कक्षा 11 इतिहास अध्याय 5 के नोट्स हिंदी में
बदलती हुई सांस्कृतिक परम्पराएँ notes

यहाँ हम कक्षा 11 इतिहास के 5th अध्याय “बदलती हुई सांस्कृतिक परम्पराएँ” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में “बदलती हुई सांस्कृतिक परम्पराएँ” से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।

ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।

कक्षा 11 इतिहास अध्याय 5 के नोट्स हिंदी में, बदलती हुई सांस्कृतिक परम्पराएँ notes

कक्षा 11 इतिहास अध्याय 5 के नोट्स हिंदी में, बदलती हुई सांस्कृतिक परम्पराएँ notes

class 11 History chapter 5 notes in hindi

पुनर्जागरण का अर्थ

  1. पुनर्जागरण का मतलब है – फिर से सोचने, समझने और आगे बढ़ने की शुरुआत करना।
  2. यह वह समय था जब लोगों ने पुराने अंधविश्वासों और रूढ़ियों को छोड़कर विज्ञान, कला, ज्ञान और तर्क की ओर ध्यान देना शुरू किया।
  3. रेनेसां (पुनर्जागरण) शाब्दिक अर्थ-पुर्नजन्म (सांस्कृतिक बदलाव का काल)

पुनर्जागरण की शुरुआत

  1. इसकी शुरुआत सबसे पहले इटली में हुई थी।
  2. बाद में यह रोम (Rome), वेनिस (Venice) और फ्लोरेंस (Florence) जैसे शहरों में फैल गया।
  3. इस आंदोलन ने लोगों में समानता की भावना जगाई और समाज में फैले अंधविश्वासों व पुराने रिवाजों का विरोध किया।
  4. पुनर्जागरण के समय के साहित्य (literature) ने लोगों की राजनीतिक सोच में बड़ा बदलाव लाया।
  5. इतिहास में इसे पुनर्जन्म, पुनः जागृति, या पुनरुत्थान भी कहा जाता है।
  6. अंग्रेज़ी में इसे रेनेसां कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘फिर से जागना’।

यूरोपीय इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त करने के स्रोत

1. पांडुलिपियाँ :-

जैसे धार्मिक ग्रंथों और विद्वानों की लिखी पुरानी पुस्तिकाएँ।

2. किताबें और ग्रंथ :-

जैसे बाइबिल या वैज्ञानिकों की लिखी पुस्तकें।

3. पत्र और दस्तावेज़ :-

जैसे राजाओं के आदेश-पत्र या व्यापारिक समझौते ।

4. चित्रकला और मूर्तियाँ :-

जैसे लियोनार्डो दा विंची की “मोनालिसा” पेंटिंग।

5. स्मारक और इमारतें :-

जैसे रोम का कोलोसियम या फ्लोरेंस का कैथेड्रल।

6. सिक्के और मुद्राएँ :-

पुराने समय के राजाओं द्वारा चलाए गए सिक्के।

7. पुरातात्विक अवशेष :-

खुदाई में मिले पुराने औज़ार, मिट्टी के बर्तन आदि।

पुनर्जागरण में निम्नलिखित चीजें देखने को मिली

  1. 14वीं-16वीं शताब्दी में शहरों का विकास हुआ।
  2. किताबें अधिक मात्रा में छपने लगीं।
  3. इटली में मानवतावादी विषयों (इतिहास, दर्शन, कविता, व्याकरण आदि) की शुरुआत हुई।
  4. शिष्टाचार, पहनावे और बुद्धिमत्ता पर ध्यान दिया गया।
  5. वैज्ञानिक आविष्कार और कलाकारों की नई रचनाएं हुई।
  6. मध्ययुगीन सोच में बदलाव आया।
  7. स्त्रियों की शिक्षा, स्वतंत्रता और अधिकारों पर चर्चा हुई।

