कक्षा 11 इतिहास अध्याय 1 के नोट्स हिंदी में
लेखन कला और शहरी जीवन notes

यहाँ हम कक्षा 11 इतिहास के 1st अध्याय “लेखन कला और शहरी जीवन” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में “लेखन कला और शहरी जीवन” से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।

ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।

कक्षा 11 इतिहास अध्याय 1 के नोट्स हिंदी में, लेखन कला और शहरी जीवन notes

कक्षा 11 इतिहास अध्याय 1 के नोट्स हिंदी में, लेखन कला और शहरी जीवन notes

class 11 History chapter 1 notes in hindi

मेसोपोटामिया शब्द का अर्थ

  1. मेसोपोटामिया नाम यूनानी भाषा के दो शब्दों मेसोस (mesos) अर्थात ‘मध्य’ और पोटैमोस (Potamos) अर्थात ‘नदी’ से मिलकर बना है इसलिए मेसोपोटामिया का अर्थ हुआ दो नदियों के बीच का भाग या देश।
  2. मेसोपोटामिया दजला व फरात नदियों के बीच की उपजाऊ धरती को इंगित करता है
  3. यह देश आज के इराक देश में आता है।

मेसोपोटामिया के बारे में जानकारियाँ

1. शहरी जीवन की शुरुआत :-

दुनिया में सबसे पहले शहरों की शुरुआत यहीं हुई थी। लोग यहाँ मिलकर रहते थे, व्यापार करते थे और कानूनों के अनुसार जीवन जीते थे।

2. पुरातात्त्विक खोजें :-

मेसोपोटामिया में खुदाई (पुरातत्त्वीय खोज) की शुरुआत 1840 के दशक में हुई। खुदाई में वहाँ के मंदिर, महल, मूर्तियाँ, और ईंटों पर लिखी चीजें मिलीं।

3. लेखन प्रणाली और साहित्य :-

  1. उनका साहित्य धर्म गणित और खगोल शास्त्र बहुत उन्नत था।
  2. उनकी लेखन प्रणाली पूर्वी भूमध्यसागर, सीरिया, तुर्की और मिस्र तक फैल गई थी।

4. कीलाकार लिपि :-

यहाँ के लोग कीलाक्षर (कीलाकार) नाम की लिपि में मिट्टी की तख्तियों पर लिखते थे।

मेसोपोटामिया की खास बातें

1.शब्द का अर्थ :-

“मेसोपोटामिया” का अर्थ होता है दो नदियों के बीच की भूमि (दजला और फरात नदियाँ)।

2.प्राचीनतम सभ्यता :-

यह दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक थी।

3. शहरी जीवन की शुरुआत :-

सबसे पहले शहरों का निर्माण यहीं हुआ था।

4. लेखन प्रणाली :-

यहाँ के लोग कीलाक्षर लिपि (Cuneiform) में मिट्टी की तख्तियों पर लिखते थे।

5. साहित्य और ज्ञान :-

यहाँ का साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र और धर्म बहुत उन्नत था।

