कक्षा 11 इतिहास अध्याय 3 के नोट्स हिंदी में
यायावर साम्राज्य notes

यहाँ हम कक्षा 11 इतिहास के 3rd अध्याय “यायावर साम्राज्य” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में “यायावर साम्राज्य” से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।

ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।

कक्षा 11 इतिहास अध्याय 3 के नोट्स हिंदी में, यायावर साम्राज्य notes

कक्षा 11 इतिहास अध्याय 3 के नोट्स हिंदी में, यायावर साम्राज्य notes

class 11 History chapter 3 notes in hindi

यायावर साम्राज्य

  1. यायावर साम्राज्य” (Nomadic Empire) की बात अजीब लगती है, क्योंकि यायावर लोग मूल रूप से घुमक्कड़ होते हैं, यानी एक जगह टिक कर नहीं रहते।
  2. लेकिन मध्य एशिया के मंगोलों ने इस धारणा को बदल दिया।
  3. उन्होंने एक बहुत बड़ा साम्राज्य बनाया जो कई महाद्वीपों तक फैला हुआ था।
  4. साथ ही, उन्होंने शक्तिशाली सेना और अच्छे शासन की पद्धतियाँ भी शुरू की।

यायावर समाजों के ऐतिहासिक स्त्रोत :-

1. इतिवृत :-

पुराने इतिहासकारों द्वारा लिखे गए विवरण।

2. यात्रा वृतांत :-

यात्रियों द्वारा लिखे गए अनुभव, जो यायावरों की जीवनशैली बताते हैं।

3. नगरीय साहित्यकारों के दस्तावेज :-

शहरों में रहने वाले लेखकों ने यायावर समाज पर जो लिखा।

4. अन्य विदेशी स्रोत :-

इतालवी, लैटिन, फ्रेंच और रूसी भाषा के स्रोतों से भी मंगोल साम्राज्य के विस्तार की जानकारी मिलती है।

निष्कर्ष :-

यायावरों ने खुद भले कम लिखा हो, लेकिन उनके बारे में दूसरों ने जो लिखा, वही हमारे लिए मुख्य स्रोत हैं।

मध्य एशिया के यायावर साम्राज्य की विशेषताएँ :-

1. स्थापना:-

13वीं और 14वीं सदी में चंगेज खान के नेतृत्व में ये यायावरों ने एक बड़ा साम्राज्य बनाया था।

2. साम्राज्य का विस्तार :-

उनका साम्राज्य यूरोप और एशिया तक फैला हुआ था, यानी बहुत बड़ा था।

3. जीवनशैली:-

खेती पर निर्भर चीन के साम्राज्य की तुलना में, मंगोल यायावर लोग सरल और सादा जीवन बिताते थे ज़्यादा जटिल या कठिन जीवन में नहीं रहते थे।

4. प्रभाव और संपर्क:-

ये यायावर लोग अलग-थलग नहीं थे। वे दुनिया के कई देशों से जुड़े हुए थे, उन पर असर डालते थे और उनसे बहुत कुछ सीखते भी थे।

मंगोलों की सामाजिक स्थिति

  1. मंगोल समाज में कई तरह के लोग थे – जैसे पशुपालक और शिकारी-संग्राहक।
  2. पशुपालक लोग घोड़े, भेड़ और ऊँट पालते थे।
  3. वे मध्य एशिया के घास के मैदानों (GRASSLANDS) में रहते थे।
  4. वहां छोटे-छोटे जानवरों का शिकार भी किया जाता था। शिकारी-संग्राहक लोग साइबेरिया के जंगलों में रहते थे और आमतौर पर पशुपालकों से ज्यादा गरीब होते थे।
  5. कुछ क्षेत्रों में थोड़ी-बहुत खेती संभव थी, लेकिन मंगोलों ने खेती को अपनाया नहीं।
  6. वे अपनी रक्षा और हमलों के लिए परिवारों और कुलों का समूह बनाकर रहते थे।
  7. मंगोल लोग अक्सर पशुओं की लूट और चारागाह (घास के मैदान) पाने के लिए आपस में युद्ध भी करते थे।