इटली के नगरों का पुनरुत्थान

  1. इटली के शहरों का कमजोर होने के बाद फिर से जीवित, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से विकसित होना।
  2. सरल शब्दों में: शहर जो पहले कमजोर या खंडित हो गए थे, व्यापार, कला और संस्कृति की वजह से फिर से मजबूत और सक्रिय बन गए।

इटली के नगरों का पुनरुत्थान किन-किन चीज़ों में दिखाः-

  1. इटली के शहर यूरोप और एशिया के व्यापार में महत्वपूर्ण हो गए।
  2. चित्रकला, मूर्तिकला और वास्तुकला में नई रचनाएँ हुई।
  3. छोटे-छोटे शहरों ने अपने तरीके से शासन करना शुरू किया।
  4. स्कूल, विश्वविद्यालय और पुस्तको की उपलब्धता बढ़ी।
  5. लोग शिष्टाचार, पहनावा और व्यक्तिगत विकास पर ध्यान देने लगे।
  6. वैज्ञानिक खोजें और तकनीकी प्रगति हुई।

विश्वविद्यालय और मानवतावाद

  1. यूरोप में सबसे पहले विश्वविद्यालय इटली के शहरो में स्थापित हुए ।
  2. 11वी सदी में पादुआ और बोलोनिया विश्व, कानून की पढाई के लिए मशहूर थे ।
  3. व्यापार, वाणिज्य होने के कारण इनकी जरूरत पड़ती थी, और विवाद को सुलझाने के लिए वकीलों की जरूरत पढ़ती थी |
  4. कानून का अध्ययन एक प्रिय विषय बन गया था ।
  5. नई संस्कृति को उन्नीसवीं शताब्दी के इतिहासकारों ने मानवतावाद’ नाम दिया ।
  6. 15वीं शताब्दी के शुरू के दशकों में ‘मानवतावादी’ शब्द उन अध्यापकों के लिए प्रयुक्त होता था जो व्याकरण, अलंकारशास्त्र, कविता, इतिहास और नीतिदर्शन विषय पढ़ते थे।

मानवतावाद (Humanism)

  1. मानवतावाद वह विचारधारा है जिसमें मनुष्य और उसकी क्षमताओं पर ज़ोर दिया जाता है।
  2. इसमें शिक्षा, कला, साहित्य, इतिहास और दर्शन को महत्व दिया गया।
  3. 15वीं सदी में जो अध्यापक ये विषय पढ़ाते थे उन्हें मानवतावादी कहा गया।
  4. इसे मनुष्य की सोच और संस्कृति को विकसित करने वाला आंदोलन भी कहा जा सकता है।
  5. पेट्रार्क को ‘मानवतावाद के पिता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने पादरी के अंधविश्वासों और जीवन शैली की आलोचना की। फ्रांचेस्को पेट्रार्क (1304-1378) इस परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करते थे।

मानवतावाद के विचारों के अभिलक्षण

मनुष्य पर ध्यान -

मनुष्य और उसकी क्षमताओं पर जोर।

शिक्षा का महत्व -

साहित्य, इतिहास, दर्शन और कला को बढ़ावा देना।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता -

सोचने और निर्णय लेने की स्वतंत्रता।

सांस्कृतिक विकास -

कला, कविता, वास्तुकला और संगीत में नवाचार।

धार्मिक आलोचना -

अंधविश्वास और कट्टर धार्मिक प्रथाओं की आलोचना।

प्राचीन संस्कृतियों का अध्ययन -

रोमन और ग्रीक साहित्य, कला और दर्शन को महत्व देना।

व्यावहारिक जीवन पर जोर -

केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सांसारिक जीवन और सामाजिक उत्तरदायित्व पर ध्यान।

