Class11 History Chapter 7 Notes in Hindi
आधुनिकीकरण के रास्ते notes

यहाँ हम कक्षा 11 इतिहास के 7th अध्याय “आधुनिकीकरण के रास्ते” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में “आधुनिकीकरण के रास्ते” से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।

ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।

आधुनिकीकरण के रास्ते Notes, Class11 History Chapter 7 Notes in Hindi

आधुनिकीकरण के रास्ते Notes, Class11 History Chapter 7 Notes in Hindi

कक्षा 11 इतिहास अध्याय 7 के नोट्स हिंदी में

जापान की भौगोलिक विशेषताएं

  1. जापान एक द्वीप-श्रृंखला वाला देश है।
  2. इसके चार सबसे बड़े द्वीप होंशु, होक्काइदो, क्यूशू और शिकोकू हैं।
  3. जापान की 50 प्रतिशत से अधिक भूमि पर्वतीय है।
  4. जापान विश्व के सबसे अधिक सक्रिय भूकंप क्षेत्रों में से एक में स्थित है।
  5. इन भौगोलिक परिस्थितियों ने जापान की वास्तुकला और भवन निर्माण शैली को प्रभावित किया है।
  6. जापान की अधिकांश जनसंख्या जापानी है, लेकिन यहाँ आइनू जैसे अल्पसंख्यक समुदाय तथा कुछ कोरियाई मूल के लोग भी रहते हैं, जिन्हें उस समय श्रमिकों के रूप में लाया गया था जब कोरिया जापान का उपनिवेश था।
  7. जापान में पशुपालन की परंपरा बहुत सीमित रही है।
  8. चावल जापान की प्रमुख खाद्य फसल है और मछली प्रोटीन का मुख्य स्रोत है।

जापान ने इन सबको हराया :-

  1. ताइवान पर कब्जा (1895)
  2. कोरिया पर कब्जा (1910)
  3. चीन को हराया (1894)
  4. रूस को हराया (1905)

द्वितीय विश्व युद्ध 1939-45-1945 में जापान के दो शहर हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया।

जापान की राजनीतिक व्यवस्था

  1. जापान पर क्योटो में निवास करने वाले सम्राट का औपचारिक शासन हुआ करता था।
  2. लेकिन 12वीं सदी तक आते-आते वास्तविक सत्ता शोगुनों के हाथों में आ गई, जो सम्राट के नाम पर शासन करते थे।
  3. 1603 से 1867 तक तोकुगावा परिवार के सदस्य शोगुन पद पर बने रहे।
  4. उस समय जापान लगभग 250 क्षेत्रों में विभाजित था, जिन पर दाइम्यो (क्षेत्रीय सामंत) शासन करते थे।
  5. शोगुन दाइम्यो पर नियंत्रण रखते थे तथा प्रमुख शहरों और खदानों पर भी उनका प्रत्यक्ष नियंत्रण था।
  6. सामुराई (योद्धा वर्ग) शासक कुलीन वर्ग थे, जो शोगुनों और दाइम्यो की सेवा में रहते थे।

सोलवीं सदी में जापान के विकास के लिए कौन कौन से कदम उठाए गए :

  1. केंद्रीय सत्ता को मज़बूत किया गया और शोगुनों का नियंत्रण बढ़ाया गया।
  2. दाइम्यो की शक्ति को सीमित करने के प्रयास किए गए।
  3. कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए भूमि सुधार किए गए।
  4. सिंचाई और खेती की तकनीकों में सुधार हुआ।
  5. आंतरिक व्यापार को बढ़ावा दिया गया।
  6. सड़क और परिवहन व्यवस्था का विकास किया गया।
  7. शांति और स्थिरता स्थापित की गई, जिससे आर्थिक विकास संभव हुआ।

मेजी पुनर्स्थापना (1867-68)

