कक्षा 12 इतिहास अध्याय 5 के नोट्स हिंदी में
यात्रियों के नज़रिए notes
(Through the Eyes of Travellers)
यहाँ हम कक्षा 12 इतिहास के 5th अध्याय “यात्रियों के नज़रिए” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में यात्रियों के नज़रिए का दौर से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
Class 12 History Chapter 5 Notes in Hindi , यात्रियों के नज़रिए notes

class 12 history chapter 3 notes in hindi
महिलाओं और पुरुषों द्वारा यात्रा के कारण
- महिलाओं और पुरुषों द्वारा यात्रा करने के अनेक कारण थे।
- जैसे कार्य की तलाश में।
- प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए।
- व्यापार करने के लिए।
- पुरोहितों और तीर्थ यात्रियों के रूप में या फिर साहस की भावना से प्रेरित होकर यात्राएं की गईं।
10वीं शताब्दी से 17 वीं शताब्दी में भारत की यात्रा करने वाले मुख्य यात्री
10वीं सदी से 17वीं सदी तक तीन प्रमुख यात्री भारत में आये ।
- अल बिरूनी
- इब्नबतुता
- फ्रांस्वा बर्नियर
अल बिरूनी
- अल बिरूनी का जन्म 973 ई. में, उज्बेकिस्तान में स्थित ख्वारिज्म में हुआ।
- 1017 ई. में ख्वारिज्म पर आक्रमण के पश्चात् महमूद गजनवी ने अल बिरूनी को अपने साथ अपनी राजधानी गजनी ले आया।
- अल बिरूनी ने 70 वर्ष की आयु में अपनी मृत्यु तक बाकी जीवन गजनी में ही बिताया।
- अल बिरूनी द्वारा अरबी भाषा में लिखी गई ‘किताब उल हिन्द 80 अध्यायों में विभाजित है।
किताब-उल-हिन्द
- अरबी भाषा में लिखी गई अलबिरूनी की कृति किताब-उल-हिन्द की भाषा सरल और स्पष्ट है।
- किताब-उल-हिन्द 80 अध्यायों में विभाजित है।
- किताब-उल-हिन्द एक विस्तृत ग्रंथ है, जो धर्म और दर्शन, त्यौहारों, खगोल विज्ञान, कीमिया (रसायनशास्त्र में कृत्रिम सोना बनाने की विधि) कानून, सामाजिक जीवन आदि विषयों से संबंधित है।
किताब-उल-हिन्दमें वर्णित की कुछ मुख्य बाते
भारतीय जाति व्यवस्था
- अलबरूनी ने फारस की जाति व्यवस्था की तुलना भारतीय जाति व्यवस्था से की।
- भारत समाज में वर्ण व्यवस्था प्रचलित थी।
- भारतीय समाज को चार वर्णों में बांटा गया था।
- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र।
- ऋग्वेद के पुरुष सूक्त में चारों वर्ण का उत्पति ब्रह्म के चार अंग से मानी गई है।
- ऐसा माना जाता है की ब्राह्मण ब्रह्म के मुख से, क्षत्रिय बाहू से, वैश्य जंघा से और शुद्र पैर से उपन्न हुए हैं।
- ब्राह्मण का कार्य सम्पन्न करना, क्षत्रिय का काम रक्षा करना, वैश्य का काम व्यापार करना और शुद्र का काम इन तीनों वर्ण का सेवा करना था।
- यह जन्म पर आधारित थी।
फारस की जाति व्यवस्था
फारस की जाती व्यवस्था में में भी भारत की तरह चार वर्ण थे
(i) घुड़सवार और शासक वर्ग
(ii) खगोलशास्त्री तथा अन्य वैज्ञानिक
(iii) भिक्षु, आनुष्ठानिक पुरोहित तथा चिकित्सक
(iv) कृषक तथा शिल्पकार
- फारस की जाती व्यवस्था में वर्ण का निर्धारण उनके काम के अनुसार होता था।
- वहीं भारत की जाति व्यवस्था जन्म पर आधारित थी।
- अल बिरूनी यह दिखाना चाहता था कि ये सामाजिक वर्ग भारत तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि ये अन्य देशों में भी थे।
इब्नबतुता
- इब्नबतुता अरब यात्री, विद्धान तथा लेखक था।
- इनका पूरा नाम “मुहम्मद बिन अब्दुल्ला इब्नबतूता ” था।
- इनका जन्म अफ्रीका महादेश के मोरक्को देश 4 तजियर नामक स्थान पर हुआ था।
- इब्नबतूता मुसलमान यात्रियों के सबसे महान था।
- उसने इराक, मक्का, सीरिया, यमन, ओमान, आदि की यात्रा की।
- वह दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक से मिलने के लिए दिल्ली आए।
- मोहम्मद बिन तुगलक के ज्ञान से अत्यंत प्रभावित हुए और उन्हें अपने राज्य में काजी (न्यायधीश का पद) प्रदान किया उन्होंने एक पुस्तक की रचना की जिसका नाम रिहला है।