विज्ञान और दर्शन-अरबों का योगदान

  1. मध्यकाल में ईसाई विद्वान यूनानी और रोमन ग्रंथों को जानते थे, पर उनका प्रचार-प्रसार नहीं किया।
  2. अरब अनुवादकों ने अतीत की पांडुलिपियों का संरक्षण और अनुवाद सावधानीपूर्वक किया था
  3. 14वीं सदी में यूरोपीय विद्वानों ने अरब अनुवादों से यूनानी दर्शन पढ़ा।
  4. यूनानी और अरब विद्वानों ने एक-दूसरे की रचनाओं का अनुवाद किया।
  5. ये ग्रंथ विज्ञान, गणित, खगोल, औषधि और रसायन से संबंधित थे।
  6. इनसे मानवतावादी विचारों का विकास हुआ।
  7. बाद में मानवतावादी विषय स्कूलों में पढ़ाए जाने लगे।
  8. यह परिवर्तन पूरे यूरोप में फैल गया।

कलाकार और यथार्थवाद

  1. पुनर्जागरण काल में कलाकारों ने यथार्थ (Reality) को दिखाने पर ज़ोर दिया।
  2. चित्रों में मानव भावनाएँ, शरीर की बनावट और प्राकृतिक दृश्य वास्तविक रूप में दिखाए गए।
  3. कलाकारों ने प्रकाश और छाया (Light & Shadow) का प्रयोग शुरू किया।
  4. लियोनार्डो दा विंची, माइकल एंजेलो, और राफेल जैसे कलाकार प्रसिद्ध हुए।
  5. चित्रकला, मूर्तिकला और स्थापत्य कला में मानवता और प्रकृति को प्रमुख स्थान मिला।
  6. यथार्थवाद ने धार्मिक विषयों से हटकर मनुष्य और उसके जीवन को केंद्र में रखा।
  7. यथार्थवाद का मतलब है वास्तविक चीज़ों, घटनाओं और लोगों को जैसा है वैसा ही दिखाना, बिना किसी कल्पना, बढ़ा-चढ़ा कर बताना।

इटली की वास्तुकला

  1. पुनर्जागरण काल में इटली की वास्तुकला ने यूनानी और रोमन शैलियों को अपनाया।
  2. गुम्बद (Dome), खंभे (Columns), और मेहराब (Arches) का इस्तेमाल बढ़ा।
  3. वास्तुकला में सादगी, संतुलन और proportional design पर जोर दिया गया।
  4. प्रसिद्ध वास्तुकारः बुनलेस्की (Brunelleschi) – फ्लोरेंस का डोम,
  5. माइकल एंजेलो – सिस्टिन चैपल की छत।
  6. इमारतों में धार्मिक और शाही भवन दोनों बनाए गए।
  7. वास्तुकला ने कला और मानवतावाद का संगम दिखाया।
  8. इटली की वास्तुकला ने पुरानी रोमन शैली से प्रेरणा लेकर संतुलित और सुंदर इमारतें बनाई, जो पुनर्जागरण की सोच को दिखाती हैं।

दस्तावेजों का दस्तावेज

  1. इसे “इंडुलजेंस” कहा जाता है।
  2. यह चर्च द्वारा जारी किया गया पत्र होता है।
  3. जो भी व्यक्ति इसे खरीदता या प्राप्त करता, उसे अपने पापों की सजा से मुक्ति मिलने का वादा किया जाता।
  4. यानी, यह पाप माफ करने का प्रमाण-पत्र होता था।

प्रथम मुद्रित पुस्तकें

  1. प्रिंटिंग प्रेस से पहले किताबें हाथ से लिखी जाती थीं और बहुत कम प्रतियाँ बनती थीं।
  2. 1455 ई. में जर्मन जोहानेस गुटेनबर्ग ने पहला छापाखाना(Printing Press) बनाया।
  3. उन्होंने अपनी कार्यशाला में बाइबिल की 150 प्रतियाँ छापीं।
  4. पहले जितने समय में एक साधु एक प्रति लिखता था, अब 150 प्रतियाँ छपने लगी।
  5. 1477 में कैक्सटन ने इंग्लैंड में पहला प्रिंटिंग प्रेस लगाया।
  6. प्रिंटिंग प्रेस से पुस्तकें सस्ती और आसानी से उपलब्ध होने लगीं।
  7. शिक्षा का प्रसार हुआ और लोगों में पढ़ने की आदत बढ़ी।
  8. अब विचार और ज्ञान बहुत तेज़ी से फैलने लगे।