बर्बर (Barbaros)

‘बर्बर’ शब्द यूनानी भाषा के ‘बारबरोस’ (BARBAROS) शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है – गैर-यूनानी लोग या ऐसे लोग जो यूनानी भाषा और संस्कृति से अलग थे।

मंगोलों के सैनिक प्रबंधन की विशेषताएँ

  1. मंगोल सेना का प्रत्येक सदस्य एक स्वस्थ, व्यस्क और हथियारबंद घुड़सवार होता था।
  2. सेना में विभिन्न जातियों और जनजातियों के सैनिक शामिल थे।
  3. उनकी सेना में तुर्की मूल के लोग और केराईट जनजाति के सदस्य भी शामिल थे।
  4. मंगोल सेना को स्टेपी क्षेत्र की पुरानी दशमलव प्रणाली के आधार पर संगठित किया गया था।
  5. मंगोल जनजातीय समूहों को तोड़कर, उन्हें नई सैनिक इकाइयों में बाँटा गया।
  6. सेना की सबसे बड़ी इकाई में लगभग 10,000 सैनिक होते थे, जिसे तुमन (TUMEN) कहा जाता था।

तेरहवीं शताब्दी में मंगोलों के शासन की विशेषताएं

1. एकता और विस्तार :-

तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक मंगोल एक एकजुट ताकत के रूप में उभरे और उन्होंने ऐसा विशाल साम्राज्य बनाया जो दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा था।

2. शहरी समाजों पर शासन :-

मंगोलों ने उन जटिल शहरी समाजों पर शासन किया, जिनकी अपनी अलग संस्कृति, इतिहास और कानून थे।

3. राजनीतिक प्रभुत्व :-

मंगोलों ने अपने साम्राज्य के अलग-अलग हिस्सों पर राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखा।

4. संख्यात्मक रूप से कम :-

हालांकि उनका प्रभुत्व था, फिर भी मंगोल संख्या में बहुत कम (अल्पसंख्यक) थे।

चंगेज खान

  1. चंगेज खान का जन्म 1162 ईस्वी में मंगोलिया में हुआ था। उनका असली नाम तेमुजिन था।
  2. साल 1206 में उन्होंने अपने शक्तिशाली विरोधियों, जमूका और नेमन, को हराकर स्टेपी क्षेत्र की राजनीति में सबसे ताकतवर नेता बन गए।
  3. इसके बाद उन्हें चंगेज खान (जिसका मतलब होता है ‘सर्वशक्तिमान शासक’ या ‘महान सम्राट’) की उपाधि मिली।
  4. वे मंगोलों के सबसे बड़े नेता और महानायक घोषित किए गए।

चंगेज खान और मंगोलों का विश्व इतिहास में स्थान :-

  1. चंगेज खान मंगोलों के लिए एक महान नेता थे।
  2. उन्होंने मंगोलों को एकजुट किया और उन्हें मजबूत बनाया।
  3. चंगेज खान ने मंगोलों को चीनी शासकों के शोषण से आज़ाद कराया।
  4. उन्होंने एक बड़ा पारमहाद्वीपीय साम्राज्य बनाया, जो कई देशों में फैला था। उन्होंने व्यापार के रास्ते और बाजारों को फिर से स्थापित किया।
  5. उनका शासन बहुजातीय (कई जातियों का), बहुभाषी (कई भाषाओं का) और बहुधार्मिक (कई धर्मो का) था।
  6. आज मंगोलिया एक स्वतंत्र देश है और चंगेज खान को एक महान राष्ट्रनायक और सम्मानित व्यक्ति माना जाता है।

