कक्षा 12 इतिहास अध्याय 10 के नोट्स हिंदी में
विद्रोही और राज notes
यहाँ हम कक्षा 12 इतिहास के 10th अध्याय “विद्रोही और राज” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में विद्रोही और राज से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
कक्षा 12 इतिहास अध्याय 10 के नोट्स हिंदी में, विद्रोही और राज notes

class 12 History chapter 10 notes in hindi
1857 का विद्रोह :-
- मेरठ छावनी में सिपाहियों ने 10 मई 1857 की दोपहर पश्चात विद्रोह कर दिया।
- पैदल सेना से शुरू ये विद्रोह शीघ्र ही घुड़सवार फ़ौज तथा फिर शहर तक फैल गई।
- शहर एवं आसपास के गाँव के लोग सिपाहियों के साथ जुड़ गए।
- सिपाहियों ने शस्त्रागार पर अपना कब्जा जमा लिया जहाँ हथियार तथा गोला-बारूद रखे हुए थे।
- इसके बाद गोरों को निशाना बनाया तथा उनके बंगलों, तथा उसके सामानों को बर्बाद करना व् जलना – फूँकना आरंभ कर दिया।
- रिकॉर्ड दफ्तर, जेल सरकारी खजाने, डाकखाने, अदालत, जैसी सरकारी इमारतों को लूटकर बर्बाद किया जाने लगा।
- सम्पूर्ण शहर को दिल्ली से जोड़ने वाली टेलीग्राफ लाइन को काट दिया गया।
- अँधेरा होते ही एक जत्था घोड़ों पर चढ़कर दिल्ली की ओर चल पड़ा।
- 11 मई को दिल्ली पहुंच कर मुग़ल सम्राट बहादुर शाह को सारी बात बताई और उनसे आग्रह किया की नेतृत्व आप कीजिए, बहादुर शाह के पास बात मानने के अलावा कोई विकल्प नही था,
- उत्तर भारत में जैसे ही पता चला की दिल्ली पर विद्रोहियों का कब्जा हो चूका है तथा बहादुर शाह ने विद्रोह को अपना समर्थन दे दिया है, विद्रोह और तेजी फैलने लगा।
1857 के विद्रोह के क्या कारण थे ?
1. सामाजिक कारण
- अंग्रेज ने बहोत से परिवर्तन किए जिससे भारतीयों को दुःख हुआ ।
- सती प्रथा पर रोक लगाना।
- धर्म परिवर्तन को प्रोत्साहन ।
- ट्रेन में सीट उपर नीचे बनाना ।
- विधवा विवाह कराना।
- अंग्रेज अधिकारी द्वारा भारतीयों के प्रति तिरस्कार पूर्ण दृष्टिकोण रखना।
- भारतियों को ये लग रहा था कि ये पश्चिमी सभ्यता को लादना चाहते है।
2. धार्मिक कारण
- भारतीय सैनिकों को गाय और सूअर की चर्बी चढ़े कारतूस दिए जिन्हें मुंह से काटना पड़ता था। इससे सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंची।
- भारत में ईसाई धर्म प्रसार हेतु लालच देकर लोगों का धर्म परिवर्तन किया।
- ईसाई धर्म स्वीकार करने वालों को नौकरियां आसानी से मिल जाती थी।
- हिन्दू तथा मुस्लिम लोगो का धर्म भ्रष्ट करना।
3. राजनीतिक कारण
- अंग्रेजी सरकार ने निःसंतान शासकों द्वारा बच्चे गोद लिये जाने की परंपरा को अवैध घोषित कर उनके राज्यों पर कब्जा किया
- लार्ड डलहौजी तथा लार्ड वेलेजली साम्राज्यवाद नीति ।
- नाना साहब और लक्ष्मीबाई के साथ अनुचित व्यवहार ।
- राजाओं के रियासतों पर कब्ज़ा कर लेना ।