लियोनार्डो दा विन्सी (Leonardo da Vinci)

  1. लियोनार्डो दा विन्सी एक महान कलाकार और वैज्ञानिक थे।
  2. उन्हें कला, गणित, शरीर रचना और वनस्पति विज्ञान में बहुत रुचि थी।

उन्होंने दो प्रसिद्ध पेंटिंग बनाई -

  1. मोना लिसा (Mona Lisa)
  2. द लास्ट सपर (The Last Supper)

वे पुनर्जागरण काल के सबसे बुद्धिमान और बहुमुखी व्यक्ति माने जाते हैं।

महिलाओं की आकांक्षाएँ

  1. सार्वजनिक जीवन में पुरुषों का पूर्ण प्रभुत्व था।
  2. शिक्षा सिर्फ लड़कों को दी जाती थी, ताकि वे पारिवारिक काम संभाल सकें।
  3. महिलाओं को घर तक सीमित रखा गया और निर्णयों में भाग नहीं दिया गया।
  4. व्यापारी परिवारों में महिलाएँ दुकानों और कारोबार में पति की मदद करती थीं।
  5. जब पति व्यापार के लिए दूर जाते, तो पत्नियाँ कारोबार संभालती थीं।

कुछ महिलाएँ शिक्षित और प्रभावशाली भी थीं :-

  • कसांद्रा फेडले: यूनानी और लातिनी भाषा की विद्वान ।
  • इसाबेला दी इस्तेः पति की अनुपस्थिति में राज्य पर शासन किया।

गैलीलियो (Galileo Galilei)

  1. गैलीलियो इटली के महान वैज्ञानिक थे।
  2. उन्होंने दूरबीन (Telescope) का निर्माण किया।
  3. उन्होंने खगोलशास्त्र के कई रहस्यों का पता लगाया।
  4. उन्होंने बताया कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है।
  5. एंड्रियास वेसेलियस (Andreas Vesalius)
  6. वे बेल्जियम के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और पादुआ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे।
  7. उन्होंने सबसे पहले मानव शरीर की चीर-फाड़ (Dissection) कर उसका अध्ययन किया।
  8. वे आधुनिक शरीर रचना विज्ञान (Anatomy) के संस्थापक माने जाते हैं।

इस्लामी वास्तुकला

  1. इस्लामी वास्तुकला की शुरुआत 7वीं सदी में हुई।
  2. इसमें गुंबद (Domes), मेहराब (Arches) और मीनारों (Minarets) का प्रमुख उपयोग होता था।
  3. इमारतों में समानता, संतुलन और सुंदर सजावट दिखाई देती थी।
  4. ज्यामितीय आकृतियाँ और सुंदर नक्काशी (Calligraphy) इसका खास हिस्सा थीं।
  5. मस्जिदें, मकबरे और महल इस शैली के प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रसिद्ध उदाहरण :-

  1. जेरूसलम की डोम ऑफ द रॉक
  2. भारत में ताजमहल

ईसाई धर्म के अंतर्गत वाद-विवाद

  1. पुनर्जागरण काल में लोगों की सोच बदलने लगी- अब वे चर्च के आदेशों पर सवाल उठाने लगे।
  2. चर्च बहुत शक्तिशाली हो गया था और वह लोगों से “इंडुलजेंस” (पाप मुक्ति पत्र) के नाम पर पैसे लेता था, जिससे कहा जाता था कि व्यक्ति के पाप माफ हो जाएंगे।
  3. लोगों को यह अन्यायपूर्ण और गलत लगा क्योंकि धर्म का उद्देश्य पैसे से मुक्ति पाना नहीं था।
  4. माटिन लूथर, जो एक ईसाई पादरी और विद्वान थे, उन्होंने खुलकर कहा कि भगवान में सच्ची आस्था और अच्छे कामों से ही मुक्ति मिलती है, न कि चर्च या पैसों से।
  5. लूथर ने चर्च की गलत नीतियों का विरोध किया और अपने विचारों को लोगों तक पहुँचाया।
  6. इससे कैथोलिक चर्च और नए सुधारकों के बीच बड़ा विवाद शुरू हो गया।
  7. इस आंदोलन को ही आगे चलकर धार्मिक सुधार आदोलन कहा गया।