इब्नबतूता की यात्रा समस्याएं
- इब्न बतूता चौदहवीं शताब्दी में यात्राएं कर रहा था, जब आज की तुलना में यात्रा करना अधिक कठिन तथा जोखिम भरा कार्य था।
- कई प्रकार की कठिनाइयां यात्रा में व्यवधान डालती थी।
- यात्रा में चोर, लुटेरों, समुद्री डाकुओं, जंगली जीवों, बीमारियों का भय रहता था तथा यात्रा के साधन भी नहीं थे।
- इब्न बतूता के अनुसार मुल्तान से दिल्ली की यात्रा में चालीस और सिन्ध से दिल्ली की यात्रा में लगभग पचास दिन का समय लगता था।
- दौलताबाद से दिल्ली की दूरी चालीस, जबकि ग्वालियर से दिल्ली की दूरी दस दिन में तय की जा सकती थी।
- जब वह मुल्तान से दिल्ली की यात्रा पर था तो रास्ते में डाकुओं ने उसके कारवों पर हमला बोल दिया, इब्न बतूता बुरी तरह घायल हो गया और कई सहयात्रियों की डाकुओं ने हत्या कर दी।
रिहला में वर्णित की कुछ मुख्य बाते
दास प्रथा
- इब्न बतूता के अनुसार बाजारों में दास किसी भी अन्य वस्तु की तरह खुले आम बेचे जाते थे और नियमित रूप से भेंट स्वरूप दिए जाते थे।
- इब्न बतूता के विवरण से प्रतीत होता है कि दासों में काफी विभेद था।
- सुल्तान की सेवा में कार्यरत कुछ दासियां संगीत गायन में निपुण थीं। सुल्तान अपने अमीरों पर नजर रखने के लिए दासियों को भी नियुक्त करता था।
- दासों को सामान्यतः घरेलू श्रम के लिए ही इस्तेमाल किया जाता था।
- दासों की कीमत, विशेष रूप से उन दासियों की जिनकी आवश्यकता घरेलू श्रम के लिए थी, बहुत कम होती थी।
फ्रांस्वा बर्नियर
- फ्रांस्वा बर्नियर का जन्म 1620 ईसा में फ़्रांस में हुआ।
- यह एक दार्शनिक, इतिहासकार, राजनीतिक और चिकित्सक थे।
- अवसरों की तलाश में यह भारत आए थे और उस समय भारत पर मुगलों का शासन था।
- भारत में वह 1656 ई० से 1668 ई० तक रहें।
- बर्नियर ने सारे देश का भ्रमण किया।
- इस दौर में उन्होंने अपनी एक पुस्तक ट्रेवल्स इन द मुग़ल एम्पायर लिखी |
ट्रेवल्स इन द मुग़ल एम्पायर में लिखी कुछ मुख्य बाते
भूमि स्वामित्व
- बर्नियर के अनुसार भारत में निजी भू-स्वामित्व का अभाव था। वह भूमि पर राजकीय स्वामित्व को राज्य तथा उसके निवासियों दोनों के लिए हानिकारक मानता था।
- बर्नियर को प्रतीत हुआ कि भूमि पर सम्पूर्ण अधिकार सम्राट का था जिसे वह अपने अमीरों में बांटता था। फलस्वरूप इसकी अर्थव्यवस्था और समाज पर हानिकारक प्रभाव पड़ता था।
- बर्नियर के अनुसार भूमिस्वामी अपने बच्चों को भूमि नहीं दे सकते थे। इसलिए वे उत्पादन के स्तर को बनाये रखने और उसमें बढ़ावे के लिए निवेश के प्रति उदासीन थे।
- निजी स्वामित्व के अभाव ने बेहतर भूस्वामी के वर्ग के उदय को रोका जो भूमि के रख-रखाव व बेहतरी के प्रति सजग रहते थे।
- निजी भूमि स्वामित्व के कारण कृषि का विनाश, कृषकों का उत्पीड़न तथा समाज के सभी वर्गों के जीवन स्तर में गिरावट आई।
सती प्रथा
- फ्रांस्वा बर्नियर ने सती प्रथा को विस्तृत विवरण के लिए चुना।
- उसने लिखा कि हालांकि कुछ महिलाएं प्रसन्नता से मृत्यु को गले लगा लेती थी, अन्य को मरने के लिए बाध्य किया जाता है।
- बर्नियर के अनुसार यह क्रूर प्रथा थी, जिसमें पति की मृत्यु होने पर विधवा स्त्री को जीवित ही अग्नि में भेंट चढ़ा दिया जाता था, इस प्रक्रिया में ब्राह्मण व घर की बड़ी महिलाएं भी भाग लेती थी।
- सती होने वाली विधवा के हाथ-पैर बाँध दिये जाते थे ताकि वह सती स्थल से भाग न सकें ।
ncert Class 12 History Chapter 5 Notes in Hindi
के notes आपको कैसे लगे अपनी राय जरूर दे
This notes is very important for class 12 board exam.
Thanks 😊.
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Thanks 😊.
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Thanks 🤗
Itihas ke bare me bta ye