चंगेज खान की सैनिक उपलब्धियां

1. कुशल घुड़सवार सेना :-

उनकी सेना तेज़ और फुर्तीले घुड़सवारों से बनी थी।

2. तीरंदाजी का अद्भुत कौशल :-

सैनिक चलते घोड़ों पर भी सटीक तीर चला लेते थे।

3. मौसम की जानकारी :-

वे मौसम और इलाके का उपयोग युद्ध में रणनीति के तौर पर करते थे।

4. घेरा बंदी की नीति :-

दुश्मन के किले या शहर को चारों ओर से घेरकर उन्हें कमजोर करते थे।

5. नेफ्था बमबारी की शुरुआत :-

उन्होंने आग लगाने वाले नेफ्था बमों का प्रयोग युद्ध में शुरू किया।

6. हल्के चल उपरस्करों का निर्माण :-

उन्होंने ऐसे हथियार और उपकरण बनाए जो हल्के और आसानी से ले जाने योग्य थे।

मंगोलों के लिए चंगेज़ खान की उपलब्धियाँ:-

चंगेज़ खान मंगोलों के इतिहास का सबसे महान शासक माना जाता है। उसकी प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं:

1. मंगोलों को एकजुट किया :-

उसने मंगोल कबीलों को आपसी झगड़ों और बाहरी शोषण से मुक्त कर एकजुट किया।

2. एक बड़ा साम्राज्य बनाया :-

चंगेज़ खान ने मंगोलों को एक ताकतवर और समृद्ध राष्ट्र बनाया और एक बहुत बड़ा साम्राज्य खड़ा किया जो कई महाद्वीपों में फैला था।

3. व्यापार को बढ़ावा दिया :-

उसने पुराने व्यापारिक रास्तों और बाज़ारों को दोबारा शुरू किया, जिससे दूर-दूर से यात्री और व्यापारी (जैसे वेनिस का मार्को पोलो) वहाँ आने लगे।

4. दृष्टिकोण का असर :-

चंगेज़ खान को लेकर अलग-अलग लोगों की राय होती है – कुछ उसे महान शासक मानते हैं तो कुछ अत्याचारी। यह फर्क इस बात पर निर्भर करता है कि लोग किस नजरिए से उसे देखते हैं। इससे ये बात समझ आती है कि एक प्रभावशाली सोच या विचार, बाकी सभी विचारों को पीछे छोड़ सकता है।

चंगेज खान के वंशजों की उपलब्धियाँ :-

  1. मंगोल शासकों ने सभी जाति और धर्म के लोगों को अपने प्रशासन और सेना में जगह दी।
  2. उनका शासन कई जाति, भाषा और धर्म के लोगों का था, और उन्होंने सबके लिए नियम बनाए, जिससे सबको बराबरी का मौका मिला।
  3. वे अलग-अलग समुदायों को मिलाकर एक बड़ा और मजबूत साम्राज्य बनाना चाहते थे।

यास (YASSA)

  1. ‘यास’ (जिसे प्रारंभ में “यसाक” कहा जाता था)
  2. एक प्रकार का कानूनी संहिता (Law Code) था।
  3. इसे चंगेज़ खान ने सन् 1206 ई. में ‘कुरिलताई’ (मंगोलों की एक विशेष सभा) में लागू किया था।

'यास' का अर्थ :-

‘यास’ शब्द का मतलब था -कानून,आदेश,शासन संबंधी नियम,या फरमान।

यास में क्या-क्या शामिल था ?

यास में ऐसे नियम और आदेश शामिल थे जो मंगोल साम्राज्य को सुव्यवस्थित बनाने के जरूरी थे।जैसे:

1. प्रशासनिक नियम

राज्य संचालन के लिए नियम बनाए गए।

2. आखेट (शिकार) के नियम

शिकार के समय किस तरह का अनुशासन हो, इस पर भी नियम बनाए गए।

3. सैन्य व्यवस्था

सेना का गठन, अनुशासन और संचालन से संबंधित निर्देश शामिल थे।

4. डाक प्रणाली

एक तेज़ और संगठित डाक व्यवस्था (जिसे याम कहा जाता था) स्थापित की गई थी

5. धार्मिक सहिष्णुता

यास में यह भी कहा गया कि सभी धर्मों का सम्मान किया जाए।

मंगोल शासन व्यवस्था में 'यास' की भूमिका

1. साम्राज्य को एकजुट किया :-

यास ने मंगोलों को एकजुट किया और 13वीं शताब्दी तक एक विशाल साम्राज्य की नींव रखी।

2. शासक वर्ग की पहचान बनी रही :-

मंगोलों की संख्या कम थी, लेकिन उन्होंने यास को एक पवित्र नियम बताकर अपनी कबीलाई पहचान और शासकीय अधिकार बनाए रखे।