- नये-नये प्रकार के कर व्यवस्था लागू करना।
- अंग्रेजों द्वारा जनता पर अत्याचार करना ।
4. आर्थिक कारण
- जमीदारो की जागीरे छीन ली गई, जमींदारों की जमीनों को नीलम कर दिया गया।
- गांव पर कब्जा कर लेना।
- राजस्व नीति लगाना ।
- हस्तशिल्प उद्योग का पतन होना।
- जो लोग शिक्षित भारतीय थे उनको भी अंग्रेजों के समान उच्च पद तथा सम्मान नहीं दिया जाता था।
- देश का धन अंग्रेज बाहर भेजने लगे जिससे आर्थिक असंतोष फैला और विद्रोह का रूप ले लिया।
5. सैनिक कारण
- भारतीय सिपाहियों को कमतर नस्ल का मानना।
- सैनिकों का अपमान करना।
- सिपाहियों के प्रति गली गलोज और शारीरिक हिंसा करना।
- भेदभाव की नीति अपनाना – समान वेतन और समान नियम न होना।
- चिकनाई युक्त कारतूसों के प्रचलन से सैनिकों को गहरा चोट पहुंचा ।
6. तत्कालीन कारण
- भारतीय सैनिकों को गाय और सूअर की चर्बी चढ़े कारतूस दिए जिन्हें मुंह से काटना पड़ता था ।
- इससे सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंची, इस सुचना से हिन्दू और मुसलमान दोनों ही नाराज होकर इन कारतूसों के प्रयोग से इंकार कर दिया।
- भारतियों को यह लगा कि अंग्रेज उनका धर्म भ्रष्ट कर के उन्हें ईसाई बनाना चाहते हैं।
1857 के विद्रोह में शामिल नेताओं के नाम :
1. झांसी:-
रानी लक्ष्मीबाई (पुत्र गोद लेना)
2. अवध:-
बिरजिस कद्र (वाजिद अली को राजा के पद से हटाना, पेंशन खत्म करना)
3. कानपूर:-
नाना साहिब (लार्ड डलहौजी ने उनकी पेंशन बंद कर दी थी इनके पास और कोई विकल्प नही था)
4. आरा (बिहार) :
कुँवर सिंह ने जनता के आग्रह पर नेतृत्व किया (आरा के स्थानीय जमींदार)
5.दिल्ली :-
- बहादुर शाह ज़फ़र (जनता का आग्रह मान लिया और नेतृत्व किया)
- इस युद्ध में हर वर्ग शामिल था जैसे- जमीदार, ताल्लुकदार, किसान, व्यापारी, सैनिक, राजा, पंडित, मोलवी इत्यादी।
विभिन्न सामाजिक समूहों की दृष्टि में कितना फर्क था ?
1) शासक वर्ग, राजा, नवाब:-
बहादुर शाह, नाना साहिब, लक्ष्मी बाई, कुंवर सिंह आदि अपनी खोई हुई सत्ता प्राप्त करना चाहते थे जिसके लिए शासकों ने अपने अपने क्षेत्रों से लोगों का नेतृत्व किया।
2) जमींदार, तालुकदार:-
- अंग्रेजों ने जमींदारों तथा तालुकदारों को उनकी सत्ता से बेदखल कर दिया था।
- उनकी जागीरों को नीलाम कर दिया था तथा गाँवो पर कब्जा कर लिया था।
- जमींदार अंग्रेजी राज को समाप्त करके अपनी संपत्ति को वापस पाना चाहते थे।
3) किसान वर्ग:-
- अंग्रेजों ने तरह तरह के राजस्व लगा दिए जिससे किसानों को लगान चूका पाना मुश्किल होता था।
- उनकी फसलों के उचित मूल्य नही मिलता था।
- कभी कभी उनको उनकी जमीनों से बेदखल कर दिया जाता था।
- किसान साहूकारों तथा ऋणदाताओं के चंगुल में फंस जाते थे।
- किसान इन सब चीजों में सुधार चाहते थे, जिससे उनकी जिंदगी बेहतर हो पाए।
