कक्षा 12 इतिहास अध्याय 7 के नोट्स हिंदी में
एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर notes

यहाँ हम कक्षा 12 इतिहास के 7th अध्याय “एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर ” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर  से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।

ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।

कक्षा 12 इतिहास अध्याय 7 के नोट्स हिंदी में , एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर notes

कक्षा 12 इतिहास अध्याय 7 के नोट्स हिंदी में, एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर notes

class 12 History chapter 7 notes in hindi

विजय नगर

  1. चौदहवीं सदी में स्थापित विजयनगर साम्राज्य उत्तर में कृष्णा नदी से लेकर भारतीय प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला हुआ था ।
  2. विजय नगर या “विजय का शहर” एक शहर एवं एक साम्राज्य, दोनों ही नामों से जाना जाता था | 
  3. 1565 में इस पर हमला कर इसे लुटा गया व बाद में यह उजड़ गया ।
  4. यद्यपि सत्रहवीं-अठारहवीं शताब्दियों तक यह पूर्णत: नष्ट हो गया था, लेकिन फिर भी कृष्णा – तुंगभद्रा दोआब क्षेत्र के निवासियों की स्मृतियों (यादों) में यह जिन्दा रहा।
  5. उन्होंने इसे हम्पी नाम से स्मरण रखा ।

हम्पी की खोज

  1. हम्पी एक शहर था जिसे पम्पा देवी के नाम से बनाया गया था।
  2. पंपादेवी पार्वती माता का स्वरूप है जिसकी शादी (विरूपाक्ष (शिव जी) के साथ हुई थी।
  3. हम्पी के खंडहरों की खोज (1800 ई में एक अभियंता एवम पुराविद् कर्नल मैकेन्जी ने की थी।
  4. मैकेन्जी, ईस्ट इंडिया कम्पनी में कार्यरत थे, उन्होंने इस जगह का प्रथम सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया।
  5. उनके द्वारा प्राप्त आरंभिक जानकारियाँ विरूपाक्ष मंदिर तथा पंपादेवी के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थीं ।
  6. कालांतर में 1856 ई. से छाया चित्रकारों ने यहाँ की इमारतों के चित्र संकलित करने शुरू किए जिससे शोधकर्ता उनका अध्ययन कर सके |
  7. 1836 से ही अभिलेखकर्ताओं ने हम्पी के दुसरें मंदिरों से अनेक दर्जन अभिलेख को एकत्रित
  8. करना शुरू कर दिया | जिससे इतिहास का पुनर्निर्माण करने में इतिहासकारों को सहायता मिल सके।

विजय नगर की स्थापना

  1. ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार विजय नगर साम्राज्य की स्थापना दो भईयों – हरिहर तथा बुक्का – द्वारा 1336 में की गई थी ।
  2. विजय नगर तुंगभद्रा नदी के किनारे है और यहाँ पर आज -काल कर्नाटक राज्य है।
  3. 1565 ई. में विजय नगर साम्राज्य पर आक्रमण हुआ और इसे लुटा गया बाद में यह
  4. साम्राज्य उजड़ गया 17वीं से 18वीं शताब्दी तक यह पूरी तरह से नष्ट हो गया ।
  5. फिर भी कृष्णा / तुंगभद्रा दोआब क्षेत्र के लोगो की स्मृतियों में यह हम्पी के नाम से जीवित रहा।
  6. विजय नगर वस्त्रों, मसालों तथा रत्नों के अपने बाजारों के लिए विख्यात था |
  7. विजय नगर एक शहर और साम्राज्य दोनों ही था
  8. रायचूर (दोआब) :- दो नदियों के बीच के भाग को कहा जाता है और यह नही थी तुंगभद्रा नदी तथा कृष्णा नदी ।

अमर-नायक

  1. अमर नायक सैनिक कमांडर थे उन्हें राय द्वारा प्रशासन के लिए राज्य क्षेत्र दिए जाते थे
  2. वे किसानों, शिल्पकारों तथा व्यापारियों से भू राजस्व तथा अन्य कर वसूल करते थे ।
  3. वे राजस्व का कुछ हिस्सा निजी उपयोग के लिए अपने पास रख लेते थे जैसे घोड़ों और हाथियों के निर्धारित दल की देख-रेख के लिए अपने पास रख लेते थे ।
  4. और शेष भाग राजकोष में जमा करवा देते थे
  5. उनके दल आवश्यकता के समय विजय नगर के शासकों को सैनिक सहायता प्रदान करते थे।
  6. अमर नायक राजा को वर्ष में एक बार उपहार भेजा करते थे | वे अपनी स्वामी भक्ति प्रकट करने
  7. के लिए राज दरबार में उपहारों के साथ स्वयं उपस्थित होते थे |
  8. राजा कभी-कभी उन्हें एक से दुसरे स्थान पर स्थानांतरित करके उन पर अपना नियंत्रण दिखाता था किंतु सत्रहवीं शताब्दी में उनमें से अनेक नायकों ने अपने आजादी स्थापित कर ली |