इसके परिणाम:-

  1. धार्मिक सुधार आंदोलन शुरू हुआ लोगों ने चर्च की गलतियों का विरोध किया।
  2. प्रोटेस्टेंट धर्म की शुरुआत हुई – मार्टिन लूथर और उनके अनुयायियों ने नया मत बनाया।
  3. कैथोलिक चर्च की शक्ति घट गई – अब उसका समाज और राजनीति पर कम असर रहा।
  4. शिक्षा और स्वतंत्र सोच बढ़ी – लोग खुद बाइबिल पढ़ने और समझने लगे, जिससे तर्कशील सोच विकसित हुई।

कोपरनिकीय क्रांति

1.पुरानी मान्यताः-

ईसाई धर्म के अनुसार माना जाता था कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में स्थिर है,और सूर्य व अन्य ग्रह पृथ्वी के चारों ओर घूमते हैं।

2. कोपरनिकस की खोज:-

  • पोलैंड के वैज्ञानिक निकोलस कोपरनिकस ने इस धारणा को गलत साबित किया।
  • उन्होंने बताया कि पृथ्वी और अन्य ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं।
  • यह विचार उस समय क्रांतिकारी था।

3. धार्मिक विरोध का डरः-

  • कोपरनिकस स्वयं एक निष्ठावान ईसाई थे,
  • लेकिन उन्हें डर था कि उनकी खोज से चर्च के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
  • इसलिए उन्होंने अपनी खोज को जीवन के अंतिम समय में प्रकाशित किया।

4. परिणाम और प्रभावः-

  • शुरुआत में लोगों ने इस सिद्धांत को नहीं माना, पर बाद में गैलीलियो गैलिली जैसे वैज्ञानिकों ने इसे प्रमाणों के साथ सिद्ध किया।
  • इससे विज्ञान में नई सोच की शुरुआत हुई और धार्मिक मान्यताओं पर वैज्ञानिक तर्क हावी होने लगे।

चौदहवीं सदी में यूरोप में पुनर्जागरण

अर्थः-

  1. पुनर्जागरण का मतलब है ‘पुनर्जन्म’। यह युग पुरानी मध्ययुगीन सोच से हटकर नई सोच, कला और ज्ञान को बढ़ावा देने वाला था।
  2. इसका आरंभ इटली के शहरों जैसे फ्लोरेंस, वेनिस और रोम में हुआ।

मनवतावादः-

लोगों का ध्यान धर्म से हटकर मानव और उसकी क्षमताओं पर केंद्रित हुआ।

कला और वास्तुकलाः-

चित्रकला, मूर्तिकला और भवन निर्माण में यथार्थवाद और सौंदर्य की नई शैली आई।

विज्ञान और खोज:-

खगोलशास्त्र, गणित, रसायन और चिकित्सा में नई खोजें हुई।

शिक्षा और पुस्तकों का प्रसारः-

प्रिंटिंग प्रेस के कारण ज्ञान तेजी से फैला, और पढ़ने-लिखने की आदत बढ़ी।

सामाजिक प्रभावः-

अंधविश्वासों पर कमी आई, लोगों में तर्कशीलता और स्वतंत्र सोच बढ़ी।

  • पुनर्जागरण ने यूरोप को सांस्कृतिक, शैक्षिक और वैज्ञानिक रूप से नया जीवन दिया।

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