4) व्यापारी वर्ग:-
- अंग्रेजों ने उद्योगों को अपने हाथो में ले लिया था।
- टैक्स की कीमत बढ़ा दिए थे।
- व्यापारियों को अपनी आजीविका चलाने के लिए छोटे-मोटे व्यापार करना पड़ रहा था।
- व्यापारी चाहते थे की टैक्स की कीमत कम किया जाए तथा उद्योगों पर एकाधिकार पाना चाहते थे।
5) सैनिक:-
- भारतीय सिपाहियों को कमतर नस्ल का मानना ।
- सैनिकों का अपमान करना।
- सिपाहियों के प्रति गली गलोज और शारीरिक हिंसा करना ।
- भेदभाव की नीति अपनाना समान वेतन और समान नियम न होना।
- चिकनाई युक्त कारतूसों के प्रचलन से सैनिकों को गहरा चोट पहुंचा। (सैनिक चाहते थे उनको इज्जत मिले, अच्छा वेतन मिले, कारतूस युक्त गोली को प्रयोग न करना)।
6) धार्मिक नेता (पंडित तथा मौलवी):-
- पंडित और मौलवी दोनों ने ईसाई धर्म को फैलने का विरोध किया।
- वे चाहते थे की पश्चिमी संस्कृति यहां हावी न हो।
- धर्म को भ्रष्ट ना किया जाए।
- लोगो का धर्म परिवर्तन न किया जाए।
अफवाहे और भविष्यवाणियाँ
- अफवाहें और भविष्यवाणियों के जरिए लोगो को उकसाया जा रहा था।
- कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी का लेप यह भी अफवा फैली।
- आटे में सूअर और गाय की हड्डी का चूर्ण मिलाया जा रहा था। अंग्रेज हिन्दुओं को ईसाई बनाना चाह रहे है।
- अफवाह यह भी आई थी की ब्राम्हण सिपाहियों से जब नीची जाति के खलासी ने पानी मांगा तो ब्राम्हण ने यह कह कर मना कर दिया कि “निची जाति” के स्पर्श से लोटा अपवित्र हो जायेगा। खलासी ने उत्तर दिया की वैसे भी तुम्हारी जाति भ्रष्ट होने वाली है, कारतूस को मुंह से खोलना पड़ेगा
- प्लासी की जंग 1757 के 100 साल बाद 23 जून 1857 को देश में अंग्रेजी राज खत्म हो जाएगा।
- चपाती बाटने की अफवाह (इसका कारण आज तक नी पता चला आखिर क्यों)।
सहायक संधि
सहायक संधि लार्ड वेलेज्ली द्वारा 1798 में तैयार की गई एक संधि थी।
अंग्रेजी के साथ यह संधि करने वालों को कुछ शर्ते स्वीकार करनी पड़ती थी।
- अंग्रेज अपने सहयोगी की बाहरी तथा आंतरिक चुनौतियों से सुरक्षा करेंगे।
- सहयोगी पक्ष के भूक्षेत्र में एक अंग्रेजी सैनिक टुकड़ी तैनात रहेगी।
- सहयोगी पक्ष को इस टुकड़ी के देख-रेख की व्यवस्था करनी होगी।
- सहयोगी पक्ष न तो किसी अन्य शासक के साथ संधि कर सकेगा तथा न ही अंग्रेजों की अनुमति के बगैर किसी युद्ध में भाग लेगा।
अवध में विद्रोह इतना व्यापक क्यों था
- 1801 में अवध पर सहायक संधि थोप दी गई।
- 1856 में अवध रियासत को ब्रिटेन साम्राज्य में स्थापित किया।
- नवाब की सेना खत्म कि गई, रियासत में अंग्रेजी टुकड़ी तैनात की गई।
- नवाब का महत्व घट गया और विद्रोह मुखिया, ताल्लुकदारों पर से उसका नियंत्रण हट गया ।
- अवध की जमीन नील और कपास की खेती के लिए अच्छी थी।