नायक

  1. विजय नगर साम्राज्य में स्थानीय सेना प्रमुखों को नायक कहा जाता था |
  2. इनके पास सैन्य शक्ति होती थी
  3. नायक प्राय : किलो पर नियंत्रण रखते थे और उनके पास सशस्त्र समर्थक होते थे
  4. वे स्थान – स्थान पर घूमते रहते थे और कभी-कभी उपजाऊ भूमि कि तलाश में किसान भी उनका साथ देते थे ।
  5. यह प्राय: तेलगू तथा कन्नड़ भाषा बोलते थे | कई नायकों ने विजय नागर के शासको की प्रभू सत्ता के आगे समर्पण किया था
  6. परन्तु वे प्राय: विद्रोह कर देते थे और इन्हे सैनिक कारवाही द्वारा ही दबाया जाता था।

विजयनगर : राजधानी तथा उसके परिवेश(आसपास का क्षेत्र)

1. विजयनगर

  1. एक प्रसिद्ध राजधानी थी
  2. यह उस समय के सबसे मशहूर और समृद्ध शहरों में गिनी जाती थी।

2. खास भौगोलिक स्थिति

  1. तुंगभद्रा नदी के किनारे बसा था।
  2. चारों ओर ग्रेनाइट की पहाड़िया थीं जो इसे सुरक्षा देती थीं।

3. खूबसूरत और मजबूत निर्माण शैली

  1. यहाँ की इमारतें खास पत्थरों से बनाई जाती थीं।
  2. स्थापत्य (architecture) में मंदिर, मंडप, स्तंभ और द्वार बहुत सुंदर होते थे।

4. सुरक्षा की अच्छी व्यवस्था

  1. किलेबंदी, ऊंची दीवारें और मजबूत दरवाज़े बनाए गए थे।
  2. पहाड़ियों और नदी ने भी प्राकृतिक सुरक्षा दी।

5. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

  1. यहाँ कई मंदिर थे जैसे- विठ्ठल मंदिर, हज़ारा राम मंदिर।
  2. त्योहार, नाटक और संगीत जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे।

6. विकसित जल प्रबंधन प्रणाली

  1. बारिश कम होने के कारण जल संरक्षण की व्यवस्था थी।
  2. जलाशय, नहरें और हौज बनाए गए (जैसे- कमलपुरम जलाशय, हिरिया नहर)।

7. व्यापार का केंद्र

  1. देश-विदेश से व्यापारी यहाँ आते थे।
  2. मसाले, कपड़े, रत्न और हथियारों का व्यापार होता था।

8. आधुनिक शहर जैसा जीवन

  1. सड़कों, बाजारों, मंडियों की योजनाबद्ध बनावट थी।
  2. अमीरों और सामान्य लोगों के लिए अलग मोहल्ले थे।

किलेबंदियाँ तथा सड़कें

  1. विजय नगर शहर के विभिन्न भागों को विशाल किलेबंदी की दीवारों से घेरा गया था
  2. पंद्रहवीं शताब्दी में फारस के राजा द्वारा कालीकट भेजा गया दूत अब्दुर रज्जाक किलेबंदी से काफी प्रभावित हुआ तथा उसने दुर्गों की सात पंक्तियों का उल्लेख किया।
  3. इसने बताया की शहर, खेत और जंगलों को भी घेरा गया थी, सबसे बाहरी दीवार शहर के चारों तरफ बनी पहाड़ियों को परस्पर जोडती थी
  4. इसमें किसी भी प्रकार के गारे अथवा जोड़ने के लिए किसी भी वस्तु के निर्माण में कही भी इस्तेमाल नहीं किया गया था।
  5. पत्थर के टुकडें फनाकार थे, जिसके कारण वे अपनी जगह पर टिके रहते थे । दीवारों के भीतर का हिस्सा मिट्टी और मालवा के मिश्रण से बना हुआ था ।
  6. इस किलेबंदी की सर्वाधिक प्रभावशाली बात यह थी कि इससे खेतों को भी घेरा गया था ।
  7. अब्दुर रज्जाक लिखता है की” पहली, दूसरी तथा तीसरी दीवारों के मध्य जुडे हुए खेत, बगीचे और आवास है”।