6. व्यवस्थित शासन :-

कानून, कर व्यवस्था और राजा के अधीन प्रशासन अच्छी तरह से चलता था।

7. मंदिर और महल :-

यहाँ बड़े-बड़े मंदिर (ज़िगुरात) और महल बनाए जाते थे।

8. आर्थिक गतिविधियाँ :-

लोग खेती, पशुपालन, व्यापार और कारीगरी करते थे।

9. पहिया और गणना प्रणाली :-

दुनिया का पहला पहिया, घंटा-मिनट की गणना और कैलेंडर यहीं से शुरू हुआ।

10. संपर्क और प्रसार :-

इनका ज्ञान और लिपि मिस्त्र, सीरिया, तुर्की जैसे आसपास के देशों तक फैल गई थी।

मेसोपोटामिया के शहरीकरण का महत्त्व

1. पहले शहरों की शुरुआत :-

उर, उरुक और मारी जैसे शहर दुनिया के पहले नगरों में शामिल थे।

2. व्यवस्थित जीवन :-

पक्के घर, सड़कों और जल निकासी जैसी सुविधाएँ बनीं।

3. व्यापार और अर्थव्यवस्था :-

शहर व्यापार, खेती और दस्तकारी के केंद्र बने।

4. प्रशासन और शासन :-

राजा और पुजारियों द्वारा नगरों का प्रशासन चला।

5. धार्मिक केंद्र :-

नगरों में ज़िगुरात (मंदिर) बनाए गए, जो पूजा और सत्ता का केंद्र थे।

6. लेखन की शुरुआत :-

कीलाक्षर लिपि का विकास हुआ व्यापार, कानून और धर्म लिखे जाने लगे।

7. नौकरी और वर्ग व्यवस्था :-

किसान, व्यापारी, सैनिक, पुजारी जैसे अलग-अलग कामों का बँटवारा हुआ।

8. ज्ञान और संस्कृति का विकास :-

 गणित, खगोलशास्त्र, साहित्य और कानून की शुरुआत इन्हीं नगरों में हुई।

मेसोपोटामिया की ऐतिहासिक जानकारी के मुख्य स्रोत

1.मिट्टी की पट्टिकाएं :-

इन पर कीलाकार लिपि (Cuneiform Script) में लिखा गया है। व्यापार, कानून, धर्म, जीवनशैली आदि की जानकारी मिलती है।

2.सिलेंडर मुहरें :-

  1. ये बेलनाकार मुहरें व्यापारिक दस्तावेज़ों पर लगाई जाती थीं।
  2. इनसे व्यापारिक लेन-देन और संपत्ति की पहचान का पता चलता है।

3.पुरातात्त्विक अवशेष :-

भवनों, मंदिरों (जैसे ज़िगुरात), मूर्तियों, औजारों और बर्तनों के अवशेष ये जीवनशैली, संस्कृति और तकनीक की जानकारी देते हैं।

4.शिलालेख :-

पत्थरों और भवनों पर खुदे लेख, जिनसे शासकों, युद्धों और धार्मिक मान्यताओं का ज्ञान होता है।

5.पुराने नगरों के खंडहर :-

उर, उरुक, जैसे प्राचीन नगरों के अवशेषों से शहरी जीवन और नगर नियोजन की जानकारी मिलती है।

मेसोपोटामिया और उसका भूगोल

1. मेसोपोटामिया का अर्थ :-

“मेसोपोटामिया” का मतलब होता है दो नदियों के बीच की भूमि दजला और फरात नदियों के बीच का क्षेत्र।

2. मुख्य क्षेत्र :-

  1. दक्षिणी भाग को पहले सुमेर और अक्कद कहा जाता था। बाद में इसे बेबीलोनिया कहा जाने लगा।
  2. उत्तरी भाग पर जब असीरियाई लोगों ने कब्जा किया, तो इसे असीरिया कहा गया।

3. प्रसिद्ध नगर :-

इस सभ्यता में नगरों का निर्माण 3000 ई.पू. में शुरू हुआ। उरुक, उरु और मारी इसके प्रमुख नगर थे।

4.पूर्वोत्तर भाग :-

  1. यहाँ ऊँचे-नीचे मैदान हैं, जो धीरे-धीरे पहाड़ों की ओर फैलते हैं।
  2. यहाँ हरे-भरे पेड़, झरने और जंगली फूल पाए जाते थे।
  3. यहाँ 7000 से 6000 ई.पू. के बीच खेती शुरू हो गई थी।
  4. उत्तरी क्षेत्र (स्टेपी घास के मैदान) –
  5. यहाँ की ज़मीन ऊँची है और स्टेपी घास के मैदान हैं।
  6. यहाँ पशुपालन (भेड़-बकरी पालन) खेती से ज़्यादा फायदेमंद था।

