थे।
अमेरिकियों के लिए 'फ्रंटियर' के मायने
- अमेरिका की प्रारंभिक बस्तियाँ पूर्वी क्षेत्र में बसाई गई थीं, पश्चिम का क्षेत्र तब उनकी पहुँच में नहीं था।
- समय के साथ अमेरिकी पश्चिम की ओर बढे, इसलिए उनके राज्यों की सीमा (फ्रंटियर) भी पश्चिम की ओर खिसकती रही।
- फ्रंटियर उस भूमि या सीमा को कहते हैं जिस पर किसी देश का कंट्रोल या अधिकार स्थापित किया जा सके।
- 1892 तक संयुक्त राज्य अमेरिका का विस्तार पूरा हो गया, पश्चिमी सीमा तक पहुँच गया।
- अमेरिका के पूर्व में अटलांटिक महासागर और पश्चिम में प्रशांत महासागर होने के कारण अब और भूमि
- विस्तार के लिए उपलब्ध नहीं रही, इसलिए कोई नया फ्रंटियर नहीं रहा।
संयुक्त राज्य अमेरिका में दास प्रथा : प्रचलन और समाप्ति
- 17वीं और 18वीं सदी में यूरोपियन सेटलर्स ने कृषि और उद्योग के लिए अफ्रीका से काले दास लाए।
- दक्षिणी राज्यों में कपास और तम्बाकू की खेती के लिए दासों की भारी आवश्यकता थी।
- दासों के साथ (अमानवीय व्यवहार होता था और उन्हें कोई स्वतंत्रता नहीं थी।
- उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच दास प्रथा को लेकर मतभेद थे।
- 19वीं सदी में एबोलिशनिस्ट आंदोलन (abolitionist movement) ने दास प्रथा का विरोध किया।
- 1861-1865 में अमेरिकी गृहयुद्ध हुआ, मुख्य कारण दास प्रथा और राज्यों के अधिकार थे।
- 1863 में अब्राहम लिंकन ने ‘एमान्सिपेशन प्रोक्लेमेशन’ जारी किया, जिससे दासों को स्वतंत्र घोषित किया गया।
- 1865 में संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान का 13वाँ संशोधन पारित हुआ, जिसने दास प्रथा पूरी तरह समाप्त कर दी।
- दास प्रथा की समाप्ति ने अमेरिका में समानता और स्वतंत्रता को मजबूत किया और अफ्रीकी-अमेरिकियों के नागरिक अधिकारों की नींव रखी।
इतिहास की किताबों में आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को शामिल क्यों नही किया गया था ?
- इतिहास ज्यादातर यूरोपीय लोगों ने लिखा, इसलिए उनकी संस्कृति और कामों को ज्यादा महत्व मिला और मूल निवासियों को कम समझा गया।
- यूरोपीय लोग मूल निवासियों को कम समझते थे और उनकी भूमि पर कब्जा कर उनका शोषण किया।
- ऑस्ट्रेलिया को “किसी की भूमि नहीं” मानकर मूल निवासियों को नजरअंदाज किया गया।
- उनके इतिहास और ज्ञान को लिखित रूप में नहीं माना गया।
- 20वीं सदी में लागू नीतियों ने उन्हें यूरोपीय संस्कृति में मिलाने की कोशिश की और उनकी पहचान को कम किया।
- उपनिवेशवाद के चलते मूल निवासियों को भारी हिंसा, जानलेवा बीमारियों (चेचक खसरा) और अपनी पैतृक भूमि से बेदखली का सामना करना पड़ा, लेकिन इन पीड़ाओं को इतिहास में पूरी तरह दर्ज नहीं किया गया।
उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी यूरोपीय लोगों के व्यवहार को देखकर दुखी थे। क्यों?
- मूल निवासी जिन वस्तुओं का यूरोपीय लोगों से आदान-प्रदान करते थे, उन्हें दोस्ती में दिया गया उपहार मानते थे, जबकि यूरोपीय लोग इन्हें बेचने लायक माल समझते थे।
- यूरोपीय व्यापारी मछली और रोएदार खाल को यूरोप में बेचकर मुनाफा कमाना चाहते थे, इसलिए उनका व्यवहार फायदे और लालच से भरा था।
- इन वस्तुओं के दाम यूरोप के बाजार में हर साल बदलते रहते थे, जिसे मूल निवासी समझ नहीं पाते थे, क्योंकि उन्हें यूरोपीय व्यापार और बाज़ार का कोई ज्ञान नहीं था।
- यूरोपीय लोग कभी बहुत ज्यादा सामान देते थे और कभी बहुत कम, जिससे मूल निवासी उनके अन्यायपूर्ण और लालची व्यवहार से दुखी हो जाते थे।
- यूरोपीय लोगों ने रोएदार खाल प्राप्त करने के लिए बहुत बड़ी संख्या में जानवरों का शिकार किया, जिसे देखकर मूल निवासी डर गए थे।
- मूल निवासियों को यह भी भय था कि प्रकृति और जानवर इस विनाश का बदला ले सकते है।
गोल्ड रश' क्या था ? उसके प्रभावों का वर्णन कीजिए
- 1840 में संयुक्त राज्य अमरीका के कैलिफोर्निया में सोने की खोज ने ‘गोल्ड रश’ को जन्म दिया ।
- ‘गोल्ड रश’ वह समय था जब किसी क्षेत्र में सोना मिलने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग अचानक वहाँ पहुँचकर सोना खोजने लगते थे।
- 19वीं सदी में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में गोल्ड रश हुआ।
गोल्ड रश के प्रभावः-
- सोने के कारण नए शहर बसे, व्यापार बढ़ा और खनन उद्योगों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत किया।
- सड़कों, रेल मार्गों, दुकानों, बैंकों और अन्य सुविधाओं का निर्माण हुआ। कई नए शहरों की शुरुआत भी गोल्ड रश से हुई।
- खनन क्षेत्रों में लोगों की भीड़ बढ़ने से मूल निवासियों की भूमि छिनने लगी और प्राकृतिक संसाधन नष्ट हुए। इससे उनकी पारंपरिक जीवन शैली और संस्कृति पर बुरा प्रभाव पड़ा।
- सोना निकालने के लिए जंगल काटे गए, नदियों को मोड़ा गया और मिट्टी व पानी प्रदूषित हुआ, जिससे स्थानीय पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ।
- सोने की लालच के कारण झगड़े, हिंसा, चोरी और आपराधिक घटनाएँ बढ़ गई। कई जगह खान श्रमिको और निवासियों के बीच संघर्ष हुआ।
संयुक्त राज्य अमरीका के मूल बाशिंदों को उनकी जमीन से बेदखल क्यों करा दिया गया ? उसके लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी थे?