1. पहली किलेबंदी :-

  1. शहर के चारों ओर बनी पहाड़ियों को आपस में जोडती थी ।
  2. किले बंद के अन्दर विशाल अन्नागार बनाये गए थे
  3. जंगल व कृषि क्षेत्र
  4. जलाशय

2. दूसरी किलेबंदी :-

नगरीय केंद्र के चारो ओर बनी थी।

3. तीसरी किलेबंदी :-

  1. शासकीय केंद्र को घेरा गया।
  2. किलेबंद बस्ती में जाने के लिए प्रवेश द्वार थे।
  3. प्रवेश द्वार पर मेहराब बनी थी।
  4. साथ ही द्वारो के ऊपर गुम्बद बनी थी।

किलेबंदी के फायदे

  1. बाहरी आक्रमण से सुरक्षा
  2. फसलों की सुरक्षा
  3. घुसपैठियों से सुरक्षा
  4. इन्ही दीवारों के अंदर अन्नागार बनाए गए थे। जंहा पर अन्न को सुरक्षित करके रखा जाता था ।

किलेबंदी की हानियाँ

  1. यह एक अत्यंत खर्चीली व्यवस्था थी
  2. रखरखाव करना मुश्किल था।

क्या कारण थे जिसकी वजह से फसलों के चारों तरफ किलेबंदी की गई थी ?

  1. फसलों की किलेबंदी करने का मुख्य कारण युद्ध की स्थिति में उन्हें दुश्मन की पहुंच से बचाना होता था
  2. किसी भी युद्ध की स्थिति में दुश्मन सबसे पहले राज्य की फसलों पर कब्ज़ा किया जाता था ताकि वह उस क्षेत्र में अपनी सेना का भरण पोषण कर सके ।
  3. इसलिए विजय नगर द्वारा फसलों की किलेबंदी की गई थी ताकि युद्ध की स्थिति में किसी भी दुश्मन के हाथ में वह फसलें न लग सके |
  4. इससे दुश्मन सेना के लिए अपना भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाता था और विजयनगर के लोगों के लिए खाद्य संकट भी उत्पन्न नहीं होता था।

विजय नगर में शासन

  1. विजयनगर के शासकों को राय कहा जाता था
  2. विजयनगर के सेना प्रमुख को नायक कहते थे

संगम वंश:

  1. विजय नगर की स्थापना हरिहर और बुक्का द्वारा 1336 में की गई थी।
  2. इनके पिता जी का नाम संगम था और इन्हीं के नाम पर इन्होने अपने वंश की स्थापना की ।
  3. इस तरह विजयनगर पर सबसे पहले संगम वंश ने शासन किया
  4. इनके अंतिम शासक विरूपाक्ष द्वितीय थे।

सुलुव वंश :

  1. सुलुव लोग संगम वंश के दौरान सैनिक कमांडर थे |
  2. संगम वंश के अंतिम शासक विरूपाक्ष द्वितीय को हराकर नरसिंह ने अपने शासन की स्थापना की।
  3. यही से सुलुव वंश की शुरुआत हुई। सुलुव वंश के अंतिम शासक नरसिम्हा राय द्वितीय थे।

तुलूव वंश :

  1. तुलुव के प्रथम शासक वीर नरसिंह द्वारा सुलुव वंश के अंतिम शासक को हराकर स्थापना की गई।
  2. इसी वंश के दौरान कृष्णदेव राय राजा बने।
  3. इन्हे विजयनगर का सबसे प्रतापी राजा माना जाता है।
  4. तुलुव वंश के आखिरी शासक सदाशिव थे।

अराविदु वंश :

  1. तिरुमल द्वारा तुलुव वंश के आखिरी शासक को हराकर अराविदु वंश की स्थापना की गई।
  2. अराविदु वंश के अंतिम शासक श्रीरंग तृतीय थे।

