कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान Book 2 अध्याय 1 के नोट्स हिंदी में
विकास notes
यहाँ हम कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान के 1st अध्याय “संसाधन एवं विकास” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में “संसाधन एवं विकास” से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान Book 2 अध्याय 1 के नोट्स हिंदी में, विकास notes

class 10 Social science Book 2 chapter 1 notes in hindi
अर्थव्यवस्था
एक ढाँचा जिसके अन्तर्गत लोगों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
आर्थिक विकास
यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक अर्थ व्यवस्था की ‘प्रति व्यक्ति आय’ लम्बे समय तक बढ़ती रहती है।
विकास का अर्थ
- विकास किसी देश के सर्वांगीण विकास जैसे आर्थिक समानता, सुरक्षा, स्वतन्त्रता आदि पर निर्भर करता है। विकास का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है।
- लोगों के विकास के लक्ष्य भिन्न भिन्न हो सकते है।
- जैसे- किसी गाँव के किसान की जमीन से रोड के गुजर जाने पर, उस गाँव का विकास हो गया परन्तु किसान का विकास नहीं हो पाया।
आय तथा अन्य लक्ष्य
- आय विकास का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। इससे लोग, स्वतन्त्रता, सुरक्षा, रोजगार, शान्ति तथा आदर मिलने, की इच्छा भी प्राप्त करते हैं।
- विश्व बैंक की विश्व विकास रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में प्रति व्यक्ति आय $49300 प्रतिवर्ष वाला देश विकसित देश कहलाएगा। जिस देश में प्रति व्यक्ति आय $2500 प्रतिवर्ष से कम है वह निम्न आय वाला देश कहलाएगा।
- UNDP : United Nations Development Program संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, के अनुसार निम्न आय विकसित देश वह देश जिस देश में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य बेहतर हो।
प्रतिव्यक्ति आय/औसत आय
- देश की कुल आय को कुल जनसंख्या द्वारा विभाजित करके प्रतिव्यक्ति आय ज्ञात की जाती है। इसे औसत आय भी कहते हैं।
- विश्व विकास रिपोर्ट 2019 के अनुसार, भारत में प्रति व्यक्ति आय सालाना $ 6700 है। वर्तमान (2025) में भारत में प्रति व्यक्ति आय सालाना $ 2850 है।
- नोट : अधिक प्रतिव्यक्ति आय वाले देश को समृद्ध तथा कम प्रतिव्यक्ति आय वाले देश को कम आय वाला देश कहा जाता है। इसमें भारत को मध्यम आय वाले देश के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
शिशु मृत्यु दर
- प्रति 1,000 जीवित जन्में बच्चों में एक वर्ष से कम आयु में होने वाली मौतों की संख्या है।
- शिशु मृत्यु दर एक पैमाना है जिससे किसी देश या राज्य के विकास का पता चलता है
- शिशु मृत्यु दर = एक वर्ष से कम आयु के मृत शिशुओं की संख्या/कुल जीवित शिशुओं की संख्या × 1000
पुरुष व महिलाओं का अनुपात
- प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या लिंगानुपात कहलाता है।
- 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का लिंगानुपात 943 है। अर्थात यहाँ प्रति 1000 पुरुषों पर 943 महिलाएं हैं।
साक्षरता दर
7 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में साक्षर जनसंख्या का अनुपात साक्षरता दर कहलाता है। भारत में में पुरुषों की साक्षरता दर (82.14) है वहीं महिलाओं में इसका प्रतिशत केवल 65.46 है।
निवल उपस्थिति अनुपात
14-15 वर्ष की आयु के स्कूल जाने वाले कुल बच्चों का उस आयु वर्ग के कुल बच्चों के साथ प्रतिशत निवल उपस्थिति अनुपात कहलाता है।
निवल उपस्थिति सार्वजनिक सुविधाएँ
- लोग अधिक औसत आय से सामान्य जीवन के लिए आवश्यक वस्तुएँ नहीं प्राप्त कर सकते।
- जैस :- मुद्रा से प्रदूषण मुक्त वातावरण नहीं खरीद सकते, इसलिए सार्वजनिक सुविधाएँ भी जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण होती हैं।
- केरल में शिशु मृत्यु दर कम है, क्योंकि यहाँ स्वास्थ्य और शिक्षा की मौलिक सुविधाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं राशनिंग
- सार्वजनिक वितरण के अन्तर्गत आवश्यक वस्तुओं को न्यूनतम मूल्य पर लोगों को उपलब्ध कराया जाता है।
- सरकार द्वारा नियन्त्रित मूल्य तथा मात्रा में वस्तुओं की आपूर्ति करना राशनिंग कहलाता है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली
तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों में खाद्यान्न की आपूर्ति के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक विकसित है जबकि झारखण्ड में ऐसी प्रणाली अधिक विकसित नहीं है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के उद्देश्य
- साधारण व्यक्ति को महँगाई से बचाना।
- देश में सामाजिक कल्याण को प्राप्त करना।
- प्राकृतिक आपदाओं; जैसे-बाढ़, सूखे जैसी स्थिति में खाद्य-पदार्थ उपलब्ध कराना।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभ
- देश के गरीब लोगों को आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध हो जाती हैं।
- वस्तुओं के मूल्य को नियन्त्रित करना सम्भव होता है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कमियाँ
- भ्रष्टाचार इसके सबसे बड़े दोष में शामिल है।
- अकुशल प्रबन्धन के कारण भारी राजस्व की हानि होती है।
- यह राजकोषीय घाटे में वृद्धि करती है।
- उचित नियन्त्रण के अभाव में यह बोझिल हो रही है।
- वर्तमान समय में संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग के अभाव में यह धन और संसाधन की बर्बादी कर रही है।
- इससे देश में समाजवादी तथा लोकतान्त्रिक प्रणाली की स्थापना होती है।
शरीर द्रव्यमान सूचकांक : BMI (Body Mass Index)
- अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वयस्क व्यक्ति कुपोषित है या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए शरीर द्रव्यमान सूचकांक का प्रयोग किया जाता है। इसे ज्ञात करने के लिए व्यक्ति के भार को लम्बाई के वर्ग से भाग देने पर प्राप्त किया जाता है।
- शरीर द्रव्यमान सूचकांक (BMI) = व्यक्ति का भार (किग्रा में) / लम्बाई ² (मीटर में)
मानव विकास रिपोर्ट विकास को मापने के लिए सर्वोत्तम तरीका
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा प्रकाशित मानव विकास रिपोर्ट विकास को मापने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। यह तीन मानदण्डों पर आधारित है-
- प्रतिव्यक्ति आय
- स्वास्थ्य की स्थिति
- लोगों का शैक्षिक स्तर
विश्व में मानव विकाश सूचकांक
- मानव विकास रिपोर्ट, 2022 के अनुसार भारत का स्थान 132वाँ है।
- मानव विकास सूचकांक, विकास को समझने का एक प्रयास है।
सतत् विकास (विकास की धारणीयता)
विकसित और विकासशील देशों का आर्थिक विकास प्राकृतिक संसाधनों तथा पर्यावरण के आधार पर किया गया।
पर्यावरण गिरावट और सतत् विकास
सतत् विकास प्राकृतिक संसाधनों के सन्तुलित उपयोग के साथ न्यूनतम स्तर पर संसाधनों का उपयोग करने पर बल देता है।
पर्यावरण गिरावट को निम्न रूप में देख सकते हैं-
- भारत के भू-जल के अति उपयोग के रूप में।
- प्राकृतिक संसाधनों के ह्रास के रूप में।
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