- 1856 में लार्ड डलहौजी द्वारा अवध पर कब्जा करना इससे इलाकों और रियासतों में गहरा असंतोष था | अवध के लोगो में भी बहुत गुस्सा था ।
- नवाब को यह कहकर हटाया गया की वे अच्छा शासन नही चला रहे।
- नवाब बहुत लोकप्रिय थे (लखनऊ से कानपूर तक )
- अवध में विभिन्न प्रकार की पीड़ाओं ने राज-कुमारो, ताल्लुकदारों, किसानो और सिपाहियों को एक दुसरे से जोड़ दिया।
- अंग्रेजो के आने से सब कुछ बिखर गया था।
- सिर्फ नवाब नही बल्कि ताल्लुकदारों को भी लाचार कर दिया गया ।
- अंग्रेजों के आने से पहले ताल्लुकदारों के पास सिपाही होते थे, किले भी होते थे।
- नवाब को कुछ राजस्व चुका कर आराम से रहते थे।
- अंग्रेजो ने ताल्लुकदारों की सेना भंग कर दी।
- किसानों से राजस्व मनमाना वसूला जाने लगा ।
1857 की क्रांति का
1857 की क्रांति का प्रतीक क्या था ?
1857 की क्रांति का प्रतीक चिन्ह कमल का फुल और चपाती थे ।
1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश जनरल कौन था
1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश जनरल कैनिग था ।
1857 का विद्रोह किन किन लोगो के विरुद्ध किया गया था
1857 का विद्रोह मुख्य रूप से अंग्रेजो के विरुद्ध किया गया था लेकिन इसमें अमीर लोग, साहूकार तथा अन्य लोग जो किसानो से पैसे लुटते थे उनको भी निशाना बनाया गया था।
विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए क्या तरीके अपनाए गए?
1. राजस्व समय पर न देने पर :-
यदि जमींदार कंपनी को तय तारीख तक राजस्व जमा नहीं करता था, तो जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी।
2. सूर्यास्त कानून के कारण :-
यदि जमींदार सूर्यास्त तक भुगतान नहीं करता था, तो उसकी जमीन तुरंत नीलाम की जा सकती थी।
3. कंपनी का पक्का राजस्व सुनिश्चित करना :-
ब्रिटिश सरकार चाहती थी कि राजस्व हर हाल में मिले, इसलिए देर होने पर जमींदारी छीनना आसान तरीका था
4. जमींदारों को नियंत्रण में रखने के लिए :
नीलामी का डर जमींदारों को कंपनी के प्रति हमेशा वफादार और आज्ञाकारी बनाए रखता था।अधिकार कंपनी का था।
विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए क्या तरीके अपनाए गए?
- सभी वर्गो से जाति भेद भाव के बिना एकता की अपील की गई।
- मुस्लिम राजाओं द्वारा की गई घोषणा में हिन्दुओं का ध्यान रखा गया।
- हिन्दू और मुस्लिम की भावनाओं को ध्यान में रखा गया।
- बहादुर शाह का नेतृत्व था।
- हिन्दू और मुस्लिम एक होकर रहे, एकता बनाए रखने के लिए नारे दिए गए।
- अंग्रेजो ने प्रयास किया हिन्दू और मुस्लिम को लडाने की लेकिन ऐसा फर्क नही दिखा।
- अंग्रेज शासन के दिसंबर 1857 ई, में पश्चिमी उत्तर प्रदेश म स्थित बरेली के हिन्दुओं को मुसलमानों के खिलाफ करने के लिए 50,000 रुपए खर्च किए। उनकी यह कोशिश नाकामयाब रही।
अंग्रेज ने विद्रोहियों को कुचलने के क्या तरीके अपनाएं ?