कृष्ण देव राय

  • जन्म – 14 जनवरी 1471
  • स्थान – हम्पी
  • वंश- तुलूव वंश
  • मृत्यु – 17 अक्टूबर 1529
  1. कृष्णदेव राय (1509-1529 ई.) विजयनगर के सर्वाधिक कीर्तिवान राजा थे। वे स्वयं कवि और कवियों के संरक्षक थे। इनकी भारत के प्राचीन इतिहास पर आधारित पुस्तक वंशचरितावली तेलुगु के साथ-साथ संस्कृत में भी मिलती है।
  2. 1509 में कृष्ण देव राय ने शासन संभाला इस दौर को विजयनगर का सबसे समृद्ध एवं खुशहाल दौर माना जाता है।
  3. कृष्णदेव राय ने विजयनगर की शासन व्यवस्था को मजबूत बनाया और कई प्रभावशाली क्षेत्रों की जीत कर हासिल किया ।

कृष्ण देव द्वारा किए गए कार्य :-

  1. 1512 में रायचूर दोआब (तुंगभद्रा और कृष्णा नदियों के बीच उपजाऊ क्षेत्र) को हासिल किया ।
  2. 1514 में उड़ीसा के शासकों को हराया ।
  3. 1520 में बीजापुर के सुल्तान को भी बुरी तरह से पराजित किया ।
  4. कृष्णदेव राय के दौर में राज्य सदैव युद्ध के लिए तैयार रहा।
  5. इन्हे आंध्र भोज यानी पुरे आंध्र का राजा की उपाधि भी दी गई थी।
  6. कृष्ण देव राय ने दो पुस्तकों की रचना की थी अमुक्तमल्यद (तेलुगु भाषा), जामवंती कल्याण (संस्कृत भाषा)
  7. कई बड़े बड़े मंदिरों का निर्माण कृष्ण देव द्वारा करवाया गया, विशाल मंदिरों में गोपुरम (विशाल प्रवेशद्वार) लगवाने का श्रेय भी कृष्णदेव राय को जाता है।
  8. जल की पूर्ति के लिए कमल पुरम जलाशय का निर्माण भी कृष्ण देव राय द्वारा करवाया गया।
  9. कृष्णदेव राय ने अपनी माता जी के नाम पर विजय नगर के पास ही एक नगलपुरम नामक उपनगर की स्थापना भी की।

विजय नगर का व्यापार

  1. विजय नगर में सेना घोड़ों पर निर्भर थी।
  2. इसलिए विजयनगर के शासकों द्वारा मध्य एशिया एवम अरब से घोड़ों का आयात किया जाता था।
  3. शुरुआत में यह व्यापार (अरब के व्यापारियों द्वारा नियंत्रित किया जाता था।
  4. विजयनगर में रहने वाले घोड़ों के व्यापारियों को कुदीरई चेट्टी कहा जाता था।
  5. विजयनगर मसालों रत्नों और वस्त्रों के बाजार के लिए प्रसिद्ध था
  6. विजयनगर की जनता समृद्धि थी और यहाँ पर महंगी विदेशी वस्तुओं की मांग अधिक थी।
  7. उच्च व्यापार के कारण राज्य को उच्च राजस्व प्राप्त होता था और इसी वजह से राज्य समृद्ध थे।

विजय नगर के शाही केंद्र के महत्व को विशेषकर उनकी महत्वपूर्ण इमारतों को स्पष्ट करों :-

  1. शाही/राजकीय केंद्र वस्ती के दक्षिण पश्चिम भाग में स्थित थी।
  2. इनमे 60 से ज्यादा मंदिर स्थित थे जो राजाओं की धार्मिक रूचि को दिखाता है।
  3. इसी क्षेत्र में एक विशाल संरचना पाई गई है जिसे राजा का भवन कहा जाता था | यहाँ पर दो प्रभावशाली मंच थे।
  4. जिन्हें सभा मंडप और महा नवमी डिब्बा कहा जाता है।

सभा मंडप

  1. यह एक ऊँचा मंडप है जो चारों ओर से दोहरी दीवारों से घिरा हुआ है और इसके बीच में एक गली है।
  2. इसके बीच में कई स्तम्भ है और इन स्तम्भों पर इस मंच की दूसरी मंजिल टिकी हुई है।
  3. दूसरी मंजिल पर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है।
  4. इसमें सभी स्तम्भ बहुत पास पास है इसीलिए इनके बीच में काफी कम खुला स्थान बचता है।
  5. कम जगह होने की वजह से ही इतिहासकार इस मंडप का अकरी समझ नही पाए क्योंकि इन स्तंभों के बीच की यह जगह बैठने एवं किसी भी प्रकार की सभा आयोजित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

