खनिज तथा ऊर्जा संसाधन Notes
Class 12 Geography Chapter 5 Notes in Hindi

यहाँ हम कक्षा 12 भूगोल के 5th अध्याय “खनिज तथा ऊर्जा संसाधन” के नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। इस अध्याय में खनिज तथा ऊर्जा संसाधन से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन किया गया है।

ये नोट्स उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे जो इस वर्ष बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। सरल और व्यवस्थित भाषा में तैयार की गई यह सामग्री अध्याय को तेजी से दोहराने और मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मदद करेगी।

खनिज तथा ऊर्जा संसाधन Notes, Class 12 Geography Chapter 5 Notes in Hindi

खनिज तथा ऊर्जा संसाधन Notes, Class 12 Geography Chapter 5 Notes in Hindi

Class 12 Geography Chapter 5 Notes in Hindi

खनिज

  • एक खनिज वह प्राकृतिक पदार्थ है जिसमें निश्चित रासायनिक व भौतिक गुण होते हैं। इनकी उत्पत्ति का आधार अजैविक, कार्बनिक या अकार्बनिक हो सकता है।
  • उदाहरण के लिए :- लोहा, कोयला, बॉक्साइट आदि ।

खनिज के प्रकार

रासायनिक व भौतिक गुणों के आधार पर खनिज के प्रकार:

धात्विक खनिज :-

  • लौह अयस्क, तांबा व सोना, मैंगनीज और बॉक्साइट आदि धातु से प्राप्त होते है, इन्हें धात्विक खनिज कहते है।
  • धात्विक खनिजों के मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है-

लौह :-

  • वह खनिज जिसमें लौह के अंश मौजूद होते है, लौह धात्विक खनिज कहलाते है।
  • उदाहरण के लिए : लोहा और मैंगनीज आदि ।

अलौह :-

  • वह खनिज जिसमें लोहे का अंश मौजूद नहीं होते, अलौह खनिज कहलाते हैं।
  • उदाहरण के लिए :- तांबा बॉक्साइट आदि।

अधात्विक खनिज :-

  • अधात्विक खनिज कार्बनिक तथा अकार्बनिक उत्पत्ति के होते हैं।
  • ये खनिज दो प्रकार के होते है।

इंधन खनिज :-

  • कार्बनिक उत्पति के होते हैं, जिन्हें खनिज ईंधन भी कहते है। उन्हें पृथ्वी में दबें प्राणियों एवं पादप जीवों से प्राप्त किया जाता हैं।
  • जैसे जीवाश्म ईंधन, कोयला और पैट्रोलियम ।

अन्य खनिज :-

  • अन्य अकार्बनिक उत्पति के खनिज होते है।
  • जैसे अभ्रक, चूना पत्थर और ग्रेफाइट आदि

भारत में खनिज एजेंसियाँ :-

  • राष्ट्रीय अल्यूमिनियम कंपनी लि.
  • भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण (GSI)
  • तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग ONGC (1956)
  • एजेन्सीज जो खनिजों के अन्वेषण में संलग्न है
  • खनिज अन्वेषण निगम लि. MECL
  • हिन्दुस्तान कॉपर लि.
  • भारत गोल्ड माइन्स
  • भारतीय खान ब्यूरो
  • राष्ट्रीय खनिज विकास निगम

तांबे के लाभ तथा क्षेत्र

  • बिजली की मोटरें, ट्रांसफार्मर, जेनरेटर्स आदि के बनान लिए ताँबा अपरिहार्य धातु है।
  • यह एक आघातवर्द्धनीय तथा तन्य धातु हैं।
  • आभूषणों को मजबूती प्रदान करने के लिए इसे सोने के साथ मिलाया जाता है।
  • खनन क्षेत्र – झारखण्ड का सिंहभूमि जिला, मध्यप्रदेश में बालाघाट कर्नाटक में चित्रदुर्ग राजस्थान में झुंझुनु, अलवर व खेतड़ी जिले।

मैंगनीज के लाभ तथा क्षेत्र

  • लौह अयस्क के प्रगलन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
  • इसका उपयोग लौह मिश्र धातु तथा विनिर्माण में भी किया जाता है।
  • खनन क्षेत्र :- उड़ीसा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश व झारखण्ड ।

ऊर्जा संसाधन

  • वह सभी संसाधन जो ऊर्जा प्रदान करते हैं, ऊर्जा संसाधन कहलाते हैं।
  • कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस जैसे खनिज ईंधन (जो जीवाश्म ईंधन के रूप में जाने जाते हैं), परमाणु ऊर्जा, ऊर्जा के परंपरागत स्रोत हैं।