5.दक्षिणी क्षेत्र (रेगिस्तानी इलाका) :-

यह एक रेगिस्तान जैसा इलाका था, लेकिन यहीं से शहरों और लेखन प्रणाली की शुरुआत हुई थी। फरात और दजला नदियाँ पहाड़ों से उपजाऊ मिट्टी लाकर इस क्षेत्र को खेती के लिए उपयुक्त बनाती थीं। यहाँ की ज़मीन बहुत उपजाऊ थी

6. खेती और पशुपालन :-

  1. खेतों में अनाज उगाया जाता था।
  2. भेड़-बकरियाँ स्टेपी घास के मैदानों, पहाड़ियों और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में पाली जाती थीं।
  3. इससे दूध, मांस और ऊन मिलता था।

अन्य संसाधन :-

  1. नदियों में मछलियाँ बहुत मिलती थीं।
  2. गर्मियों में खजूर के पेड़ खूब फल देते थे।

मेसोपोटामिया की भाषा

  1. सुमेरियन भाषा (प्रथम ज्ञात भाषा)
  2. अक्क्दी भाषा 2400 ईसा पूर्व
  3. अरामाइक भाषा 1400 ईसा पूर्व

अरामाइक भाषा, हिब्रू से मिलती जुलती थी और 1000 ई. पू. के बाद व्यापक रूप से बोली जाने लगी थी। यह आज इराक के कुछ भागों में बोली जाती है।

लेखन कला - मेसोपोटामिया

1. लेखन का आविष्कार :-

मेसोपोटामिया के लोग दुनिया में सबसे पहले लेखन कला का आविष्कार करने वाले माने जाते हैं।

2. प्राचीन पट्टिकाएं :-

यहाँ से जो पहली मिट्टी की पट्टिकाएं मिली है, वे लगभग 3200 ई.पू. की हैं।

3. चित्र लिपि से शुरुआत :-

शुरुआत में लोग चित्र बनाकर अपने विचार प्रकट करते थे (चित्र-लिपि)।

4. कीलाकार लिपि का विकास :-

चित्र बनाना कठिन होने के कारण लगभग 3000-2500 ई.पू. में उन्होंने कीलाकार चिन्ह(Cuneiform Script) का उपयोग शुरू किया।

5. कैसे लिखते थे?

नरकट या बांस की कलम से गीली मिट्टी की पट्टियों पर लिखा जाता था। फिर उन्हें सुखाकर या आग में पकाकर सुरक्षित कर लिया जाता था।

6. कीलाकार लिपि का अर्थ

  1. “Cuneiform” लिपि दो लैटिन शब्दों से मिलकर बना है:
  2. Cuneus = खूंटी या कील Forma = आकार इसलिए इसे कील के आकार की लिपि कहा जाता है।

7. इतिहास का स्रोत :-

  1. इन मिट्टी की पट्टियों से मेसोपोटामिया की सभ्यता, जीवन, कानून और धर्म की जानकारी मिलती है।
  2. ये इतिहास के सबसे प्राचीन लिखित दस्तावेजों में से हैं।

शहरों में माल की आवाजाही

1. खनिज संसाधनों की कमी :-

मेसोपोटामिया में पत्थर, धातु, और खनिज बहुत कम मिलते थे।

2. दक्षिण में निर्माण सामग्री का अभाव :-

औजार, मोहर, आभूषण और बर्तन बनाने के लिए ज़रूरी पत्थर और धातुएं उपलब्ध नहीं थीं।

3. लकड़ी की गुणवत्ता खराब :-

 वहाँ की लकड़ी (खजूर और पोपलार पेड़) गाड़ियाँ, पहिए और नाव बनाने के लिए अच्छी नहीं थी।

4. धातुओं की कमी :-

तांबा, रांगा, चाँदी, सोना और सीपी जैसे धातु वहाँ नहीं मिलते थे।

5. आयात की आवश्यकता :-

ये सारी चीज़े मेसोपोटामिया वाले तुकी, ईरान और खाड़ी पार देशों से मंगवाते थे।

6. निर्यात में कृषि उत्पाद :-

बदले में वे कपड़ा और अनाज जैसे कृषि उत्पाद बड़ी मात्रा में उन देशों को भेजते थे।

7. व्यापार के लिए मार्ग :-

माल लाने-ले जाने के लिए नौकाएं (नावे), गाड़ियों और रास्तों का उपयोग किया जाता था।

8. नदी मार्ग का उपयोग ;-

दजला और फरात नदियाँ व्यापारिक जलमार्ग के रूप में बहुत सहायक थीं।

भूमि उपजाऊ होने के बाद भी कृषि में संकट क्यों आते थे?