संयुक्त राज्य अमेरिका के मूल बाशिंदों को उनकी जमीन से इसलिए बेदखल किया गया, क्योंकि यूरोप से आए लोग वहाँ जमीन और मुनाफा कमाने के मौके ढूँढ रहे थे।
बेदखल होने के कारण :-
- ब्रिटेन और फ्रांस से आए कई प्रवासी अपने देश में संपत्ति के हकदार नहीं थे, इसलिए वे अमेरिका में जमीन के मालिक बनना चाहते थे।
- वे ऐसी फसलें उगाकर मुनाफा कमाना चाहते थे, जो यूरोप में नहीं उगती थीं।
- यूरोपीय लोग यह मानते थे कि मूल निवासी जमीन का “सही उपयोग” नहीं करते, इसलिए उन्हें हटाना गलत नहीं है।
बेदखल करने के तरीके:
- धोखे से उनके समझौते बदल दिए जाते और ज्यादा जमीन ले ली जाती।
- तय किए गए पैसे देने का वादा पूरा नहीं किया जाता।
- जमीन बेचने के समझौते पर हस्ताक्षर कराने के बाद उन्हें जबरदस्ती हटाया जाता।
- चिरोकी क़बीले जैसे समूहों को हटाने के लिए अमेरिकी सेना का इस्तेमाल किया गया।
- जहाँ जमीन में सोना, सीसा या अन्य खनिज मिलते, वहाँ के मूल निवासियों को भी उनकी स्थायी जमीन से धकेल दिया जाता था।
- सन 1970 के दशक में आई बदलाव की लहरों के कारण आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के जीवन पर क्या असर पड़ा ?
- 1970 के दशक में ऑस्ट्रेलिया में आए बदलावों ने मूल निवासियों (Aboriginal people) के जीवन पर कई महत्वपूर्ण प्रभाव डाले। इन बदलावों से उनकी स्थिति पहले की तुलना में काफी सुधरी।
- मूल निवासियों को समान नागरिक अधिकार दिए गए और उन्हें मुख्यधारा समाज का हिस्सा स्वीकार किया जाने लगा।
- कई जगहों पर उनकी पारंपरिक भूमि उन्हें वापस दी गई। ‘लैंड राइट्स मूवमेंट’ के कारण भूमि पर कानूनी अधिकार मिलने लगे।
- वे चुनावों में वोट देने लगे और अपनी बात सरकार तक पहुँचाने के लिए संगठन और आंदोलन खड़े किए।
- सरकार ने उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए विशेष योजनाएँ बनाई, जिससे जीवन स्तर धीरे-धीरे बेहतर हुआ।
- उनकी भाषा, कला, संस्कृति और परंपराओं को सम्मान मिलने लगा और इन्हें राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा माना जाने लगा।
- पहले की तरह नस्लीय भेदभाव खुले रूप में नहीं रहा। समाज में उनके लिए जागरूकता और संवेदना बढ़ी।
आँसुओं की राह क्या है
“आँसुओं की राह” अमेरिका के इतिहास की वह दर्दनाक घटना है जिसमे हज़ारों मूल निवासियों (Native Americans) को उनकी अपनी भूमि से जबरन हटाकर दूर-दराज़ क्षेत्रों में भेजा गया था।
यह घटना कहाँ हुई?
यह घटना 1830 के आसपास अमेरिका में हुई, जब अमेरिकी सरकार ने मूल निवासियों को उनके जंगल और जमीन से हटाकर नए क्षेत्रों में भेज दिया।
यह क्यों कहलाया "आँसुओं की राह"?
क्योंकि इस जबरन विस्थापन के दौरान:-
- लोग भूख से मरे
- बीमारियों से मरे
- ठंड और थकान से मर गए
- परिवार एक-दूसरे से बिछड़ गए
- हज़ारों लोगों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया
इस पूरी यात्रा में इतने आँसू बहाए गए कि इसे प्रतीकात्मक रूप से “Trail of Tears” यानी “आँसुओं की राह” कहा गया।
ncert Class 11 History Chapter 6 Notes in Hindi
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