ऊर्जा संसाधनों के प्रकार :-

परंपरागत (अनवीकरणीय)(समाप्य):-

  • कोयला
  • पेट्रोलियम
  • प्राकृतिक गैस

अपरंपरागत (नवीकरणीय)(असमाप्य संसाधन)

  • सौर ऊर्जा
  • पवन
  • जल विद्युत जैविक
  • ज्वारीय तथा तरंग ऊर्जा

ऊर्जा के परंपरागत संसाधन

  • कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा नाभिकीय ऊर्जा जैसे ईंधन के स्रोत समाप्य कच्चे माल का प्रयोग करते हैं।
  • इन साधनों का वितरण बहुत असमान है।
  • ये साधन पर्यावरण अनुकूल नहीं है अर्थात पर्यावरण प्रदूषण में इनकी बड़ी भूमिका है।

ऊर्जा के गैर अपरंपरागत संसाधन

  • सौर, पवन, जल, भूतापीय ऊर्जा असमाप्य है।
  • ये साधन अपेक्षाकृत अधिक समान रूप से वितरित है।
  • ये ऊर्जा के स्वच्छ साधन और पर्यावरण हितैषी है।

ऊर्जा के अपरम्परागत स्रोत

सौर ऊर्जा :-

भारत के परिचमी भागों गुजराज व राजस्थान में और ऊर्जा के विकास की अधिक संभावनाएं है।

पवन ऊर्जा :-

पवन ऊर्जा के लिए राजस्थान, गुजराज, महाराष्ट्र, तथा कर्नाटक में अनुकूल परिस्थितियों विधमान है।

ज्वारीय ऊर्जा :-

भारत के पश्चिमी तट के साथ ज्वारीय ऊर्जा विकसित होने की व्यापक संभावनाएं है।

भूतापीय ऊर्जा :-

इसके लिए हिमालय प्रदेश, में विकसित होने की व्यापक संभावनाएं है।

जैव ऊर्जा :-

ग्रामीण क्षेत्रों में जैव ऊर्जा विकसित होने की व्यापक संभावनाएं है।

अपटत वेधन:-

समुद्र तट से दूर समुद्र की तली में मौजूद प्राकृतिक तेल को वेधन करके प्राप्त करना अपतट वेधन है।

भारत में पाए जाने वाली खनिजों की विशेषताएं :-

  • खनिज, असमान रूप में वितरित होते हैं। सब जगह सभी खनिज नहीं मिलते ।
  • अधिक गुणवत्ता वाले खनिज, कम गुणवत्ता वाले खनिजों की तुलना में कम मात्रा में पाए जाते हैं। खनिजों की गुणवत्ता व मात्रा में प्रतिलोमी संबंध पाया जाता है।
  • सभी खनिज समय के साथ समाप्त हो जाते हैं। भूगार्भिक दृष्टि से इन्हें बनने में लम्बा समय लगता है और आवश्यकता के समय इनका तुरन्त पुनर्भरण नहीं किया जा सकता है।

भारत में खनिजों का संरक्षण क्यों आवश्यक है ?

  • एक देश की ऊर्जा की आवश्यता को पूरा करने में खनिज महत्वपूर्ण भूमिका महत्वपू‌र्ण भूमिका निभाते हैं।
  • खनिजों का संरक्षण करना आवश्यक है क्योंकि खनिज ऊर्जा के मुख्य साधनों में से एक है।
  • खनिज एक समाप्य संसाधन है और एक समय के बाद समाप्त हो जाएगा।
  • खनिजों को प्राकृतिक रूप से बनने में लाखों वर्षों का समय लगता हैं।
  • इसी वजह से इनकी समाप्ति के बाद इन्हें प्राप्त करना अत्यंत कठिन हैं।
  • सतत पोषणीय विकास सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान दौर में खनिजों का संरक्षण करना जरुरी है ताकि आगे आने वाली पीढ़ी भी खनिजों का भरपूर प्रयोग कर सकें ।

खनिजों का संरक्षण की विधियाँ:-

  • इसके लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा, पवन, तरंग व भूतापीय ऊर्जा के असमाप्य स्रोतों का प्रयोग करना चाहिए ।
  • धात्विक खनिजों में, छाजन धातुओं के उपयोग तथा धातुओं के पुर्नचक्रण पर बल देना चाहिए ।
  • अत्यल्प खनिजों के लिए प्रति स्थापनों का उपयोग भी खनिजों के। संरक्षण में सहायक है।
  • सामरिक व अति अल्प खनिजों के निर्यात को भी घटाना चाहिए।
  • सबसे उचित तरीका है खनिजों का सूझ बूझ से तथा मितव्यतता से प्रयोग कराना है ताकि वर्तमान आरक्षित भण्डारों का लंबे समय तक प्रयोग किया जा सके ।

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