1. फ़रात नदी की अनियमितता :-

  1. कभी बहुत ज्यादा पानी आता था, जिससे फसलें डूब जाती थीं।
  2. कभी नदी रास्ता बदल लेती थी, जिससे खेत सूखे रह जाते थे।

2. गाँव बार-बार उजड़ते थे :-

मेसोपोटामिया के अभिलेखों से पता चलता है कि गाँवों को समय-समय पर फिर से बसाना पड़ता था।

3. मानव निर्मित समस्याएँ :-

  1. जो लोग नदी के ऊपरी भाग में रहते थे, वे ज़्यादा पानी अपने खेतों के लिए ले लेते थे।
  2. निचले इलाकों को पानी नहीं मिल पाता था, जिससे वहाँ के गाँव संकट में आ जाते थे।

4. पानी और ज़मीन को लेकर झगड़े :-

अक्सर गाँवों में पानी और खेतों के लिए आपस में झगड़े होते थे।

5. युद्ध और लूटपाट :-

  1. जब कोई समूह लड़ाई जीतता था, तो वह अपने साथियों को लूट का माल बाँटता था।
  2. हारने वाले लोगों को बंदी बना लिया जाता था।

6. बंदी बनाए गए लोगों का उपयोग :

बंदियों को चौकीदार या नौकर बना लिया जाता था।

दक्षिण मेसोपोटामिया का शहरीकरण - मंदिर और राजा

  1. 5000 ई. पू. से दक्षिण मेसोपोटामिया (आज का दक्षिणी इराक) में लोग गाँवों में बसने लगे और धीरे-धीरे ये गाँव शहरों में बदलने लगे।
  2. कुछ बस्तियाँ जैसे उर उरूक और लागाश समय के साथ बहुत विकसित हो गई।

1. मंदिर का महत्व :-

  1. हर शहर में मंदिर सबसे प्रमुख इमारत होता था।
  2. यह देवी-देवताओं का घर माना जाता था। जैसे
  3. उर के मंदिर में चंद्र देवता “नन्ना” की पूजा होती थी।.
  4. उरूक में “इन्नाना” की पूजा होती थी, जो प्रेम और युद्ध की देवी थी।
  5. मंदिर ईटों से बनाए जाते थे और समय के साथ बहुत बड़े और भव्य होते चले गए।
  6. मंदिर के चारों ओर कई कमरे और आंगन होते थे जैसे एक छोटा सा शहर।
  7. लोग मंदिर में अन्न, दही, मछली आदि चढ़ाते थे- ये सब देवता को प्रसन्न करने के लिए होता था।

2. राजा और मंदिर :-

  1. शुरुआत में मंदिरों के पुजारी ही शहर का संचालन करते थे।
  2. लेकिन समय के साथ राजा का पद बना, जो युद्ध में लोगों की रक्षा करता था और फिर मंदिरों पर भी अधिकार कर लिया।
  3. राजा को देवताओं का प्रतिनिधि माना जाने लगा।

3. मंदिर की संपत्ति और काम :-

  1. मंदिरों के पास खेत, जानवर, मछली पकड़ने के स्थान आदि होते थे।
  2. यह माना जाता था कि देवता ही इन सबके मालिक हैं, और लोग देवता के सेवक बनकर काम करते थे।
  3. मंदिर आर्थिक और धार्मिक दोनों केंद्र बन गए थे।

