भारत स्थिति Notes
कक्षा 11 भूगोल अध्याय 1 के नोट्स हिंदी में
यहाँ हम कक्षा 11 भूगोल Book 2 के 1st अध्याय “भारत स्थिति” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में भारत स्थिति से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।
ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।
भारत स्थिति Notes, कक्षा 11 भूगोल अध्याय 1 के नोट्स हिंदी में

Class 11 Geography Chapter 1 Notes in Hindi
भारत
- भारत का कुल क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग कि.मी. है।
- विश्व के मानचित्र पर भारत की स्थिति 84′ उत्तरी अक्षांश से लेकर उत्तर में 37° 6′ उत्तरी अक्षांश के बीच तथा पश्चिम में 68° 7 पूर्वी देशान्तर से पूर्व में 97 25 पूर्वी देशान्तर के बीच में है।।
- इसका उत्तर से दक्षिण तक विस्तार लगभग 3214 कि. मी. है जबकि पूर्व से पश्चिम तक विस्तार 2933 कि. मी. है। इस तरह इसके अक्षांशीय व देशांतरीय विस्तार में लगभग 30 का अंतर है।
- भारत की समुद्री सीमा मुख्य भूमि से 12 समुद्री मील अर्थात लगभग 21.9 किलोमीटर तक है।
भारत का आकार
भारत का क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर है और भारत विश्व का 7 वां बड़ा देश है।
विशिष्ट भौतिक विविधता
- उत्तर में ऊंचे पर्वत ।
- गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी जैसी बड़ी नदियाँ।
- उत्तर पूर्व और दक्षिण भारत में – वनों से ढकी पहाड़ियां।
- मरुस्थलों में रेत का फैलाव।
- उत्तर में हिमालय उत्तर पश्चिम में हिंदूकुश व सुलेमान श्रेणी।
- उत्तर पूर्व में पूर्वांचल पहाड़ियां।
- दक्षिण में विशाल हिन्द महासागर।
क्षेत्रफल के आधार पर संसार के देशों में भारत की स्थिति
- क्षेत्रफल के आधार पर भारत संसार का सातवाँ बड़ा देश है। भारत से अधिक क्षेत्रफल वाले देश
- क्रमशः-
- रूस,
- चीन,
- कनाडा,
- संयुक्त राज्य अमेरिका,
- आस्ट्रेलिया तथा ब्राजील है।
उपमहाद्वीप
- किसी महाद्वीप का एक बड़ा भाग जो भौगोलिक, सांस्कृतिक व आर्थिक दृष्टि से महाद्वीप के अन्य भागों से अलग पहचान रखता है तथा उसके भूभाग में एकरूपता हो, उपमहाद्वीप कहलाता है।
- भारतीय उपमहाद्वीप में सम्मिलित देशों के नाम:-
- भारतीय उपमहाद्वीप में उत्तर पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में नेपाल, भूटान, पूर्व में बंगलादेश तथा मध्य में भारत सम्मिलित है।
भारतीय उपमहाद्वीप में सम्मिलित देशों के नाम
भारतीय उपमहाद्वीप में उत्तर पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में नेपाल, भूटान, पूर्व में बंगलादेश तथा मध्य में भारत सम्मिलित है।
हिन्द महासागर (हिन्दुस्तान का महासागर)
- भारत को हिंद अर्थात् हिंदुस्तान के नाम से भी जाना जाता है। यही एक मात्र महासागर है जिसका नामकरण किसी देश के नाम पर हिंदमहासागर हुआ है।
- पश्चिम एशिया तथा पूर्वी एशिया के बीच हिन्द महासागर के तट पर भारत की स्थिति बहुत ही महत्वपूर्ण है।
- इस महासागर के उत्तरी छोर पर स्थित भारत की तट रेखा अन्य किसी भी देश की तट रेखा से अधिक लम्बी है।
हिंद महासागर के शीर्ष पर स्थित भारत की केंद्रीय स्थिति क्यों महत्वपूर्ण है?
- भारतीय प्रायद्वीप हिन्द महासागर में लगभग 1600 कि. मी. तक विस्तृत है।
- पश्चिम में अरब सागर तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी दक्षिण मध्य एशिया में हिंदमहासागर के शीर्ष पर भारत की केन्द्रीय स्थिति पश्चिम में स्थित यूरोप के विकसित राष्ट्रों से संबंध स्थापित करने में सहायक हैं।
- वहीं दूसरी और अफ्रीका, पश्चिम एशिया, दक्षिण पूर्वी एशिया, जापान, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व अमेरिका आदि देशों से व्यापारिक संबंध स्थापित करने में सहायक हैं।
- नोट:- इस प्रकार हम कह सकते हैं हिन्द महासागर वास्तव में भारत के लिए एक वरदान है
भारत की लंबी तटरेखा के लाभ
- बंदरगाहों के विकास के लिए अनुकूल दशाएँ उपलब्ध कराती हैं तथा रोजगार सृजन में सहायक है।
- व्यापार के लिए उपयोगी जलमार्ग उपलब्ध कराती हैं।
- अफ्रीका, औद्योगिक दृष्टि से विकसित यूरोप तथा सम्पन्न पश्चिम एशिया को दक्षिण – पूर्वी एशियाई देशों, चीन, विकसित उद्योग वाले जापान, आस्ट्रेलिया तथा संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के पश्चिमी तट को जोड़ने वाले पार महासागरीय जल मार्ग भारत से होकर गुजरते हैं।
भारत के सबसे पूर्वी भाग अरूणाचल प्रदेश और सबसे पश्चिमी भाग गुजरात के स्थानीय समय में दो घंटे का अंतर है। क्यों?
- अरूणाचल प्रदेश तथा गुजरात के बीच में लगभग 30° डिग्री अर्थात 2933 किलोमीटर का देशांतरीय अंतर है। सूर्य को एक देशान्तर से दूसरे देशान्तर पर पहुँचने में 4 मिनट का समय लगता है।
- अतः अरूणाचल प्रदेश व गुजरात के बीच समय का अन्तर 30 × 4 = 120 मिनट अर्थात दो घंटे का है।
उष्ण कटिबंधीय सूर्य से प्रचुर मात्रा में मिलने वाली धूप और मानसूनी वर्षा करोड़ों भारतवासियों की नियति तय करती है कैसे?
तापमान और वर्षा जलवायु के दो मुख्य तत्व हैं। इनका प्रत्यक्ष प्रभाव यहाँ की मिट्टियों, जीव -जन्तुओं व मानवीय क्रियाकलापों पर पड़ता है। कृषि पर आधारित उद्योगों और उनसे जुड़े लोगों का भाग्य इन दो जलवायु तत्वों से जुड़ा है इसलिए यह कहना बिल्कुल उपयुक्त है कि उष्ण कटिबंधीय सूर्य से प्रचुर मात्रा में मिलने वाली धूप और मानसूनी वर्षा करोडो भारतवासियों की नियति तय करती है।
हैदराबाद में दोपहर का सूर्य कभी शिराबिन्दु से उत्तर की ओर तथा कभी दक्षिण की ओर होता है, लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं होता। क्यों?
सूर्य का आभासी संचरण कर्क व मकर के बीच होता है। हैदराबाद कर्क रेखा के दक्षिण में स्थित है इसलिए यहाँ सूर्य वर्ष में दो बार शिरोबिंदु पर उत्तरायन व दक्षिणयन परिगमन करते हुए रहता है। जबकि दिल्ली कर्क रेखा के उत्तर में स्थित होने के कारण यहाँ सूर्य शिरोबिंदु के दक्षिण में ही रहता है।
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