महानवमी डिब्बा

  1. महानवमी डिब्बा एक विशालकाय मंच है।
  2. यह 11000 वर्ग फिट के क्षेत्र में फैला हुआ है एवं
  3. इसकी ऊँचाई लगभग 40 फीट तक है।
  4. इस मंच के आधार पर कुछ बहुत ही सुन्दर चित्र मिले है।

इससे जुड़े महोत्सव:-

  1. इस पर बड़े बड़े मेलों का आयोजन किया जाता था।
  2. मुख्य रूप से हिन्दू त्योहारों जैसे दशहरा दुर्गा पूजा आदि पर इन मेलों का आयोजन किया जाता।
  3. इस अवसर पर धर्म अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता था। जिसमे मूर्तियों की पूजा की जाति थी ।
  4. जानवरों की बली दी जाती थी और राज्य के अश्व की पूजा आदि की जाति थी।
  5. इसी दौरान नृत्य कुश्ती प्रतिस्पर्धा और सोभा यात्राओं का आयोजन किया जाता था।
  6. अपन त्योहारों के अंतिम दिनों में राजा अपने नायकों की सेना का निरीक्षण करता था, साथ ही राजाओं को उपहार भी दिया जाता था।

विठ्ठल मंदिर

  1. यह एक सुदृढ और दर्शनीय मंदिर था।
  2. यहां दीवार के नीचे से ऊपर तक तांबे के पात्र से बने हुए थे।
  3. मंदिर की छत पर जानवरों की मूर्ति बनी हुई थी।
  4. मंदिर के अंदर 2500 से 3000 जले हुए दीपक मिले हैं।
  5. यहां के पत्थरों पर स्त्री, कोमल फूल, जानवरों की चित्र की नक्काशी की गई है।
  6. यहां के आंगन में सूर्य देवता के ग्रेनाइट के रथ बने हैं।
  7. जिन के पहिए आज भी घूमते हैं परंतु सरकार ने इस को घुमाने पर बैन कर रखा है।
  8. और यहां विष्णु जी की पूजा की जाती है।

हजार राम मंदिर :-

  1. राजकीय केंद्र में स्थिति मंदिर में “हजार राम मंदिर”
  2. अत्यंत दर्शनीय है इसका प्रयोग संभवत: केवल राजा और उनके परिवार द्वारा ही किया जाता था।
  3. इस विशालकाय मंदिर है और इसकी दीवारों पर रामायण की कथाओं को चित्रों के रूप में उकेरा गया है।
  4. इसी कारण से इसे हजार राम मंदिर कहा जाता है।

लोटस महल (कमल महल) :-

  1. कमल महल कमरे के आकार का एक महल है।
  2. लोटस (कमल) महल राज्यकीय केंद्र के सबसे सुन्दर भवनों में एक है
  3. इसे यह नाम 19वीं शताब्दी के अंग्रेज यात्रियों ने दिया था |
  4. इतिहासकर इस बारे में निश्चित नहीं है की यह भवन किस कार्य के लिए बना था ।
  5. फिर भी मैकेंजी द्वारा बनाए गए मानचित्रों से यह अनुमान लगाया गया है कि यह परिषदीय सदन था जहाँ राजा अपने मंत्रियों के साथ बैठकर सलाह मशवरा किया करता था।

विजय नगर जल प्रणाली

  1. वैसे तो विजय नगर क्षेत्र चारों तरफ से नदियों से घिरा हुआ था । परन्तु मुख्य राजधानी विजयनगर जल के स्त्रोतों से काफी दूर थी
  2. विजयनगर के पास स्थित तुंगभद्रा नदी से एक प्राकृतिक जल कुंड का निर्माण होता था इसी जलकुंड से विजयनगर में पानी पहुंचाया जाता था ।

हौज

  1. तुंगभद्रा और कृष्णा नदी से कुछ छोटी-छोटी जलधाराएँ निकलती थी इन जलधाराओं पर का निर्माण किया गया था।
  2. इन बांधो से पानी को मानव निर्मित जलाशयों की ओर ले जाया जाता था इन जलाशयों को हौज कहा जाता था।
  3. इनमे से ही एक महत्वपूर्ण हौज (जलाशय) था कमलपुरम जलाशय