उरुक

  1. उरुक उन दिनों का सबसे पुराना मंदिर-नगरों में से एक था।
  2. यहाँ से सशस्त्र योद्धाओं और मारे गए दुश्मनों के चित्र मिले हैं।
  3. पुरातात्विक सर्वेक्षणों से पता चलता है कि लगभग 3000
  4. ई.पू. में उरुक नगर का विस्तार 250 हेक्टेयर तक हो गया था।
  5. इस विस्तार के कारण कई छोटे-छोटे गाँव उजड़ गए।
  6. बड़ी संख्या में लोगों को अपना गाँव छोड़कर विस्थापित होना पड़ा।
  7. उरुक का यह क्षेत्रफल बाद में विकसित हुए मोहनजोदड़ो नगर से भी दोगुना था।
  8. उरुक की सुरक्षा के लिए उसके चारों ओर मजबूत दीवार (प्राचीर) बहुत पहले ही बना दी गई।

उर नगर की व्यवस्था :-

1. नगर निर्माण और योजना :-

  1. नगर की योजना में नियमितता नहीं थी, यानी नगर नियोजन का अभाव था।
  2. गलियाँ टेढ़ी-मेढ़ी और संकरी थीं, जिससे पहिए वाली गाड़ियाँ घरों तक नहीं जा सकती थीं।
  3. जल निकासी की व्यवस्था घरों के आँगन में होती थी ताकि गलियों में कीचड़ न हो।

2. आर्थिक व्यवस्था :-

  1. उर व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था।
  2. व्यापार वस्तु विनिमय, अनाज, वस्त्र, धातु, और मिट्टी के बर्तनों का होता था।
  3. व्यापारिक लेन-देन को रिकॉर्ड करने के लिए लेखन प्रणाली का उपयोग होता था।

3. सामाजिक व्यवस्था :-

  1. समाज में कई वर्ग होते थे जैसे राजा, पुजारी, व्यापारी, कारीगर, किसान, मजदूर और दास।
  2. युद्धबंदियों और गरीबों से जबरन काम करवाया जाता था।

4. धार्मिक व्यवस्था :-

  1. उर नगर में मंदिर (ज़िगुरैट) नगर का प्रमुख केंद्र होते थे।
  2. धार्मिक कार्यों का संचालन पुजारियों द्वारा होता था।
  3. मंदिर पूजा के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र थे।

5. प्रशासनिक व्यवस्था :-

  1. नगर का संचालन राजा और अधिकारियों द्वारा किया जाता था।
  2. कर वसूली और लेखांकन का पूरा प्रबंध होता था।

6. घरों की विशेषताएँ

  1. घर के दरवाजे आँगन में खुलते थे, जिससे परिवार की गोपनीयता बनी रहती थी।
  2. घरों के निर्माण से जुड़े कई अंधविश्वास प्रचलित थे, जैसे “अगर देहली ऊँची हो तो घर में धन-दौलत आती है।”

7. मृत्यु और समाधि स्थल -

नगरवासियों के लिए विशेष कब्रिस्तान बनाए गए थे।

मारी नगर की व्यवस्था

  1. मारी नगर 2000 ई. पू. के बाद एक शाही राजधानी के रूप में फला-फूला।
  2. यह एक व्यापार आधारित समृद्ध शहरी केंद्र था।
  3. यहाँ से लकड़ी, तांबा आदि वस्तुएँ नावों के जरिए फरात नदी से दक्षिण, तुर्की, सीरिया और लेबनान भेजी जाती थीं।
  4. सामान लदे जलपोत मारी में रुकते थे, और अधिकारी माल की जांच कर 10% शुल्क वसूलते थे।
  5. मारी नगर व्यापार और कर प्रणाली के लिए प्रसिद्ध था।
  6. नगर में राजा और अधिकारी प्रशासन का संचालन करते थे।
  7. मारी का विशाल राजमहल शाही निवास, प्रशासनिक केंद्र और कीमती धातुओं के आभूषण निर्माण का स्थल था।
  8. लेखन और दस्तावेज़ीकरण की समृद्ध परंपरा थी कई पत्र और अभिलेख मिले हैं।
  9. राजा के भोज में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में रोटी, मांस, मछली, फल, मदिरा और बीयर परोसे जाते थे।
  10. नगर में सामाजिक वर्ग मौजूद थे- शासक, अधिकारी, व्यापारी, सैनिक और आम नागरिक।
  11. मारी की इमारतें और महल संगठित रूप से बनाए गए थे, जो नगर की समृद्धि को दर्शाते हैं।