3. चंगेज खान की विरासत :-

यास को चंगेज खान की बनाई कानूनी परंपरा मानकर बाद के मंगोल शासकों ने भी इसका पालन किया और से लोगों पर लागू किया।

4. धार्मिक और सांस्कृतिक एकता :-

यास में विश्वास रखने वाले मंगोलों को एक सूत्र में बांधा गया, जिससे उनकी एकता बनी रही।

5. विजित क्षेत्रों में शासन :-

यास के कारण मंगोलों को अन्य देशों और लोगों पर शासन करने का आत्मविश्वास मिला।

6. विश्वव्यापी साम्राज्य की रचना में सहायक :-

यास की वजह से मंगोलों ने एक संगठित और स्थायी वैश्विक साम्राज्य खड़ा किया।

मंगोल साम्राज्य का पतन

1. जनसंख्या में कमी और सभ्यता में पिछड़ापन :-

मंगोलों की संख्या बहुत कम थी और वे अपनी प्रजा की तुलना में कम सभ्य थे।

2. विजित सभ्यताओं में घुल-मिल जाना :-

मंगोलों ने विजित देशों की भाषा, संस्कृति और तौर तरीके अपनाए, जिससे उनकी अलग पहचान खो गई।

3. आपसी कलह :-

चंगेज खान की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों में सत्ता के लिए संघर्ष शुरू हो गया जिससे साम्राज्य टुकड़ों में बंट गया।

4. धर्म परिवर्तन :-

मंगोल शासकों ने इस्लाम, बौद्ध और ईसाई धर्म अपनाए, जिससे धार्मिक एकता समाप्त हो गई।

5. प्रशासनिक अनुभव की कमी :-

मंगोल योद्धा तो अच्छे थे, लेकिन उन्हें स्थायी प्रशासन चलाने का अनुभव नहीं था।

6. स्थानीय विद्रोह :-

कमजोर होते मंगोल शासन के खिलाफ कई स्थानों पर स्थानीय विद्रोह हुए।

चंगेज़ खान की हरकारा पद्धति

चंगेज़ खान ने अपने विशाल साम्राज्य के दूर-दराज़ इलाकों से संपर्क बनाए रखने के लिए एक तेज़ और सुरक्षित (हरकारा पद्धति) डाक प्रणाली) शुरू की थी। इसे “याम प्रणाली” कहा जाता था।

इसकी प्रमुख विशेषताएँ थीं:-

1. संचार के लिए तेज़ व्यवस्थाः-

पूरे साम्राज्य में एक हरकारा नेटवर्क बनाया गया, जिससे सूचना बहुत तेज़ी से भेजी जा सकती थी।

2. चौकियों की स्थापना:-

हर कुछ दूरी पर डाक चौकियाँ (पोस्ट स्टेशन) बनाई गई, जहाँ घुड़सवार संदेशवाहक (हरकारे) और स्वस्थ व तेज़ घोड़े तैयार रहते थे।

3. घोड़ों और जानवरों का योगदान :-

मंगोल लोग अपने घोड़ों या अन्य पशुओं का दसवाँ हिस्सा (कुबकुर) सरकार को देते थे, ताकि डाक सेवा के लिए हमेशा पशु उपलब्ध रहें।

4. दिन-रात सेवा :-

यह हरकारा प्रणाली 24 घंटे काम करती थी, जिससे शासक को तुरंत सूचना मिल सकती थी।

5. सैन्य और प्रशासनिक उद्देश्य :-

यह प्रणाली न केवल सामान्य समाचारों के लिए, बल्कि सेना के आदेश और राज्य की निगरानी के लिए भी बहुत उपयोगी थी।

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