  1. 1867-68 में जापान में शोगुनों के शासन का अंत कर दिया गया।
  2. शोगुनों के स्थान पर नए अधिकारी और सलाहकार सत्ता में आए।
  3. ये अधिकारी जापानी सम्राट के नाम पर शासन करने लगे।
  4. इस प्रकार सम्राट को फिर से सर्वोच्च सत्ता प्राप्त हुई।
  5. सम्राट ने ‘मेजी’ की उपाधि धारण की।
  6. जापान के इतिहास में इस महत्वपूर्ण घटना को मेजी पुनर्स्थापना कहा जाता है।

अर्थव्यवस्था की आधुनिकीकरण के लिए कौन कौन से कदम उठाए गए:

  1. कृषि पर कर लगाकर धन एकत्रित किया गया।
  2. 1870-72 में तोक्यो से योकोहामा बंदरगाह के बीच पहली रेल लाइन बिछाई गई।
  3. वस्त्र उद्योग और अन्य उद्योगों के लिए यूरोप से मशीने आयात की गई।
  4. मजदूरों के प्रशिक्षण और शिक्षा के लिए विदेशी कारीगरों को बुलाया गया, साथ ही देश के
  5. विश्वविद्यालयों और स्कूलों में पढ़ाने के लिए उनका इस्तेमाल किया गया।
  6. कई जापानी विद्यार्थियों को विदेश में पढ़ाई के लिए भेजा गया।
  7. 1872 में आधुनिक बैंकिग व्यवस्था की स्थापना की गई।
  8. कई कंपनियों को सब्सिडी उपलब्ध कराई गई।
  9. जनसंख्या के दबाव को कम करने के लिए प्रवास को बढ़ावा दिया गया।
  10. कृषि उत्पादन और सिंचाई तकनीक में सुधार किया गया।
  11. वाणिज्य और आंतरिक विदेशी व्यापार को बढ़ावा दिया गया।
  12. पश्चिमी तकनीक और मशीनरी का उपयोग करके औद्योगिक और तकनीकी विकास किया गया।
  13. औद्योगिक और व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत किया गया, ताकि कुशल श्रमिक तैयार हो सकें।
  14. जापानी राष्ट्रवाद, निष्ठावान नागरिक बनना, सम्राट के प्रति वफादार रहने की शिक्षा दी गई।

चीन की भौगोलिक विशेषताएं

  1. चीन एक विशाल महाद्वीपीय देश है।
  2. इसके व्यापक विस्तार के कारण यहाँ विभिन्न प्रकार की जलवायु वाले क्षेत्र पाए जाते हैं।
  3. चीन की तीन प्रमुख नदियाँ पीली नदी, यांगत्सी नदी (जो विश्व की तीसरी सबसे लंबी नदी है) और पर्ल नदी हैं।
  4. देश का एक बहुत बड़ा भाग पर्वतीय है।
  5. चीन में हान सबसे प्रमुख जातीय समूह है तथा चीनी की मुख्य भाषा है।
  6. डिम सम चीन का प्रसिद्ध व्यंजन है, जिसका शाब्दिक अर्थ दिल को छू लेने वाला” होता है।
  7. यह प्रायः गुँथे हुए आटे में सब्ज़ी या मांस भरकर भाप में पकाया गया छोटा व्यंजन होता है।
  8. चीन के उत्तरी भाग में गेहूँ मुख्य आहार है, जबकि पूर्वी चीन में चावल और गेहूँ दोनों का सेवन किया जाता है।

चीन का आधुनिक इतिहास

  1. चीन पर मांचू (चिंग) राजवंश का शासन था (1644 ई. से 1911 ई. तक)
  2. चीन एक स्वतंत्र साम्राज्य था और उसका अपना सम्राट शासन करता था।
  3. चीन का आधुनिक इतिहास 1840 (अफीम युद्ध) से शुरू होता है

अफीम युद्ध क्यों हुआ?