- अंग्रेजो ने ब्रिटेन से बड़ी मात्रा में सैनिक सहायता मंगवाई थी।
- अंग्रेज ने उत्तर भारत में मार्शल ला लागू किया, सैन्य अधिकारीयों और आम ब्रिटेनियों को विद्रोह के संदिग्ध भारतीय को दंडित करने की शक्ति दी गई थी।
- जहाँ विद्रोह ज्यादा हुआ था वहाँ अंग्रेजो ने घोर अत्याचार किया।
- विद्रोही सैनिक को पकड़ कर मौत के घाट उतार दिया।
- “फुट डालो और शासन करो” की नीति के अनुसार हिन्दू तथा मुस्लिम में दरार डालने का प्रयास किया।
- विद्रोह करने वाले के लिए सिर्फ एक ही सजा थी – सजा-ए-मौत
- “कोलकता और पंजाब’ दोनों तरफ से हमले कर दिया ।
- जमींदारों को आश्वाशन दिया कि जागीरे लौटा दी जाएगी।
- जो जमींदार विद्रोह में शामिल था उसे सजा दी जाएगी।
- नए कानूनों के तहत विद्रोही सैनिकों को पकड़कर तोप से उड़ा दिया गया।
1857 के विद्रोह के बारे में चित्रों से क्या पता लगता है ?
1) रक्षकों का गुणगान:-
अंग्रेजो को बचाने और विद्रोहियों को कुचलने वाले अंग्रेज नायकों का गुणगान किया है
2) भारी हानि:-
1857 के विद्रोह के समय हुई तबाहि को प्रदर्शित किया गया है। एक नष्ट मस्जिद और बाजिद अली द्वारा बनवाया गया सिकंदर बाग खंडहर के रूप में दर्शाया गया।
3) वीरता की मूर्ति :-
विद्रोहियों के हमले से अपने को बचाती हुई अंग्रेज महिलाओं को वीरता के रूप में प्रदर्शित किया।
4) भयानक तबाही का प्रदर्शन :-
- 1857 के विद्रोह के चित्रों से हमें यह पता चलता है कि 1857 का विद्रोह इतना भयानक था जिसमें जान और माल की हानि हुई।
- ब्रिटिश समाचार पत्रों में भारत में घटित हिंसा के चित्र एवं खबरें खूब छपती थी जिनको देखकर और पढ़कर ब्रिटेन की जनता प्रतिशोध तथा सबक सिखाने की मांग कर रही थी
- निसहाय औरतों एवं बच्चों के चित्र भी बनाए गए। ‘स्मृति में’ नामक चित्र में अंग्रेज औरतें एवं बच्चे एक घेरे में एक-दुसरे से लिपटे दिखाई देते हैं वे लाचार एवं मासूम दिख रहे हैं
- विद्रोह के बारे में प्रकाशित चित्रों में बदले की भावना के उफान में विद्रोहियों की निर्मम हत्या का प्रदर्शन हैं ।
1857 के घटनाक्रम को निर्धारित करने में धार्मिक विश्वासों की किस हद तक भूमिका थी ?