मेसोपोटामिया की प्रमुख उपलब्धियाँ

1. लेखन कला का विकास

  1. विश्व की पहली लेखन प्रणाली – कीलाक्षर लिपि (Cuneiform) I
  2. मिट्टी की पट्टियों पर व्यापार, कर, साहित्य आदि की जानकारी लिखी जाती थी।

2. नगर योजना और निर्माण

  1. उर और उरुक जैसे नगरों का निर्माण।
  2. जिगुरैट (मंदिर) और मजबूत प्राचीरों का निर्माण किया गया।

3. वास्तुकला और कला

  1. मिट्टी की ईटों से बड़े-बड़े भवन और मंदिर बनाए गए।
  2. सिलेंडर सील, मूर्तियाँ और दीवारों की सजावट की परंपरा ।

4. वैज्ञानिक ज्ञान

  1. खगोलशास्त्र, गणित और समय गणना में उन्नति ।
  2. 60 के आधार पर समय मापन 60 सेकंड 1 मिनट, 60 मिनट = 1 घंटा।

5. कानूनी प्रणाली

राजा हम्मुराबी द्वारा बनाए गए हम्मुराबी संहिता – विश्व की पहली लिखित कानून संहिता।

6. सिंचाई और कृषि प्रणाली

  1. नहरों और जलमार्गो का निर्माण करके खेती की उन्नत व्यवस्था।
  2. फ़रात और दजला नदियों के जल का कुशल उपयोग।

7. व्यापार और अर्थव्यवस्था

  1. लंबी दूरी तक व्यापार – तांबा, लकड़ी, पत्थर आदि का आयात-निर्यात।
  2. मुद्रा की जगह वस्तु विनिमय प्रचलित था।

8. राजनीतिक और सामाजिक संगठन

  1. संगठित शासन प्रणाली, नगर-राज्य और कर व्यवस्था।
  2. समाज में विभिन्न वर्गों की स्पष्ट पहचान।

क्या यह कहना सही होगा की खानाबदोश पशुचारक निश्चित रूप से शहरी जीवन के लिए खतरा थे ?

  1. हाँ, यह कहना सही होगा कि खानाबदोश पशुचारक निश्चित रूप से शहरी जीवन के लिए खतरा थे। नीचे इसका कारण विस्तृत रूप में दिया गया है:
  2. खानाबदोश पशुचारक एक जगह स्थायी रूप से नहीं रहते थे, जबकि शहरी जीवन स्थायित्व और व्यवस्था पर आधारित होता था।
  3. वे अक्सर अपने पशुओं के लिए नए चारागाह की तलाश में शहरों के आसपास पहुँच जाते थे।
  4. कई बार उन्होंने शहरी इलाकों पर हमला किया और अन्न, पशु, धातु आदि संसाधनों को लूट लिया।
  5. उनके हमलों से नगरों की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता को नुकसान पहुँचता था।
  6. वे शहरी प्रशासन और कानून व्यवस्था को चुनौती देते थे।
  7. उनकी जीवनशैली और संस्कृति, शहरी समाज की मूल्यों और संरचना से मेल नहीं खाती थी, जिससे टकराव होता था।
  8. मेसोपोटामिया जैसे क्षेत्रों के ऐतिहासिक अभिलेखों में ऐसे हमलों का उल्लेख मिलता है।
  9. इन कारणों से खानाबदोशों को शहरी जीवन की शांति और विकास के लिए खतरा माना जाता था।

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