1st (1839-1842) , 2nd (1856-1860)

अफीम युद्ध का मुख्य कारण था ब्रिटेन द्वारा चीन में अफीम का व्यापार और चीन द्वारा उस पर रोक लगाना

कारण :-

  1. ब्रिटेन भारत में अफीम उगाकर चीन में बेचता था।
  2. चीन में अफीम की लत फैल रही थी, जिससे समाज और अर्थव्यवस्था खराब हो रही थी।
  3. चीनी सरकार ने अफीम के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया।
  4. इससे ब्रिटेन नाराज़ हुआ और 1840 में चीन पर युद्ध थोप दिया।

अफीम युद्धों के बाद चीन

  1. ब्रिटेन, फ्रांस, जापान आदि शक्तियों के अधीन हो गया
  2. कई अपमानजनक संधियाँ करनी पड़ीं
  3. बंदरगाह विदेशियों को दे दिए गए
  4. चीन एक अर्ध-औपनिवेशिक देश बन गया।
  5. “चीन का आधुनिक इतिहास – संप्रभुता की पुनर्प्राप्ति, विदेशी कब्जे का अंत और समानता व विकास को संभव बनाने पर आधारित था।”

संप्रभुता की पुनर्प्राप्ति

संप्रभुता का अर्थ : अपने देश पर खुद का अधिकार, बिना विदेशी दखल के शासन करना।

प्रयासः-

  • 1911 की क्रांति (सन यात सेन)
  • 1921 में साम्यवादी पार्टी की स्थापना
  • 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना

इन आंदोलनों का मुख्य लक्ष्य थाः

  1. चीन को विदेशी नियंत्रण से मुक्त कराना
  2. राष्ट्रीय संप्रभुता वापस पाना

विदेशी कब्जे का अंत

  1. 1949 में माओ त्से तुंग के नेतृत्व में:
  2. विदेशी शक्तियों को बाहर निकाला गया
  3. साम्यवादी सरकार बनी
  4. चीन स्वतंत्र राष्ट्र बना

समानता और विकास को संभव बनाना

साम्यवादी सरकार ने :-

  • जमीन किसानों में बाँटी
  • उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया
  • शिक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया
  • सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार दिया।

चीन के विकास पर तीन प्रमुख बहसें

कांग योवेल और लियांग किचाऊ

  1. ये सुधारवादी नेता थे।
  2. चाहते थे कि सम्राट बना रहे लेकिन शासन में सुधार हों।
  3. शिक्षा, प्रशासन और समाज में आधुनिक सुधार पर ज़ोर दिया।

सन यात-सेन

  1. उन्होंने राजतंत्र को खत्म कर गणतंत्र की स्थापना की बात की।
  2. उनके तीन सिद्धांत थेः राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और जनकल्याण।
  3. आधुनिक और लोकतांत्रिक चीन बनाना उनका लक्ष्य था।

चीनी साम्यवादी पार्टी (CCP)

  1. यह मार्क्सवादी विचारधारा पर आधारित थी।
  2. समानता, सामूहिक खेती और समाजवादी राज्य की स्थापना चाहती थी।
  3. माओ त्सेतुंग इसके प्रमुख नेता बने।

कन्फ्यूशियसवाद (Confucianism)

कन्फ्यूशियसवाद एक दर्शन और नैतिक शिक्षा प्रणाली है, जो प्राचीन चीन के दार्शनिक कन्फ्यूशियस (Confucius) की शिक्षाओं पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में नैतिकता, अनुशासन और सद्भाव को बढ़ावा देना है।

मुख्य विशेषताएँ :-

  1. दूसरों के साथ अच्छा और सम्मानपूर्ण व्यवहार करना।
  2. व्यवहारिक बुद्धिमत्ता और नैतिक चरित्र का विकास।
  3. उचित सामाजिक संबंधों (जैसे पिता-पुत्र, शासक-प्रजा, मित्रता) को बनाए रखना और बढ़ावा देना।
  4. कर्तव्य, अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों पर ज़ोर देना।

1890 के दशक में बहुत बड़ी संख्या में चीन के विद्यार्थियों को जापान पढ़ने के लिए भेजा गया।

सन-यात-सेन

  1. 1911 में मांचू साम्राज्य समाप्त कर गणतंत्र की स्थापना की गई।
  2. सन यात सेन को आधुनिक चीन का संस्थापक भी माना जाता है।
  3. वे एक गरीब परिवार से थे उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई भी की लेकिन वे चीन के भविष्य को लेकर चिंतित थे।