- मेरठ से दिल्ली आने वाले सिपाहियों ने बहादुर शाह को उन कारतूसों के बारे में बताया था जिन पर गाय और सूअर की चर्बी का लेप लगा था । उनका कहना था की यदि वे इन कारतूसों को मुंह से लगायेंगे तो उनकी जाति और धर्म दोनों भ्रष्ट हो जायेगे।
- अंग्रेजो ने सिपाहियों को बहुत समझाया की ऐसा नहीं है लेकिन यह अफवाह उत्तर भारत की छावनियों में जंगल की आग की तरह फैलती चली गई।
- कमांडेंट कैप्टेन राइट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था की दमदम शस्त्रागार में काम करने वाले नीची जाति के एक खलासी ने जनवरी 1857 के तीसरे सप्ताह में एक ब्राम्हण सिपाही से पानी मांगा था।
- रिपोर्ट के अनुसार इस पर खलासी ने जवाब दिया कि जल्दी ही तुम्हारी जाति भ्रष्ट होने वाली है क्योंकि अब तुम्हे गाय और सूअर की चर्बी लगे कारतूसों को मुँह से खींचना पड़ेगा।
- इस रिपोर्ट की विश्वनीयता के बारे में कहना मुश्किल है लेकिन इसमें कोई संदेह नही की जब धर्म भ्रष्ट होने की अफवाह फैलनी शुरू हुई तो अफसरों के सारे आश्वासन बेकार मने गए और सिपाहियों में एक गहरा गुस्सा पैदा कर दिया ।
- भारतीय लोगों का यह मानना था की अंग्रेज ने हिन्दुओं और मुसलमानों की जाति और धर्म को नष्ट करने के लिए गहरी साजिश रची है। अफवाह फैलाने वालों का यह कहना था की अंग्रेजो ने बाजार में मिलने वाले आटो में गाय और सुअर की हड्डियों का चुरा मिलवा दिया है
- शहरों और छावनियों में सिपाहियों और आम लोगों ने आटे को छूने से भी इनकार कर दिया।
- गवर्नर जनरल के तौर पर हार्डिंग ने साजो समान के आधुनिकीकरण का प्रयास किया।
- उसने जिन एनफील्ड राइफलो का इस्तेमाल किया था उसमे चिकने कारतूसों का इस्तेमाल होता था । जिनके खिलाफ सिपाहियों ने विद्रोह किया था
1857 के विद्रोह के दौरान सरकार ने अवध के ताल्लुकदारों की सत्ता किस प्रकार छीन ली
- अवध के समूचे में ताल्लुकदारों की जागीरे और किले बिखरे हुए थे
- ये लोग सदियों से अपने इलाकों में जमीन और सत्ता पर नियंत्रण रखते आए अंग्रेज के आने से पहले ताल्लुकदारों के पास सिपाही होते थे तथा किले भी होते थे
- अंग्रेज इन ताल्लुकदारों को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे इसलिए अवध के अधिग्रहण के तुरंत बाद ताल्लुकदारों की सेनाएं भाग कर दी गई औ उनके दुर्ग ध्वस्त कर दिए गए।
- ब्रिटिश भू-राजस्व नीति ने तालुकदारों की शक्ति एवं सत्ता को और अधिक चोट पंहुचाई
- 1856 में एकमुश्त बंदोबस्त के नाम से ब्रिटिश भू-राजस्व व्यस्था लागू कर दी गई
- एक मुस्त बदोबस्त के अंतर्गत ताल्लुकदारों को उनकी जमीनों से बेदखल किया जाने लगा।
- दक्षिण अवध के ताल्लुकदारों के सबसे अधिक क्षति उठानी पड़ीं, कुछ के तो आधे से भी अधिक गाँव हाथ से चले गए।
कला और साहित्य ने रानी लक्ष्मीबाई को 1857 की क्रांति की नायिका के रूप में कैसे पेश किया है ?