नहरें

  1. इसी के साथ – साथ कुछ छोटी-छोटी नहरों का निर्माण किया गया था जो विजयनगर के अलग – अलग क्षेत्रों में पानी की पूर्ति किया करती थी ।
  2. इसमें सबसे महत्वपूर्ण नहर थी हिरिया नहर।
  3. इससे आसानी से सामान्य जनता तक पानी पहुंचाया जाता था ।

जल - संपदा

तुंगभद्रा नदी और विजयनगर की भौगोलिक स्थिति

  1. उत्तर-पूर्व दिशा में बहने वाली तुंगभद्रा नदी के पास एक बड़ा प्राकृतिक जलकुंड (पानी का तालाब) है। यह विजयनगर की खासियत को बढ़ाता है। इस इलाके के चारों तरफ ग्रेनाइट की सुंदर पहाड़िया फैली हुई हैं, जो शहर को चारों ओर से घेरे हुए लगती हैं।
  2. इन पहाड़ियों से कई छोटी-छोटी जलधाराएँ निकलती हैं, जो जाकर तुंगभद्रा नदी में मिलती हैं। इन जलधाराओं के पास बांध बनाकर अलग-अलग आकार के हौज (जलाशय) बनाए गए थे।
  3. क्योंकि इस इलाके में बारिश कम होती थी, इसलिए पानी को इकट्ठा करने और उसे शहर तक पहचाने के लिए बहुत अच्छे इंतज़ाम किए गए थे।
  4. कमलपुरम जलाशय और हिरिया नहर इसके कुछ अच्छे उदाहरण हैं।

कमलपुरम जलाशय

  1. सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हौजों में एक का निर्माण पंद्रहवी शताब्दी के शुरुआत सालों में हुआ जिसे आज कमलपुरम जलाशय कहा जाता है।
  2. इस हौज के पानी से न सिर्फ आस पास के खेतों को सींचा जाता था अपितु इसे एक नहर के जरिए
  3. “राजकीय केंद्र” तक भी ले जाया गया था ।

हिरिया नहर

  1. सबसे महत्त्वपूर्ण जल संबंधी संरचनाओं में से एक, हिरिया नहर को आज भी भग्नावशेषों के मध्य देखा जा सकता है।
  2. इस नहर में तुंगभद्रा पर निर्मित बांध से पानी लाया जाता था तथा इसे “धार्मिक केंद्र” से “शहरी केंद्र” को पृथक करने वाली घाटी को सिंचित करने में इस्तेमाल किया जाता था |
  3. शायद इसका निर्माण संगम वंश के शासकों द्वारा कराया गया था।

विजय नगर के पतन का कारण

1. पड़ोसी राज्यो से शत्रुता

  1. विजयनगर के शासक सदैव पड़ोसी राज्यो से संघर्ष करते रहे।
  2. बहमनी के राजाओं से विजयनगर नरेशो का झगड़ा हमेशा होता रहता था।
  3. इसमे सम्राज्य की स्तिथि शक्तिहीन बन गई

2. निरकुंश शासक

  1. अधिकांश शासक निरकुंश शासक थे।
  2. वे जनता में लोकप्रिय नही बन सके ।

3. आयोग उतराधिकारी -

कृष्णदेव राय के बाद उसका भतीजा अच्युत राय राजगद्दी पर बैठा वह कमजोर शासक था उसकी कमजोरी से गृहयुद्ध छिड़ गया।

4. उड़ीसा बीजापुर के आक्रमण

  1. जिन दिनों विजयनगर साम्राज्य गृहयुद्ध में लिप्त था उन्ही दिनों उड़ीसा के राजा प्रतापरुद्र गजपति तथा बीजापुर के शासक इस्माइल आदिल ने विजयनगर पर आक्रमण कर दिया।
  2. हालाँकि उड़ीसा के राजा तो हारकर चले गए लेकिन बीजापुर के राजा ने विजयनगर के किलो पर अपना अधिकार कर लिया।

तालिकोटा का युद्ध तथा विजयनगर साम्राज्य का अंत -

  1. 1565 में यह युद्ध हुआ विजयनगर और बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा के बीच हुआ।
  2. विजयनगर का नेतृत्व प्रधानमंत्री रामराय ने किया।
  3. इस युद्ध में विजयनगर को हार मिली।
  4. सेनाओं ने विजयनगर शहर को काफी लूटा जिस कारण विजयनगर कुछ ही सालों में उजड़ गया।
  5. और इसी युद्ध को राक्षसी तांगड़ी के युद्ध के नाम से जाना जाता है।

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