सन-यात-सेन के तीन सिद्धांत

1. राष्ट्रवाद (Nationalism)

चीन को विदेशी नियंत्रण से मुक्त कर एक स्वतंत्र और एकीकृत राष्ट्र बनाना।

2. लोकतंत्र (Democracy)

जनता को शासन में भागीदारी का अधिकार देना और गणतांत्रिक सरकार की स्थापना करना।

3. जनकल्याण / समाजवाद (People's Livelihood / Social Welfare)

जनता की आर्थिक स्थिति सुधारना और सामाजिक समानता स्थापित करना।

नेशनल पीपुल्स पार्टी (कुओमिन्तांग)

  1. नेशनल पीपुल्स पार्टी की स्थापना सन यात-सेन ने की थी।
  2. यह पार्टी 1911 की क्रांति में मांचू साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष की प्रमुख शक्ति थी।
  3. इसका उद्देश्य चीन में गणतंत्र की स्थापना करना था।
  4. सन यात सेन की मृत्यु के बाद चियांग kai-shek कुओमीणतांग के नेता बने ।
  5. कुओमीणतांग अपने लक्ष्य में असफल रहा सामाजिक असमानता ओं को खत्म नहीं कर
  6. सका तथा लोगों पर फौजी व्यवस्था थोपने का प्रयास किया।

चीनी साम्यवादी दल

  1. चीनी साम्यवादी दल की स्थापना 1921 ई. में रूसी क्रांति से प्रेरित होकर की गई।
  2. यह दल मार्क्सवादी विचारधारा पर आधारित था।
  3. माओ त्सेतुंग इस पार्टी के प्रमुख नेता थे।
  4. इस पार्टी ने स्वतंत्र (आजाद) सरकार और अपनी अलग सेना के गठन पर ज़ोर दिया।
  5. ग्रामीण क्षेत्रों में महिला संघों के गठन को बढ़ावा दिया गया।
  6. विवाह संबंधी नए कानून बनाए गए, जिनमें जबरन विवाह, विवाह की खरीद-फरोख्त और समझौता विवाह पर रोक लगाई गई तथा तलाक को आसान बनाया गया।

पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना

  1. 1949 ई. में माओ त्सेतुंग के नेतृत्व में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई।
  2. अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र सरकार के नियंत्रण में रखे गए।
  3. निजी कारखानों तथा भू-स्वामित्व को धीरे-धीरे समाप्त किया गया।
  4. 1958 में ‘लॉन्ग मार्च’ नहीं बल्कि ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड (लंबी छलांग आंदोलन) के माध्यम से तेजी से औद्योगीकरण करने का प्रयास किया गया।
  5. लोगों को अपने घरों के पिछवाड़े में इस्पात (स्टील) की भट्टियाँ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
  6. सामूहिक खेती (Collective Farming) की शुरुआत की गई।

1978 के सुधार (चीन में आर्थिक सुधार)

  1. 1978 में देंग शियाओपिंग द्वारा आधुनिकीकरण के चार सूत्रों (कृषि, उद्योग, विज्ञान एवं तकनीक और रक्षा) की घोषणा की गई।
  2. विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZS) की स्थापना की गई।
  3. खेती में सामूहिक प्रणाली को समाप्त कर निजी/परिवार आधारित खेती को बढ़ावा दिया गया।
  4. उद्योगों में भी धीरे-धीरे निजीकरण और बाजार आधारित व्यवस्था अपनाई गई।

चीन द्वारा अपनाये गये आधुनिकीकरण के तरीके :-

  1. साम्यवादी दल का कड़ा नियंत्रण
  2. विदेशी साम्राज्यवाद से लड़ने का कार्यक्रम
  3. अर्थव्यवस्था पर सरकारी नियंत्रण
  4. बाजार संबंधी सुधार किए गए
  5. आधुनिकीकरण का श्रेय साम्यवादी दल को
  6. केंद्रीकृत सरकार की स्थापना
  7. आर्थिक खुलेपन और विश्व बाजार से संबंध बनाने की नीति
  8. शिक्षा का विस्तार हुआ
  9. निजी कारखानों तेजी से और भू-स्वामित्व औद्योगिकरण का अंत
  10. एक ही दल की सरकार
  11. पुरानी असमानताओं का अंत