- इतिहास लेखन की तरह कला और साहित्य ने भी 1857 की क्रांति के नायकों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने में योगदान दिया है।
- राष्ट्रवादी कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने रानी लक्ष्मीबाई की स्मृति में खूब लड़ी मर्दानी यो तो झांसी वाली रानी थी जैसी कालजयी कविता की रचना की।
- रानी लक्ष्मी बाई को एक ऐसी मर्दाना शख्सियत के रूप में चित्रित किया जाता था जो दुश्मनों का पीछा करते हुए और ब्रिटिश सिपाहियों को मौत की नींद सुलाते हुए आगे बढ़ रही है।
- लोक छवियों में रानी लक्ष्मीबाई को प्रायः अन्याय और विदेशी शासन के दृढ प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में चित्रित किया गया है।
1857 की क्रांति में प्रमुख भूमिका निभाने वाली दो महिलाओं के नाम लिखिए।
1. रानी लक्ष्मीबाई
रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवम्बर, 1835 ई. को काशी में हुआ था। इनका लाम मणिकर्णिका था। प्यार से लोग उन्हें मनु कहकर बुलाते थे। सुभद्राकुमारी चौहान ने उनका नाम छबीली बताया है।
2. बेगम हजरत महल
बेगम हजरत महल के बचपन का कोई इतिहास नहीं मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि उस समय की मशहूर कुटनियो, अम्मन और अमामन के द्वारा यह बालिका वाजिद अली के हरम के वास्तें बेची गई थी। इसे बचपन में नाच-गाने की शिक्षा मिली, ये छोटी उम्र में ही महक परी के रूप में वाजिद अली के हरम में दाखिल हुई थी।
1857 की क्रांति में शाहमल के योगदान का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
- उत्तर प्रदेश के बड़ौत परगना के क्षेत्र के किसानों और काश्तगारों को अंग्रेजी शासन का प्रतिरोध के लिए शाहमल ने संगठित किया।
- शाहमल के नेतृत्व में व्यापक विद्रोह हुआ।
- शाहमल ने अंग्रेज अधिकारी के बंगले पर कब्जा करके उसे न्याय भवन की संज्ञा दी और प्रशासनिक व्यवस्था लागू की।
- स्थानीय लोग उन्हें राजा नाम से संबोधित करते थे।
- अंग्रेजों के साथ संघर्ष में जुलाई 1857 को शाहमल वीरगति को प्राप्त हुए।
लार्ड डलहौजी का व्यपगत सिद्धान्त / हड़प नीति क्या थी ?
- लार्ड डलहौजी ने व्यपगत सिद्धान्त / हड़प नीति द्वारा कम्पनी के राज्य का विस्तार किया।
- इस नीति के तहत देशी राज्यों के शासकों पर दत्तक पुत्र गोद लेने की प्रथा पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगा दिया और उनकी मृत्यु के पश्चात उनके राज्य को कम्पनी राज्य में सम्मिलित कर लिया गया।
- इस नीति के तहत झांसी और सतारा का विलय कम्पनी राज्य में कर लिया गया। गोद निषेध प्रथा के अतिरिक्त अवध जैसे अंग्रेज समर्थक राज्य को भी 1856 में कुशासन के आरोप के आधार पर विलय किया गया।
"ये गिलास फल एक दिन हमारे ही मुँह में आकर गिरेगा" उक्त कथन कब, किसने और किसके बारे में कहा ?
1851 में गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी ने अवध रियासत के बारे में कहा था कि ये गिलास फल एक दिन हमारे ही मुँह में आकर गिरेगा।
यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों ने भारत में नगरीकरण को क्यों बढ़ावा दिया ? दो कारण बताएँ।
- पुर्तगालियों ने 1510 में गोवा में, डचों ने 1605 में मछलीपट्टनम में, अंग्रेजों ने मद्रास में 1639 में तथा फ्रांसीसियों ने 1673 में पाण्डिचेरी में | अपने-अपने केन्द्र स्थापित कर लिये थे।
- प्लासी के युद्ध (1757 ई.) के पश्चात् मद्रास, कलकत्ता, बम्बई जैसे नगर राजनैतिक तथा आर्थिक शक्ति के केन्द्र के रूप में सामने आये। इस प्रकार यूरोपियन कम्पनियों की व्यापारिक गतिविधियों एवं साम्राज्य स्थापना की महत्वाकांक्षा ने नगरीकरण की प्रक्रिया को तीव्र कर दिया।
चॉल इमारतों को समझाइए।
- औपनिवेशिक काल में मुंबई में अधिक-से-अधिक मजदुरों को रहने के लिए कम जगह में चॉल इमारतें बनाई जाती थी।
- चॉल इमारतें सामान्यतः चार मंजिला इमारतें होती थी।
- इसमें एक कमरे के घर होते थे।
- शौचालय के रूप में हर मंजिल पर कॉमन शौचालय होता था।
- ये इमारतें मुंबई की पहचान थी। आजकल इन इमारतों की जगह बहुमंजिला इमारतें बनने लगी हैं।
सर एडविन लुटियन्स कौन थे?