कोरिया की कहानी

  1. 1910 में जापान ने कोरिया पर कब्जा कर जोसोन राजवंश (500 से चल रहा था) का अंत कर दिया।
  2. कोरियाई लोगों ने जापान के खिलाफ आंदोलन किया और अस्थायी सरकार बनाई।
  3. 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की हार के बाद कोरिया स्वतंत्र हुआ।
  4. स्वतंत्रता के बाद कोरिया उत्तर और दक्षिण में बाँट गया।
  5. उत्तर कोरिया सोवियत संघ के प्रभाव में और दक्षिण कोरिया संयुक्त राष्ट्र (यू.एन.) के प्रभाव में आया।
  6. 1948 में दोनों भागों में अलग-अलग सरकारें बनीं और विभाजन स्थायी हो गया।

1948 में विभाजन सरकार

  • उत्तर कोरिया :- (किम इल सुंग) साम्यवादी सरकार बनी
  • दक्षिण कोरिया :- (सिंगमैन री) लोकतांत्रिक सरकार बनी।

कोरियाई युद्ध (1950-1953) के बाद कोरिया की स्थिति

  1. जून 1950 में कोरियाई युद्ध शुरू हुआ। इसमें दक्षिण कोरिया को अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र का समर्थन मिला तथा उत्तर कोरिया को चीन का समर्थन मिला।
  2. यह युद्ध जुलाई 1953 में युद्धविराम समझौते से समाप्त हुआ और कोरिया स्थायी रूप से उत्तर व दक्षिण कोरिया में बँट गया।
  3. 1948 में दक्षिण कोरिया के पहले राष्ट्रपति सिगमैन री चुने गए, लेकिन उन्होंने असंवैधानिक तरीकों से अपना शासन बढ़ाया।
  4. अप्रैल 1960 में जनता के विरोध (अप्रैल क्रांति) के कारण सिगमैन री को इस्तीफा देना पड़ा।
  5. उसके बाद बनी लोकतांत्रिक सरकार को 1961 में जनरल पार्क चुंग-ही ने सैन्य तख्तापलट से हटा दिया।
  6. अक्टूबर 1963 के चुनाव में पार्क चुंग-ही राष्ट्रपति बने।

कोरिया का तीव्र औद्योगिकीकरण एवं मजबूत नेतृत्व

  1. राष्ट्रपति पार्क चुंग-ही ने निर्यात आधारित आर्थिक नीति अपनाई।
  2. सरकार ने पाँच वर्षीय योजनाएँ बनाकर बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया।
  3. 1960-70 के दशक में भारी और रासायनिक उद्योगों का विकास किया गया।
  4. 1970 में ग्रामीण विकास के लिए नया गाँव (सैमौल) आंदोलन शुरू किया गया।
  5. जिससे मजबूत नेतृत्व, शिक्षित अधिकारी और मेहनती श्रमिकों से तेज आर्थिक विकास हुआ।
  6. विदेशी नकनीक और संस्थानों को अपनाने की खुली नीति अपनाई गई।

ताइवान

  1. 1949 में चीनी साम्यवादी दल से पराजित होकर च्यांग काई-शेक ताइवान चले गए।
  2. वे बड़ी मात्रा में धन और बहुमूल्य कलाकृतियाँ साथ ले गए।
  3. ताइवान में उन्होंने चीनी गणतंत्र (Republic of China) की सरकार स्थापित की।
  4. उन्होंने दमनकारी शासन लागू किया और राजनीतिक विरोध व बोलने की स्वतंत्रता पर रोक लगाई।
  5. भूमि सुधार द्वारा कृषि उत्पादन बढ़ाया गया।
  6. अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण किया गया।
  7. 1973 में राष्ट्रीय उत्पादन के मामले में ताइवान एशिया में जापान के बाद दूसरे स्थान पर रहा।
  8. आर्थिक विकास के साथ अमीर-गरीब का अंतर धीरे-धीरे कम हुआ।

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