- सर एडविन लुटियन्स एक आर्किटेक्ट थे। इन्होंने ही नई दिल्ली की योजना तैयार की थी।
- दिल्ली के राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, इंडिया गेट का डिजाइन एडविन लुटियन्स ने ही तैयार किया था।
- इन्होंने ही दिल्ली के प्रशासनिक इलाके का खाका तैयार किया था।
- इसीलिए इसे आज भी लुटियंस क्षेत्र कहा जाता है।
सिविल लाइन्स का विकास किस प्रकार हुआ?
- 1857 के विद्रोह के पश्चात् अंग्रेजों ने अपनी सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया था।
- इसीलिये अंग्रेजों को नगरों के देशी निवासियों से दूर एक पृथक् स्थान पर बसाया जाता था।
- अंग्रेजों के इन निवास क्षेत्रों को “सिविल लाइन” के नाम से जाना जाने लगा।
- सिविल लाइन क्षेत्र काफी व्यवस्थित होते थे।
- इनमें बड़े-बड़े बंगले, बगीचे, सैनिकों के लिए बैरकें, परेड मैदान तथा गिरजाघर स्थित होते थे।
1857 के विद्रोह की असफलता के कारणों का संक्षिप्त उल्लेख करें।
1857 के विद्रोह में भारतीय जनता ने जी-तोड़ कर अंग्रेजों का सामना किया, किन्तु कुछ कारणों से इस विद्रोह में भारतवासियों को असफलता मिली।
इस विफलता के निम्न कारण थे-
1. यह विद्रोह निश्चित तिथि से पहले आरंभ हो गया। इसकी तिथि 31 मई निर्धारित की गई थी, किंतु यह 10 मई, 1857 को शुरू हो गया।
2. यह स्वतंत्रता संग्राम सारे भारत में फैल गया, परिवहन तथा संचार के अभाव में भारतवासी इस पर पूर्ण नियंत्रण न रख सके।
3. भारतवासियों के पास अंग्रेजों के मुकाबले हथियारों का अभाव था।
4. भारत के कुछ वर्गों ने इस विद्रोह में सक्रिय भाग नहीं
5. भारत में अंग्रेजों के समान कुशल सेनापतियों का अभाव
6. अंग्रेजों को ब्रिटेन से यथासमय सहायता प्राप्त हो गई।
7. क्रांतिकारियों में किसी एक योजना एवं निश्चित उद्देश्यों की कमी थी।
मंगल पांडे का संक्षिप्त परिचय
- मंगल पांडे को 1857 के विद्रोह का प्रथम जनक, महान देशभक्त तथा क्रांतिकारी माना जाता है।
- वह बैरकपुर (बंगाल) की 34वीं (सैन्य) बटालियन का एक साधारण सिपाही ही था।
- उसने अपनी छावनी में चर्बी वाले कारतूस की बात पहुँचाई तथा अंग्रेज अधिकारियों के धर्म विरोधी आदेश की अवहेलना की।
- सारजेन्ट मेजर हगसन के आदेशानुसार जब किसी भी भारतीय सैनिक ने पांडे को कैद नहीं किया तो उसने हगसन तथा लैफ्टिनेंट बाम को उसके घोड़े सहित ढेर कर दिया।
- कालान्तर में उसे कैद कर लिया गया तथा 8 अप्रैल, 1857 को फाँसी दे दी गई। उसकी वीरता एवं कुर्बानी ने कालान्तर में मेरठ सैनिक छावनी के विप्लव की भूमिका तैयार की।
ncert Class 12 History Chapter 10 Notes in Hindi
के notes आपको कैसे लगे अपनी राय जरूर दे